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Kushinagar News: वाल्मीकिनगर बैराज से पानी का डिस्चार्ज घटा, दहशत बरकरार
Fri, 08 Aug 2025 01:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 08 Aug 2025 01:14 AM IST
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पिपराघाट में बांध के किनारे कटान करती नदी। संवाद
तमकुहीरोड। वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में पानी का डिस्चार्ज बृहस्पतिवार को एक लाख क्यूसेक से कम हो गया। इसके बाद तटबंधों से अब पानी का दबाव भी धीरे-धीरे कम होना शुरू हो गया है। हालाकि गांवों में दहशत अब भी बरकरार है, क्योंकि पिछले तीन चार दिन से यह डिस्चार्ज डेढ़ लाख क्यूसेक के आसपास था। ग्रामीणों ने कहा कि अभी यह पानी डिस्चार्ज का क्रम सितंबर तक जारी रहेगा। ऐसे में सावधानी नहीं बरती गई तो डिस्चार्ज बढ़ने से परेशानी हो सकती है।
वाल्मीकिनगर बैराज से पिछले तीन चार दिनों से गंडक नदी में छोड़ा जाने वाला पानी का डिस्चार्ज डेढ़ लाख क्यूसेक के आसपास स्थिर था। जिससे कई स्थानों पर पानी का दबाव बनना शुरू हो गया था, लेकिन अब बृहस्पतिवार से पानी का डिस्चार्ज घटने लगा है। यह एक लाख क्यूसेक से नीचे आ गया है तो नरवाजोत, पिपराघाट, जवही दयाल, चैनपट्टी, मुसहर बस्ती, विरवट कोन्हवलिया, नोनियापट्टी, खैरखुटा और कचहरी टोला सहित अन्य संवेदनशील जगहों से नदी का पानी भी अब धीरे धीरे उतरने लगा है।
जिससे बाढ़ खंड के अभियंताओं के साथ तटबंधों के किनारे बसे गांवों के ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली है। वहीं नदी के रुख को भांपने वाले क्षेत्र कैलाश सिंह, मनोज गुप्ता, गौतम सिंह, ओमप्रकाश निषाद, प्रदीप सिंह आदि का कहना है कि फिलहाल खतरा टल गया है, लेकिन डिस्चार्ज का क्रम कभी कभी सितंबर माह तक जारी रहता है। ऐसे में सावधानी बरतने के साथ किसी संभावित खतरे से निपटने की तैयारी मुक्कमल नहीं रखी गई तो कभी भी डिस्चार्ज बढ़ने पर तटबंधों पर पानी दबाव बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसे लेकर लोगों ने नरवाजोत के साथ परियोजना के अवशेष कार्यों को भी शीघ्र पूरा कराये जाने की मांग की है। हालाकि बांध पर किसी प्रकार के संभावित खतरे को लेकर विभाग के अभियंता सतर्क है और लगातार सभी संवेदनशील जगहों की निगरानी में लगे हुए हैं।
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वाल्मीकिनगर बैराज से पिछले तीन चार दिनों से गंडक नदी में छोड़ा जाने वाला पानी का डिस्चार्ज डेढ़ लाख क्यूसेक के आसपास स्थिर था। जिससे कई स्थानों पर पानी का दबाव बनना शुरू हो गया था, लेकिन अब बृहस्पतिवार से पानी का डिस्चार्ज घटने लगा है। यह एक लाख क्यूसेक से नीचे आ गया है तो नरवाजोत, पिपराघाट, जवही दयाल, चैनपट्टी, मुसहर बस्ती, विरवट कोन्हवलिया, नोनियापट्टी, खैरखुटा और कचहरी टोला सहित अन्य संवेदनशील जगहों से नदी का पानी भी अब धीरे धीरे उतरने लगा है।
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जिससे बाढ़ खंड के अभियंताओं के साथ तटबंधों के किनारे बसे गांवों के ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली है। वहीं नदी के रुख को भांपने वाले क्षेत्र कैलाश सिंह, मनोज गुप्ता, गौतम सिंह, ओमप्रकाश निषाद, प्रदीप सिंह आदि का कहना है कि फिलहाल खतरा टल गया है, लेकिन डिस्चार्ज का क्रम कभी कभी सितंबर माह तक जारी रहता है। ऐसे में सावधानी बरतने के साथ किसी संभावित खतरे से निपटने की तैयारी मुक्कमल नहीं रखी गई तो कभी भी डिस्चार्ज बढ़ने पर तटबंधों पर पानी दबाव बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसे लेकर लोगों ने नरवाजोत के साथ परियोजना के अवशेष कार्यों को भी शीघ्र पूरा कराये जाने की मांग की है। हालाकि बांध पर किसी प्रकार के संभावित खतरे को लेकर विभाग के अभियंता सतर्क है और लगातार सभी संवेदनशील जगहों की निगरानी में लगे हुए हैं।
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