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Kushinagar: गुस्सैल हाथी नेपाल गए तो सड़क पर दिखे बाघ ने बढ़ाईं धड़कन, सड़क पर दिखते ही बंद हो गया था आवागमन

Fri, 13 Oct 2023 05:03 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 13 Oct 2023 05:03 PM IST
सार

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बिहार को जोड़ने वाले बगहां-वाल्मीकि नगर मुख्य पथ पर मदनपुर रेंज के अंतर्गत बुधवार की रात में एक बाघ सड़क पर दिखा। सड़क पर बाघ को देखकर आवागमन बाधित हो गया। जो जहां था अपनी गाड़ी से वहीं ठहर गया। करीब दस मिनट तक बाघ सड़क पर रहा।

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When angry elephants went to Nepal tiger seen on road increased the heartbeat,
कुशीनगर समाचार - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

वीटीआर के जंगल से गुस्सैल हाथी आज नेपाल चले गए। पर, जंगल से निकला एक बाघर बुधवार रात को कुशीनगर को बिहार व नेपाल से जोड़ने वाली सड़क पर दिखा। जिससे इलाकाई लोगों की धड़कनें बढ़ गई है।

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बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में कुशीनगर से बिहार को जोड़ने वाले बगहां वाल्मीकि नगर मुख्य पथ पर मदनपुर रेंज में एक बाघ दिखने के बाद लोगों ने इस तरफ आना-जाना कम कर दिया है। इस जंगल में बाघ बहुतायत में पाए जाते हैं, जो अक्सर जंगल से निकलकर आबादी में आ जाते हैं।
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कुशीनगर को बिहार व नेपाल से जोड़ने वाली सड़क पर रात में बाघ की चहलकदमी दिखी। इससे लोगों में दहशत फैल गई है। यह डर पहले जंगल से निकलकर आबादी में घुसे बाघ द्वारा किए गए हमले का है।
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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बिहार को जोड़ने वाले बगहां-वाल्मीकि नगर मुख्य पथ पर मदनपुर रेंज के अंतर्गत बुधवार की रात में एक बाघ सड़क पर दिखा। सड़क पर बाघ को देखकर आवागमन बाधित हो गया। जो जहां था अपनी गाड़ी से वहीं ठहर गया। करीब दस मिनट तक बाघ सड़क पर रहा। इस बीच कुछ यात्रियों ने कार व बाइक की रोशनी में मोबाइल से वीडियो भी बना लिया।

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बाघ संरक्षण के लिए बने वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बढ़ी संख्या

बिहार का वाल्मीकि टाइगर रिजर्व दो प्रमंडलों में बंटा है। नेपाल व कुशीनगर के खड्डा क्षेत्र से सटा यह जंगल लगभग 910 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहां पर बाघों के संरक्षण के प्रयास के कारण संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2010 में मात्र 8 बाघ थे, जो 2014 मे बढ़कर 23 हुए। वर्ष 2018 में इनकी संख्या 31 हो गई और वर्ष 2022 में 52 तक हो गई है। बाघों की बढ़ती संख्या जहां इको सिस्टम के लिए जरूरी है, वहीं इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक इस क्षेत्र में पहुंचते है।

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नौ लोगों के हत्यारे बाघ को मार दी गई थी गोली

बिहार सीमा में पिछले साल अक्तूबर महीने में तीन दिन के अंदर चार लोगों सहित छह माह में नौ लोगों की जाना लेने वाले आदमखोर बाघ को गोली मार दी गई थी। यूपी-बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंक का प्रयास बने इस बाघ को जान से मारने के लिए बाकायदा आदेश जारी किया गया था।

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल से निकलकर रिहायशी इलाके में घुसे बाघ ने बलुआ गांव निवासी बविता देवी व उनके बेटे शिवम पर हमला कर दिया था। मां-बेटा सरेह में चारा लाने गए थे। काफी मशक्कत के बाद दोनों का शव बरामद किया जा सका। घटना से एक दिन पहले 7 अक्तूबर को संजय महतो, 5 अक्तूबर को बगड़ी कुमारी, 21 सितंबर को रामप्रसाद उरांव, 12 सितंबर को प्रेमकुमारी देवी, 15 जुलाई को धर्मराज काजी, 20 मई को पार्वती देवी और 14 मई को राजकुमार बैठा की बाघ के हमले में मौत हो गई थी।

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लगातार हो रही मौत से आक्रोशित ग्रामीण बाघ को मारने की मांग कर रहे थे। इस वजह से वीटीआर के सीएफ नेसामनी ने सीएनटीसीए (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरटी) से अनुमति मांगी थी। अनुमति मिलने पर लगभग सात शूटरों ने अत्याधुनिक असलहे के साथ पहुंचकर बाघा का शिकार किया था। उसका शव भी बरामद कर लिया गया था।

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दो साल पहले बाघ ने लिया था महिला की जान
खड्डा थाना क्षेत्र के ग्राम सभा मदनपुर सुकरौली निवासी कोइली देवी को शाम पशुओं के लिए चारा काटने सरेह में गई थींं। देर रात तक घर नहीं लौटी तो परिजनों ने खोजबीन की। रात के लगभग आठ बजे कोईली देवी का शव गन्ने के खेत में क्षत विक्षत पड़ा मिला था। शव के पास बाघ के पदचिह्न थे। बाघ ने कोइली को मार डाला था। उस समय भी आदमखोर बाघ से लोग भयभीत हुए थे।

 

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