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बाढ़ से बचाव की कसरत केवल जुबानी
kushinagar
Updated Sun, 10 Jul 2016 11:29 PM IST
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लापरवाही
- फोटो : santosh verma
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पडरौना। जिले के एक तिहाई हिस्से को इस वर्ष बाढ़ के कहर से अब केवल कुदरत ही बचा सकती है। वजह यह कि शासन ने बंधों के बचाव कार्य के लिए स्वीकृत 86.10 करोड़ की 23 परियोजनाओं तथा जलनिकासी के लिए बनी 3.68 करोड़ की एक परियोजना के लिए अब तक फूटी कौड़ी भी नहीं दी है। बड़ी गंडक नदी एपी तटबंध के किनारे चैनपट्टी और अहिरौलीदान समेत कई जगह कटान करते हुए आगे बढ़ रही है, तो वहीं छोटी गंडक नदी भी कई जगह किनारों पर दबाव बनाए हुए है। परंतु बंधों के अति संवेदनशील माने जा रहे इन जगहों पर भी बचाव कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं।
हिमालय से निकली बड़ी गंडक (नारायणी) और छोटी गंडक नदियां कुशीनगर जिले में हर वर्ष बरसात के दिनों में तबाही मचाती हैं। खड्डा और तमकुहीराज तहसीलों का करीब आधा हिस्साहर साल बड़ी गंडक नदी की बाढ़ से प्रभावित होता है। बाढ़ रोकने के लिए इस नदी के किनारे करीब 100 किलोमीटर लंबा बांध बना है। सत्तर के दशक में बने ये सभी बांध जर्जर हो चले हैं। सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड डिवीजन ने इन बांधों की मरम्मत और अन्य सुरक्षात्मक उपाय के लिए इस वर्ष 85 करोड़ 23 लाख 92 हजार की लागत वाली 22 परियोजनाओं को प्रस्तावित किया था, जिसे हाई लेवल कमेटी की मंजूरी मिल चुकी है। इसमें से छितौनी बांध की 10 परियोजनाओं के लिए 45 करोड़ 97 लाख 68 हजार रुपये, नौतार बांध की एक परियोजना के लिए पांच करोड़ 11 लाख 99 हजार रुपये, अमवा खास तटबंध की पांच परियोजनाओं के लिए 10 करोड़ 22 लाख 68 हजार रुपये तथा अहिरौलीदान-पिपराघाट (एपी तटबंध) की छह परियोजनाओं के लिए 23 करोड़ 91 लाख 57 हजार रुपये के प्रस्ताव शामिल हैं। छितौनी बांध की 10 में से पांच परियोजनाएं तथा एपी तटबंध की छह में चार परियोजनाएं अति संवेदनशील स्थानों के लिए बनी थीं।
इसी तरह छोटी गंडक नदी के किनारे स्थित दुबौली-सिकटिया बांध के किलोमीटर 1.500 से 1.700 के बीच अतिसंवेदनशील स्थल की सुरक्षा के लिए भी 86.25 लाख की एक परियोजना स्वीकृत है। परंतु 86.10 करोड़ की इन 23 में से एक भी परियोजना पर कार्य कराने के लिए बजट अवमुक्त नहीं हुआ। बड़ी गंडक नदी एपी तटबंध के चैनपट्टी और अहिरौलीदान गांव के सामने लगातार कटान कर रही है। अहिरौलीदान के कचहरी टोले पर तो आठ लोग अब तक अपना पक्का मकान तोड़कर बंधे पर शरण ले चुके हैं। चैनपट्टी के सामने भी बंधे और नदी के बीच कम ही फासला बचा है। बाढ़ खंड डिवीजन ने बीते मई महीने में अहिरौलीदान गांव के पास हो रहे कटान को रोकने के लिए धन मिलने की प्रत्याशा में काम भी शुरू कराया था, लेकिन बाद में उसे रोकना पड़ा। जुलाई महीने की शुरुआत में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ते ही एपी तटबंध पर खतरा मंडराने लगा तो सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता से लगायत जिला प्रशासन तक ने मौका मुआयना कर बचाव कार्य कराने का निर्देश बाढ़ खंड को दिया लेकिन धनाभाव के चलते कहीं कोई बचाव कार्य शुरू नहीं हो पाया।
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सिधरिया ताल डे्रन के लिए भी नहीं मिला पैसा
पडरौना। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र में स्थित सिधरिया ताल बरसात के पानी से नदी जैसा हो जाता है। इस ताल से जलनिकासी के लिए ड्रेन बना है, जिसकी पुनर्स्थापना के लिए इस वर्ष तीन करोड़ 68 लाख 14 हजार के प्रस्ताव को मंजूरी मिली थी। बाढ़ खंड डिवीजन के अनुसार ड्रेन की चौड़ाई और गहराई कम हो जाने के चलते बरसात में पानी ओवरफ्लो होकर अगल-बगल के खेतों में भर जाता है। इससे हर साल सैकड़ों एकड़ फसलें जलमग्न होकर बर्बाद हो जाती हैं। परंतु यह महत्वपूर्ण कार्य भी बजट के अभाव में शुरू नहीं हो सका।
इस वर्ष बाढ़ से बचाव और जलनिकासी के लिए स्वीकृत 89.78 करोड़ की 24 परियोजनाओं के लिए अब तक कोई धनराशि अवमुक्त नहीं हुई है। इसके चलते इन परियोजनाओं पर कोई कार्य नहीं हो रहा है। केवल पिपराघाट गांव के सामने सड़क और बांध बनाने के लिए 42.53 करोड़ रुपये मिले हैं जिसमें से 21 करोड़ से बाढ़ खंड डिवीजन और शेष से पीडब्ल्यूडी कार्य करा रहा है। बंधों के संवेदनशील और अति संवेदनशील स्थानों पर नजर रखी जा रही है। आपात स्थिति आने पर वैकल्पिक उपाय किए जाएंगे।
- वीपी सिंह, अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड डिवीजन, कुशीनगर।
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हिमालय से निकली बड़ी गंडक (नारायणी) और छोटी गंडक नदियां कुशीनगर जिले में हर वर्ष बरसात के दिनों में तबाही मचाती हैं। खड्डा और तमकुहीराज तहसीलों का करीब आधा हिस्साहर साल बड़ी गंडक नदी की बाढ़ से प्रभावित होता है। बाढ़ रोकने के लिए इस नदी के किनारे करीब 100 किलोमीटर लंबा बांध बना है। सत्तर के दशक में बने ये सभी बांध जर्जर हो चले हैं। सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड डिवीजन ने इन बांधों की मरम्मत और अन्य सुरक्षात्मक उपाय के लिए इस वर्ष 85 करोड़ 23 लाख 92 हजार की लागत वाली 22 परियोजनाओं को प्रस्तावित किया था, जिसे हाई लेवल कमेटी की मंजूरी मिल चुकी है। इसमें से छितौनी बांध की 10 परियोजनाओं के लिए 45 करोड़ 97 लाख 68 हजार रुपये, नौतार बांध की एक परियोजना के लिए पांच करोड़ 11 लाख 99 हजार रुपये, अमवा खास तटबंध की पांच परियोजनाओं के लिए 10 करोड़ 22 लाख 68 हजार रुपये तथा अहिरौलीदान-पिपराघाट (एपी तटबंध) की छह परियोजनाओं के लिए 23 करोड़ 91 लाख 57 हजार रुपये के प्रस्ताव शामिल हैं। छितौनी बांध की 10 में से पांच परियोजनाएं तथा एपी तटबंध की छह में चार परियोजनाएं अति संवेदनशील स्थानों के लिए बनी थीं।
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इसी तरह छोटी गंडक नदी के किनारे स्थित दुबौली-सिकटिया बांध के किलोमीटर 1.500 से 1.700 के बीच अतिसंवेदनशील स्थल की सुरक्षा के लिए भी 86.25 लाख की एक परियोजना स्वीकृत है। परंतु 86.10 करोड़ की इन 23 में से एक भी परियोजना पर कार्य कराने के लिए बजट अवमुक्त नहीं हुआ। बड़ी गंडक नदी एपी तटबंध के चैनपट्टी और अहिरौलीदान गांव के सामने लगातार कटान कर रही है। अहिरौलीदान के कचहरी टोले पर तो आठ लोग अब तक अपना पक्का मकान तोड़कर बंधे पर शरण ले चुके हैं। चैनपट्टी के सामने भी बंधे और नदी के बीच कम ही फासला बचा है। बाढ़ खंड डिवीजन ने बीते मई महीने में अहिरौलीदान गांव के पास हो रहे कटान को रोकने के लिए धन मिलने की प्रत्याशा में काम भी शुरू कराया था, लेकिन बाद में उसे रोकना पड़ा। जुलाई महीने की शुरुआत में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ते ही एपी तटबंध पर खतरा मंडराने लगा तो सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता से लगायत जिला प्रशासन तक ने मौका मुआयना कर बचाव कार्य कराने का निर्देश बाढ़ खंड को दिया लेकिन धनाभाव के चलते कहीं कोई बचाव कार्य शुरू नहीं हो पाया।
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सिधरिया ताल डे्रन के लिए भी नहीं मिला पैसा
पडरौना। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र में स्थित सिधरिया ताल बरसात के पानी से नदी जैसा हो जाता है। इस ताल से जलनिकासी के लिए ड्रेन बना है, जिसकी पुनर्स्थापना के लिए इस वर्ष तीन करोड़ 68 लाख 14 हजार के प्रस्ताव को मंजूरी मिली थी। बाढ़ खंड डिवीजन के अनुसार ड्रेन की चौड़ाई और गहराई कम हो जाने के चलते बरसात में पानी ओवरफ्लो होकर अगल-बगल के खेतों में भर जाता है। इससे हर साल सैकड़ों एकड़ फसलें जलमग्न होकर बर्बाद हो जाती हैं। परंतु यह महत्वपूर्ण कार्य भी बजट के अभाव में शुरू नहीं हो सका।
इस वर्ष बाढ़ से बचाव और जलनिकासी के लिए स्वीकृत 89.78 करोड़ की 24 परियोजनाओं के लिए अब तक कोई धनराशि अवमुक्त नहीं हुई है। इसके चलते इन परियोजनाओं पर कोई कार्य नहीं हो रहा है। केवल पिपराघाट गांव के सामने सड़क और बांध बनाने के लिए 42.53 करोड़ रुपये मिले हैं जिसमें से 21 करोड़ से बाढ़ खंड डिवीजन और शेष से पीडब्ल्यूडी कार्य करा रहा है। बंधों के संवेदनशील और अति संवेदनशील स्थानों पर नजर रखी जा रही है। आपात स्थिति आने पर वैकल्पिक उपाय किए जाएंगे।
- वीपी सिंह, अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड डिवीजन, कुशीनगर।