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राजापुर गांव के पास घाघरा तट पर लगेगा ठुठवा मेला
Updated Sun, 18 Nov 2018 04:35 PM IST
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ईसानगर। घाघरा नदी के तट पर लगने वाला जिले का सबसे बड़ा मेला सजना शुरू हो गया है। दूर-दराज से दुकानदार पहुंच गए हैं। ठुठवा मेला, कार्तिक मेला और गंगा स्नान के नाम से मशहूर है। गांजर के इस मेले में कई जिलों के लोगों की भीड़ उमड़ती है। रविवार की दोपहर एसडीएम आलोक मिश्र, मेला प्रभारी हनुमंत तिवारी ने राजस्व कर्मियों के साथ नदी घाट पर पहुंचकर निरीक्षण किया। घाघरा नदी के तट पर मेला इस बार भी राजापुर गांव के पास ही लगेगा।
मेले का उत्साह लोगों में काफी रहता है। इस मेले में सीतापुर, बहराइच, पीलीभीत, शाहजहांपुर सहित कई जिलों से लोग आते हैं। कई दिनों तक चलने वाले इस मेले की जगह ईसानगर और धौरहरा के हलवाई तय करते हैं। इस मेले की शुरुआत ईसानगर स्टेट के राजा ने दशकों पहले कराई थी। उस समय आवागमन के साधन नहीं थे। लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए शहर पहुंचने में दिक्कत होती थी। लोगों को एक ही जगह पर सभी वस्तुएं मिल जाएं, इसके लिए घाघरा नदी के तट पर मेले की शुरुआत कराई गई। कार्तिक पूर्णिमा को लगने वाले इस मेले का इंतजार साल भर तक लोगों को रहता है। मेले में घर-गृहस्थी की दुकानें तो सजती ही हैं। साथ ही खेल तमाशों की दुकानें भी लगती हैं। मेले की शुरुआत से अब तक मेला स्थल का चयन ईसानगर और धौरहरा के हलवाई ही करते हैं। इस बार भी मेला राजापुर गांव के पास लग रहा है। प्रशासन ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया। दूर-दराज से आए दुकानदारों ने दुकानें सजाना शुरू कर दिया है। यह मेला करीब पांच दिनों तक चलता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन नदी में स्नान और पूजा के बाद लोग मेले में जरूरत का सामान खरीदते हैं।
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मेले का उत्साह लोगों में काफी रहता है। इस मेले में सीतापुर, बहराइच, पीलीभीत, शाहजहांपुर सहित कई जिलों से लोग आते हैं। कई दिनों तक चलने वाले इस मेले की जगह ईसानगर और धौरहरा के हलवाई तय करते हैं। इस मेले की शुरुआत ईसानगर स्टेट के राजा ने दशकों पहले कराई थी। उस समय आवागमन के साधन नहीं थे। लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए शहर पहुंचने में दिक्कत होती थी। लोगों को एक ही जगह पर सभी वस्तुएं मिल जाएं, इसके लिए घाघरा नदी के तट पर मेले की शुरुआत कराई गई। कार्तिक पूर्णिमा को लगने वाले इस मेले का इंतजार साल भर तक लोगों को रहता है। मेले में घर-गृहस्थी की दुकानें तो सजती ही हैं। साथ ही खेल तमाशों की दुकानें भी लगती हैं। मेले की शुरुआत से अब तक मेला स्थल का चयन ईसानगर और धौरहरा के हलवाई ही करते हैं। इस बार भी मेला राजापुर गांव के पास लग रहा है। प्रशासन ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया। दूर-दराज से आए दुकानदारों ने दुकानें सजाना शुरू कर दिया है। यह मेला करीब पांच दिनों तक चलता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन नदी में स्नान और पूजा के बाद लोग मेले में जरूरत का सामान खरीदते हैं।
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