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जिले में इंसेफेलाइटिस रोगियों की तादाद में नहीं आ रही कमी
kushinagar
Updated Wed, 24 May 2017 10:54 PM IST
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ज्यों-ज्यों दवा की, मर्ज बढ़ता गया...की तर्ज पर इंसेफेलाइटिस भी इस जिले में प्रभावी है। यह जानलेवा बीमारी हर साल सैकड़ों माताओं की गोद सूनी कर रहा है, फिर भी इस पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। इस बीमारी की चपेट में आ रहे मरीजों के सरकारी आंकड़े ही इसकी भयावहता को बयां करने के लिए काफी हैं। प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती होने और जान गंवाने वाले मरीजों का तो कोई लेखा-जोखा ही नहीं है। अब विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की मानीटरिंग करेगा।
कभी जलजनित बीमारी तो कभी वायरस जनित रोग के रूप में मासूमों से लेकर अब प्रौढ़ तक को अपना ग्रास बनाने वाली इंसेफेेलाइटिस की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि तमाम कोशिशों के बावजूद इस पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। हर साल सैकड़ों लोग इस जानलेवा बीमारी की गिरफ्त में आते हैं और अस्पतालों में तड़प-तड़प कर दम तोड़ देते हैैं।
इसे काबू में करने के लिए जनपद में सर्वप्रथम वर्ष 2006 में जेई टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था, जो बाद में चलकर नियमित टीकाकरण में तब्दील हो गया। कुछ वर्ष पूर्व जब इस बीमारी की चपेट में प्रौढ़ भी आने लगे तो वर्ष 2016 में 15 से 65 वर्ष की उम्र के लोगों के लिए टीकाकरण अभियान चलाया गया था। एक बार फिर एक वर्ष से 15 वर्ष तक की उम्र के बच्चों और किशोरों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू होने जा रहा है, जो 25 मई से प्रारंभ होकर 11 जून तक चलेगा।
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टीकाकरण अभियान के अलावा इस बीमारी पर नियंत्रण के लिए सभी सीएचसी-पीएचसी पर इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर और संयुक्त जिला चिकित्सालय में आईसीयू वार्ड बना है। इसके लिए अलग से एनएचएम के तहत डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, टेक्निशियन और ऑपरेटर नियुक्त किए गए हैं। इतना ही नहीं इस बीमारी के प्रति लोगों को सचेत करने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। यहां तक कि अमेरिका के विशेषज्ञों की टीम कई बार इस जिले में आकर इंसेफेलाइटिस पर शोध कर चुकी है और अब तो विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इंसेफेलाइटिस रोगियों के इलाज की मॉनिटरिंग करने जा रहा है। इन सबके बावजूद इस जानलेवा बीमारी के साल दर साल के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की मानीटरिंग अब विश्व स्वास्थ्य संगठन भी करेगा।
वर्ष एईएस के केस मृत्यु जेई के केस मृत्यु
2013 737 148 29 09
2014 799 144 19 05
2015 608 137 35 07
2016 1029 161 37 17
2017 (19 मई तक) 50 04
इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण के लिए सबसे पहले लोगों को जागरूक होना जरूरी है। उन्हें सफाई के साथ-साथ समय पर टीकाकरण जरूरी है। यदि किसी बच्चे में इस बीमारी के लक्षण दिखें तो झोलाछाप या अन्य के पास जाने की बजाय ईटीसी या जिला अस्पताल लेकर पहुंचें। ऐसे मरीजों के इलाज में कोई कमी नहीं होगी। अक्सर बीमारी ज्यादा बढ़ जाने पर ही लोग जिला अस्पताल के डॉक्टरों के पास पहुंचते हैं।
-एसएन पांडेय, जिला मलेरिया अधिकारी।
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ज्यों-ज्यों दवा की, मर्ज बढ़ता गया...की तर्ज पर इंसेफेलाइटिस भी इस जिले में प्रभावी है। यह जानलेवा बीमारी हर साल सैकड़ों माताओं की गोद सूनी कर रहा है, फिर भी इस पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। इस बीमारी की चपेट में आ रहे मरीजों के सरकारी आंकड़े ही इसकी भयावहता को बयां करने के लिए काफी हैं। प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती होने और जान गंवाने वाले मरीजों का तो कोई लेखा-जोखा ही नहीं है। अब विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की मानीटरिंग करेगा।
कभी जलजनित बीमारी तो कभी वायरस जनित रोग के रूप में मासूमों से लेकर अब प्रौढ़ तक को अपना ग्रास बनाने वाली इंसेफेेलाइटिस की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि तमाम कोशिशों के बावजूद इस पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। हर साल सैकड़ों लोग इस जानलेवा बीमारी की गिरफ्त में आते हैं और अस्पतालों में तड़प-तड़प कर दम तोड़ देते हैैं।
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इसे काबू में करने के लिए जनपद में सर्वप्रथम वर्ष 2006 में जेई टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था, जो बाद में चलकर नियमित टीकाकरण में तब्दील हो गया। कुछ वर्ष पूर्व जब इस बीमारी की चपेट में प्रौढ़ भी आने लगे तो वर्ष 2016 में 15 से 65 वर्ष की उम्र के लोगों के लिए टीकाकरण अभियान चलाया गया था। एक बार फिर एक वर्ष से 15 वर्ष तक की उम्र के बच्चों और किशोरों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू होने जा रहा है, जो 25 मई से प्रारंभ होकर 11 जून तक चलेगा।
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टीकाकरण अभियान के अलावा इस बीमारी पर नियंत्रण के लिए सभी सीएचसी-पीएचसी पर इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर और संयुक्त जिला चिकित्सालय में आईसीयू वार्ड बना है। इसके लिए अलग से एनएचएम के तहत डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, टेक्निशियन और ऑपरेटर नियुक्त किए गए हैं। इतना ही नहीं इस बीमारी के प्रति लोगों को सचेत करने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। यहां तक कि अमेरिका के विशेषज्ञों की टीम कई बार इस जिले में आकर इंसेफेलाइटिस पर शोध कर चुकी है और अब तो विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इंसेफेलाइटिस रोगियों के इलाज की मॉनिटरिंग करने जा रहा है। इन सबके बावजूद इस जानलेवा बीमारी के साल दर साल के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की मानीटरिंग अब विश्व स्वास्थ्य संगठन भी करेगा।
वर्ष एईएस के केस मृत्यु जेई के केस मृत्यु
2013 737 148 29 09
2014 799 144 19 05
2015 608 137 35 07
2016 1029 161 37 17
2017 (19 मई तक) 50 04
इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण के लिए सबसे पहले लोगों को जागरूक होना जरूरी है। उन्हें सफाई के साथ-साथ समय पर टीकाकरण जरूरी है। यदि किसी बच्चे में इस बीमारी के लक्षण दिखें तो झोलाछाप या अन्य के पास जाने की बजाय ईटीसी या जिला अस्पताल लेकर पहुंचें। ऐसे मरीजों के इलाज में कोई कमी नहीं होगी। अक्सर बीमारी ज्यादा बढ़ जाने पर ही लोग जिला अस्पताल के डॉक्टरों के पास पहुंचते हैं।
-एसएन पांडेय, जिला मलेरिया अधिकारी।