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वाल्मीकि आश्रम: दुर्गम पहाड़ियों और सोनहा नदी के पार बसा है माता सीता से जुड़ी मान्यताओं का केंद्र

Mon, 26 Oct 2026 02:56 PM IST
अनुराग रंजन संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Published by: अनुराग रंजन Updated Mon, 26 Oct 2026 02:56 PM IST
सार

आश्रम जाने के लिए लोग वाल्मीकिनगर पहुंचते हैं। वहां से जंगल के बीच बने कच्चे रास्ते से होकर नदी तक पहुंचना पड़ता है। रास्ते में एसएसबी का शिविर है, जहां सुरक्षा जांच के बाद आगे जाने की अनुमति मिलती है। इसके बाद सोनहा नदी पार कर पहाड़ी रास्ते से आश्रम तक पहुंचा जाता है।

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Valmiki Ashram A Sacred Site Linked to Mata Sita Beyond RuValmiki Ashram, Mata Sita, Sonha River, Valmikinagar
वाल्मीकि आश्रम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल के त्रिवेणी संगम के निकट स्थित वाल्मीकि आश्रम प्राकृतिक सुंदरता, दुर्गम रास्तों और धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व और नेपाल के चितवन क्षेत्र के बीच स्थित इस आश्रम तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को जंगल के कच्चे रास्तों से गुजरने के बाद पहाड़ी सोनहा नदी पैदल पार करनी पड़ती है। इसके बाद ऊंची पहाड़ियों पर चढ़कर आश्रम पहुंचा जा सकता है।

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दुर्गम रास्तों के बावजूद रामायण से जुड़ी मान्यताओं के कारण यहां श्रद्धालु पहुंचते हैं। नेपाल की सीमा में स्थित यह क्षेत्र घने जंगलों, पहाड़ियों और प्राकृतिक संपदा से घिरा है।

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वाल्मीकि आश्रम जाने का रास्ता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

आश्रम जाने के लिए लोग वाल्मीकिनगर पहुंचते हैं। वहां से जंगल के बीच बने कच्चे रास्ते से होकर नदी तक पहुंचना पड़ता है। रास्ते में एसएसबी का शिविर है, जहां सुरक्षा जांच के बाद आगे जाने की अनुमति मिलती है। इसके बाद सोनहा नदी पार कर पहाड़ी रास्ते से आश्रम तक पहुंचा जाता है।

 

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Valmiki Ashram A Sacred Site Linked to Mata Sita Beyond RuValmiki Ashram, Mata Sita, Sonha River, Valmikinagar
वाल्मीकि आश्रम में स्थित विष्णु चक्र - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सीता ने अपने जीवन के अंतिम समय में इसी आश्रम में आश्रय लिया था। लोककथाओं में इसी स्थान पर उनके धरती में समा जाने का प्रसंग भी जुड़ा है। आश्रम परिसर में माता सीता की प्रतिमा स्थापित है। यहां एक सिलबट्टा भी है, जिसके बारे में मान्यता है कि माता सीता इसका इस्तेमाल करती थीं। महर्षि वाल्मीकि की तपस्या और लव-कुश के बचपन से जुड़े स्थल भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं।

 
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रामायण के उत्तरकांड में मिलता है आश्रम का वर्णन
वाल्मीकि रामायण के उत्तरकांड में माता सीता के महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रहने तथा लव-कुश के जन्म और शिक्षा का वर्णन मिलता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, लव-कुश ने इसी आश्रम में महर्षि वाल्मीकि से शिक्षा प्राप्त की थी। इन प्रसंगों से जुड़ी मान्यताएं आज भी आश्रम की पहचान बनी हुई हैं।

 

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लव-कुश जन्मस्थल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जंगलों, पहाड़ियों और नदियों के बीच स्थित यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ अपनी प्राकृतिक छटा के लिए भी जाना जाता है। हालांकि, आश्रम के मौजूदा स्थलों को रामायणकालीन घटनाओं से जोड़ने की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। वाल्मीकि जयंती के अवसर पर यह स्थल महर्षि वाल्मीकि की साहित्यिक विरासत और रामायण से जुड़ी स्मृतियों को याद करने का महत्वपूर्ण केंद्र है।
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