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आईटीआई में उपकरण खरीद की जांच होगी
kushinagar
Updated Sun, 24 Jul 2016 10:29 PM IST
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हापुड़ में बनी विभाग की पहली लैब
- फोटो : अमर उजाला
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पडरौना। जिले के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के लिए हुई करोड़ों रुपये के उपकरणों की खरीद को लेकर अब शासन भी गंभीर है। उपकरण खरीद में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव ने व्यवसायिक शिक्षा उत्तर प्रदेश शासन के सचिव को इसकी जांच कराने का निर्देेश दिया है। जांच पूरा करने की अवधि 13 अगस्त निर्धारित की गई है।
दिसंबर 2015 से ही उपकरण खरीद को लेकर चर्चा में रहे नौरंगिया आईटीआई मार्च 2016 में तीन करोड़ रुपये के उपकरण की खरीदारी को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। बताया जा रहा था कि कसया और हाटा की आईटीआई में इस धनराशि से मशीनों व प्रयोगात्मक उपकरणों की खरीदारी की गई थी। तीन करोड़ रुपये की इस धनराशि में दो करोड़ रुपये सरकारी फंड और एक करोड़ रुपये पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत भुगतान किए गए थे।
इतनी बड़ी धनराशि के नाम पर खरीदी गईं मशीनें और उपकरण नौरंगिया आईटीआई के स्टोर में रखे गए। इन सामग्रियों की खरीदारी तत्कालीन प्राचार्य के कार्यकाल में हुई थी। प्राचार्य का कार्यकाल बदलते ही मशीनें, टूल्स और अन्य उपकरणों से भरे दो कमरों को सील कर दिया गया था। उन कमरों में सील किए गए तालों पर आईटीआई प्राचार्य और प्रभारी एनपी प्रजापति के हस्ताक्षर भी थे, जिसे आईटीआई प्रभारी ने खुद स्वीकार किया था। आनन-फानन की गई इस कार्रवाई के संबंध में उस समय आईटीआई प्रभारी ने यह बात भी स्वीकार की थी कि प्राचार्य का आदेश होने के कारण उन्होंने न तो उपकरणों की गुणवत्ता चेक की थी और न ही सामग्रियों की संख्या का मिलान किया था। मामला बढ़ने पर पीपीपी के अध्यक्ष जेपी जायसवाल भी आईटीआई में पहुंचे थे।
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‘अमर उजाला’ ने इस खबर को दो अप्रैल के अपने अंक में ‘तीन करोड़ के उपकरण खरीद में गोलमाल की आशंका’ शीर्षक से प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। बाद में आईटीआई के जिम्मेदारों ने ऐसी व्यवस्था बनाई, जिसके बाद न केवल उपकरणों के दोनों कमरों से सील किए गए ताले हट गए, बल्कि जिम्मेदारों के तेवर भी बदल गए।
बहरहाल, अब यह मामला शासन तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सचिव, व्यवसायिक शिक्षा उत्तर प्रदेश शासन को इस खबर का उल्लेख करते हुए प्रकरण की जांच कराने का निर्देश दिया है। जांच पूरा करने की अवधि 13 अगस्त निर्धारित की गई है।
इस संबंध में आईटीआई के प्राचार्य अमित मद्धेशिया का कहना है कि दोनों कमरों में केवल ताले बंद किए गए थे। उपकरण अब भी नौरंगिया आईटीआई में रखे हुए हैं। क्योंकि हाटा आईटीआई निर्माणाधीन है तथा कसया सहित सभी आईटीआई किराए के भवन में है।
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दिसंबर 2015 से ही उपकरण खरीद को लेकर चर्चा में रहे नौरंगिया आईटीआई मार्च 2016 में तीन करोड़ रुपये के उपकरण की खरीदारी को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। बताया जा रहा था कि कसया और हाटा की आईटीआई में इस धनराशि से मशीनों व प्रयोगात्मक उपकरणों की खरीदारी की गई थी। तीन करोड़ रुपये की इस धनराशि में दो करोड़ रुपये सरकारी फंड और एक करोड़ रुपये पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत भुगतान किए गए थे।
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इतनी बड़ी धनराशि के नाम पर खरीदी गईं मशीनें और उपकरण नौरंगिया आईटीआई के स्टोर में रखे गए। इन सामग्रियों की खरीदारी तत्कालीन प्राचार्य के कार्यकाल में हुई थी। प्राचार्य का कार्यकाल बदलते ही मशीनें, टूल्स और अन्य उपकरणों से भरे दो कमरों को सील कर दिया गया था। उन कमरों में सील किए गए तालों पर आईटीआई प्राचार्य और प्रभारी एनपी प्रजापति के हस्ताक्षर भी थे, जिसे आईटीआई प्रभारी ने खुद स्वीकार किया था। आनन-फानन की गई इस कार्रवाई के संबंध में उस समय आईटीआई प्रभारी ने यह बात भी स्वीकार की थी कि प्राचार्य का आदेश होने के कारण उन्होंने न तो उपकरणों की गुणवत्ता चेक की थी और न ही सामग्रियों की संख्या का मिलान किया था। मामला बढ़ने पर पीपीपी के अध्यक्ष जेपी जायसवाल भी आईटीआई में पहुंचे थे।
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‘अमर उजाला’ ने इस खबर को दो अप्रैल के अपने अंक में ‘तीन करोड़ के उपकरण खरीद में गोलमाल की आशंका’ शीर्षक से प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। बाद में आईटीआई के जिम्मेदारों ने ऐसी व्यवस्था बनाई, जिसके बाद न केवल उपकरणों के दोनों कमरों से सील किए गए ताले हट गए, बल्कि जिम्मेदारों के तेवर भी बदल गए।
बहरहाल, अब यह मामला शासन तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सचिव, व्यवसायिक शिक्षा उत्तर प्रदेश शासन को इस खबर का उल्लेख करते हुए प्रकरण की जांच कराने का निर्देश दिया है। जांच पूरा करने की अवधि 13 अगस्त निर्धारित की गई है।
इस संबंध में आईटीआई के प्राचार्य अमित मद्धेशिया का कहना है कि दोनों कमरों में केवल ताले बंद किए गए थे। उपकरण अब भी नौरंगिया आईटीआई में रखे हुए हैं। क्योंकि हाटा आईटीआई निर्माणाधीन है तथा कसया सहित सभी आईटीआई किराए के भवन में है।