{"_id":"6a763e7faab1930f3e08920f","slug":"tourists-face-difficulties-in-reaching-buddhist-sites-kushinagar-news-c-205-1-ksh1006-165305-2026-08-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: बौद्ध स्थलों तक पहुंचने में पर्यटकों को होती है दिक्कत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: बौद्ध स्थलों तक पहुंचने में पर्यटकों को होती है दिक्कत
विज्ञापन
कसया। विश्व प्रसिद्ध बौद्ध पर्यटक स्थली कुशीनगर में प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों पर्यटक और बौद्ध श्रद्धालु पहुंचते हैं। महापरिनिर्वाण मंदिर, रामाभार स्तूप और माथाकुंवर मंदिर के दर्शन के बाद अधिकांश पर्यटक तथागत बुद्ध के जीवन और महापरिनिर्वाण से जुड़े जिले के अन्य ऐतिहासिक स्थलों को भी देखना चाहते हैं लेकिन सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था नहीं होने से पर्यटकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कुशीनगर से फाजिलनगर (प्राचीन पावा), पावानगर स्तूप, कुकुक्तथा, मधुरिया समेत तथागत बुद्ध से जुड़े अन्य ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थलों तक जाने के लिए परिवहन की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में पर्यटकों को निजी टैक्सी या अन्य वाहन किराये पर लेने पड़ते हैं। अधिक किराया होने के कारण कई पर्यटक इन स्थलों तक जाने का कार्यक्रम रद्द कर देते हैं और सिर्फ कुशीनगर का भ्रमण कर वापस लौट जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार बौद्ध पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन बौद्ध सर्किट के महत्वपूर्ण स्थलों को आपस में जोड़ने वाली परिवहन व्यवस्था अब भी विकसित नहीं हो सकी है। यदि कुशीनगर से इन स्थलों तक नियमित बस या शटल सेवा शुरू हो जाए तो पर्यटकों का ठहराव बढ़ेगा और जिले के पर्यटन को नई पहचान मिलेगी।
पर्यटन से जुड़े लोगों का कहना है कि कुशीनगर को केवल महापरिनिर्वाण मंदिर तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। जिले में तथागत बुद्ध के जीवन और अंतिम दिनों से जुड़े अनेक ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं, जिन्हें एक सशक्त बौद्ध पर्यटन सर्किट के रूप में
विज्ञापन
विज्ञापन
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार बौद्ध पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन बौद्ध सर्किट के महत्वपूर्ण स्थलों को आपस में जोड़ने वाली परिवहन व्यवस्था अब भी विकसित नहीं हो सकी है। यदि कुशीनगर से इन स्थलों तक नियमित बस या शटल सेवा शुरू हो जाए तो पर्यटकों का ठहराव बढ़ेगा और जिले के पर्यटन को नई पहचान मिलेगी।
विज्ञापन
पर्यटन से जुड़े लोगों का कहना है कि कुशीनगर को केवल महापरिनिर्वाण मंदिर तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। जिले में तथागत बुद्ध के जीवन और अंतिम दिनों से जुड़े अनेक ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं, जिन्हें एक सशक्त बौद्ध पर्यटन सर्किट के रूप में
विज्ञापन