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कुशीनगर के कैदियों का 26 साल से ठिकाना बना देवरिया कारागार
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कुशीनगर के कैदियों का 26 साल से ठिकाना बना देवरिया कारागार
प्रस्तावित भूमि के बगल के कुछ अन्य किसानों ने भूमि बेचने पर जताई सहमति
स्वीकृति के लिए प्रशासन की तरफ से शासन को भेजा गया है प्रस्ताव
पडरौना। जिले के लगभग एक हजार कैदियों का ठिकाना देवरिया का जिला कारागार है। क्योंकि 26 वर्षों में यहां जिला कारागार का निर्माण तो दूर, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया ही पूर्ण नहीं हो सकी है। 327 किसानों से जिला कारागार के लिए भूमि खरीदी जानी है, लेकिन इनमें 310 किसानों की जमीन ही रजिस्ट्री हो सकी है। शेष 17 किसानों से भूमि की रजिस्ट्री और अधिग्रहण विभिन्न कारणों से बाकी है। 12 भूस्वामी विदेश में हैं तो पांच किसान जमीन देने को सहमत नहीं हैं, जिस वजह से उनकी जगह प्रस्तावित भूमि से सटे अन्य किसानों ने सहमति जताई है। उनके नाम का प्रस्ताव भूमि अधिग्रहण की स्वीकृति के लिए शासन को भेजा गया है। इस वजह से जेल के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है।
जिले के कैदियों से मिलने के लिए उनके परिवारीजनों और रिश्तेदारों को 55 किलोमीटर की दूरी तय करके जाना पड़ता है, जिसमें उनका वक्त और रुपये दोनों खर्च होते हैं। इतना ही नहीं पेशी के दौरान लाते समय कैदियों के भागने या उनके साथ अनहोनी की आशंका हमेशा भी रहती है। वैसे तो कैदियों और उनके परिजनों की सहूलियत के लिए कुशीनगर में जिला कारागार बनाने का प्रयास वर्ष 2010 से ही चल रहा है। इसके लिए पडरौना तहसील क्षेत्र के लमुहा में किसानों से 18.333 हेक्टेयर, भटवलिया के किसानों से 2.172 हेक्टेयर, मजरा केवल छपरा के किसानों से 3.762 हेक्टेयर और केवल छपरा के किसानों से 0.393 हेक्टेयर सहित कुल 327 किसानों से 24.660 हेक्टेयर जमीन सहमति के आधार पर ली जानी है। इनमें वर्तमान समय तक चारों गांवों के 310 किसानों से 24.105 हेक्टेयर भूमि की रजिस्ट्री हो चुकी है। इस मद में शासन की ओर से स्वीकृत कुल धनराशि 46,29,64,360 रुपये में से 45,31,63,440 रुपये का भुगतान उन किसानों को किया भी जा चुका है तथा 98,00,920 रुपये अवशेष बचे हैं। अब भी 17 किसानों की 0.554 हेक्टेयर भूमि की रजिस्ट्री होनी बाकी है। विभाग के मुताबिक 12 किसानों के विदेश में होने के कारण उनकी जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकी है, जबकि मजरा केवल छपरा एवं दांदोपुर के पांच किसान जमीन बेचने को तैयार नहीं हैं। यह भूखंड जिला कारागार के लिए ली गई जमीन की पश्चिम तरफ है। इनकी जगह इतनी जमीन लमुआ और सहुआडीह के किसानों ने बेचने पर सहमति जताई है। डीएम की तरफ से इस संबंध में प्रस्ताव प्रमुख सचिव, कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-4 को भेज दिया गया है।
कोट
जिला कारागार के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। 310 किसानों को मुआवजा दे दिया गया है, जबकि कुछ किसान ऐसे हैं, जो अपनी जमीन बेचना नहीं चाहते। प्रस्तावित भूमि से सटे ही कुछ अन्य किसानों ने उतनी जमीन बेचने पर सहमति जताई है, जिसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही उन किसानों को मुआवजा देकर जमीन की रजिस्ट्री करा दी जाएगी। उसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी।
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-भूपेंद्र एस चौधरी, जिलाधिकारी
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प्रस्तावित भूमि के बगल के कुछ अन्य किसानों ने भूमि बेचने पर जताई सहमति
स्वीकृति के लिए प्रशासन की तरफ से शासन को भेजा गया है प्रस्ताव
पडरौना। जिले के लगभग एक हजार कैदियों का ठिकाना देवरिया का जिला कारागार है। क्योंकि 26 वर्षों में यहां जिला कारागार का निर्माण तो दूर, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया ही पूर्ण नहीं हो सकी है। 327 किसानों से जिला कारागार के लिए भूमि खरीदी जानी है, लेकिन इनमें 310 किसानों की जमीन ही रजिस्ट्री हो सकी है। शेष 17 किसानों से भूमि की रजिस्ट्री और अधिग्रहण विभिन्न कारणों से बाकी है। 12 भूस्वामी विदेश में हैं तो पांच किसान जमीन देने को सहमत नहीं हैं, जिस वजह से उनकी जगह प्रस्तावित भूमि से सटे अन्य किसानों ने सहमति जताई है। उनके नाम का प्रस्ताव भूमि अधिग्रहण की स्वीकृति के लिए शासन को भेजा गया है। इस वजह से जेल के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है।
जिले के कैदियों से मिलने के लिए उनके परिवारीजनों और रिश्तेदारों को 55 किलोमीटर की दूरी तय करके जाना पड़ता है, जिसमें उनका वक्त और रुपये दोनों खर्च होते हैं। इतना ही नहीं पेशी के दौरान लाते समय कैदियों के भागने या उनके साथ अनहोनी की आशंका हमेशा भी रहती है। वैसे तो कैदियों और उनके परिजनों की सहूलियत के लिए कुशीनगर में जिला कारागार बनाने का प्रयास वर्ष 2010 से ही चल रहा है। इसके लिए पडरौना तहसील क्षेत्र के लमुहा में किसानों से 18.333 हेक्टेयर, भटवलिया के किसानों से 2.172 हेक्टेयर, मजरा केवल छपरा के किसानों से 3.762 हेक्टेयर और केवल छपरा के किसानों से 0.393 हेक्टेयर सहित कुल 327 किसानों से 24.660 हेक्टेयर जमीन सहमति के आधार पर ली जानी है। इनमें वर्तमान समय तक चारों गांवों के 310 किसानों से 24.105 हेक्टेयर भूमि की रजिस्ट्री हो चुकी है। इस मद में शासन की ओर से स्वीकृत कुल धनराशि 46,29,64,360 रुपये में से 45,31,63,440 रुपये का भुगतान उन किसानों को किया भी जा चुका है तथा 98,00,920 रुपये अवशेष बचे हैं। अब भी 17 किसानों की 0.554 हेक्टेयर भूमि की रजिस्ट्री होनी बाकी है। विभाग के मुताबिक 12 किसानों के विदेश में होने के कारण उनकी जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकी है, जबकि मजरा केवल छपरा एवं दांदोपुर के पांच किसान जमीन बेचने को तैयार नहीं हैं। यह भूखंड जिला कारागार के लिए ली गई जमीन की पश्चिम तरफ है। इनकी जगह इतनी जमीन लमुआ और सहुआडीह के किसानों ने बेचने पर सहमति जताई है। डीएम की तरफ से इस संबंध में प्रस्ताव प्रमुख सचिव, कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-4 को भेज दिया गया है।
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जिला कारागार के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। 310 किसानों को मुआवजा दे दिया गया है, जबकि कुछ किसान ऐसे हैं, जो अपनी जमीन बेचना नहीं चाहते। प्रस्तावित भूमि से सटे ही कुछ अन्य किसानों ने उतनी जमीन बेचने पर सहमति जताई है, जिसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही उन किसानों को मुआवजा देकर जमीन की रजिस्ट्री करा दी जाएगी। उसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी।
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-भूपेंद्र एस चौधरी, जिलाधिकारी