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1.31 लाख किसानों ने मिलों को नहीं बेचा गन्ना
अमित गुप्ता लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 02 Nov 2016 10:43 PM IST
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sugar cane
- फोटो : amar ujala
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जीपीएस सर्वे के बावजूद किसानों की वास्तविक संख्या पर सस्पेंस
2015-16 में 3.21 लाख किसानों ने गन्ना बेचा
गन्ना समितियों में 4.52 लाख सदस्य किसान
गन्ना किसानों की वास्तविक संख्या पर अब भी सस्पेंस बना हुआ है, जबकि बेहद हाईटेक जीपीएस तकनीक से गन्ना सर्वे कराए जाने का दावा किया जा रहा है। पेराई सत्र 2015-16 में सहकारी गन्ना विकास समितियों पर 4.40 लाख गन्ना किसान पंजीकृत थे, जिसमें 3.21 लाख किसानों ने ही चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई किया। जबकि एक लाख 31 हजार समितियों के सदस्य किसानों ने गन्ना सप्लाई नहीं किया।
जिले में इस वर्ष समितियों में पंजीकृत गन्ना किसानों की संख्या 4.52 लाख तक पहुंच गई है, जिसमें 12 हजार नए किसान इसी वर्ष शामिल हुए हैं। सट्टा माफिया पर अंकुश लगाने और पारदर्शिता लाने के लिए करीब तीन साल पहले से ही गन्ना विभाग ने जीपीएस सर्वे अनिवार्य किया था। इससे वास्तविक गन्ना क्षेत्रफल के हिसाब से गन्ना किसानों का गन्ना सप्लाई सट्टा निर्धारित करने में आसानी होती। वहीं सट्टा माफिया को गन्ना सेंटर से दूर रखने की कवायद को अमली जामा पहनाना था। गन्ना विभाग के आंकड़ों ने जीपीएस सर्वे की सफलता पर प्रश्नचिह्न जरूर लगा दिया है, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित चीनी मिल प्रबंधन पर थी। 2015-16 में 3.21 लाख किसानों ने चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई किया, जबकि 1.31 लाख किसानों ने मिलों को गन्ना नहीं बेचा। ऐसे सट्टाधारक किसानों को विभाग निष्क्रिय मान रहा है, जिसके पीछे कारणों में गन्ने की बुवाई न करने का हवाला दिया जा रहा है। वहीं सूत्र इसे गन्ना समितियों में होने वाले संचालक पदों के चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं। क्योंकि जिले की कैश क्राप होने के कारण गन्ने की सियासत भी कम नहीं है, जिससे अपना दबदबा कायम करने के लिए फर्जी किसानों को सदस्य बनाए जाने की आशंका बनी हुई है।
शत प्रतिशत गन्ना सर्वे जीपीएस से कराया गया है, जिससे गन्ना माफिया पर अंकुश लगना तय है। कुछ ऐसे भी किसान हैं, जो कभी-कभी गन्ना बुवाई नहीं करते हैं। छोटे किसान समय से पर्ची न मिलने पर क्रेशर और कोल्हुओं पर गन्ना बेच देते हैं। शायद इन्हीं वजहों से पिछले वर्ष एक लाख से अधिक सदस्य किसानों ने गन्ना सप्लाई नहीं किया है।
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-जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी
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2015-16 में 3.21 लाख किसानों ने गन्ना बेचा
गन्ना समितियों में 4.52 लाख सदस्य किसान
गन्ना किसानों की वास्तविक संख्या पर अब भी सस्पेंस बना हुआ है, जबकि बेहद हाईटेक जीपीएस तकनीक से गन्ना सर्वे कराए जाने का दावा किया जा रहा है। पेराई सत्र 2015-16 में सहकारी गन्ना विकास समितियों पर 4.40 लाख गन्ना किसान पंजीकृत थे, जिसमें 3.21 लाख किसानों ने ही चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई किया। जबकि एक लाख 31 हजार समितियों के सदस्य किसानों ने गन्ना सप्लाई नहीं किया।
जिले में इस वर्ष समितियों में पंजीकृत गन्ना किसानों की संख्या 4.52 लाख तक पहुंच गई है, जिसमें 12 हजार नए किसान इसी वर्ष शामिल हुए हैं। सट्टा माफिया पर अंकुश लगाने और पारदर्शिता लाने के लिए करीब तीन साल पहले से ही गन्ना विभाग ने जीपीएस सर्वे अनिवार्य किया था। इससे वास्तविक गन्ना क्षेत्रफल के हिसाब से गन्ना किसानों का गन्ना सप्लाई सट्टा निर्धारित करने में आसानी होती। वहीं सट्टा माफिया को गन्ना सेंटर से दूर रखने की कवायद को अमली जामा पहनाना था। गन्ना विभाग के आंकड़ों ने जीपीएस सर्वे की सफलता पर प्रश्नचिह्न जरूर लगा दिया है, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित चीनी मिल प्रबंधन पर थी। 2015-16 में 3.21 लाख किसानों ने चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई किया, जबकि 1.31 लाख किसानों ने मिलों को गन्ना नहीं बेचा। ऐसे सट्टाधारक किसानों को विभाग निष्क्रिय मान रहा है, जिसके पीछे कारणों में गन्ने की बुवाई न करने का हवाला दिया जा रहा है। वहीं सूत्र इसे गन्ना समितियों में होने वाले संचालक पदों के चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं। क्योंकि जिले की कैश क्राप होने के कारण गन्ने की सियासत भी कम नहीं है, जिससे अपना दबदबा कायम करने के लिए फर्जी किसानों को सदस्य बनाए जाने की आशंका बनी हुई है।
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शत प्रतिशत गन्ना सर्वे जीपीएस से कराया गया है, जिससे गन्ना माफिया पर अंकुश लगना तय है। कुछ ऐसे भी किसान हैं, जो कभी-कभी गन्ना बुवाई नहीं करते हैं। छोटे किसान समय से पर्ची न मिलने पर क्रेशर और कोल्हुओं पर गन्ना बेच देते हैं। शायद इन्हीं वजहों से पिछले वर्ष एक लाख से अधिक सदस्य किसानों ने गन्ना सप्लाई नहीं किया है।
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-जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी