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स्थगन आदेश देख वापस लौटा तहसील प्रशासन
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Thu, 01 Feb 2018 11:58 PM IST
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वापस लौटती पुलिस।
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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तमकुहीरोड। हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बाद तहसील प्रशासन को तिवारीपट्टी गांव में सड़क पर अवैध निर्माण को हटाए जाने की कार्यवाही बृहस्पतिवार को स्थगित कर देनी पड़ी। हालांकि इसके लिए तहसील प्रशासन की ओर से सभी तैयारी पूरी कर ली गई थी। अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही स्थगित हो जाने पर पुलिस बल को गांव से वापस लौटना पड़ा।
सेवरही थाना क्षेत्र के तिवारीपट्टी गांव में सड़क पर अवैध निर्माण के मामले में हाईकोर्ट ने पहले तहसील प्रशासन को अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। इस पर 14 जनवरी को जब प्रशासन गांव में अतिक्रमण हटाने के लिए गया तो वहां उसे गांववालों के विरोध का सामना करना पड़ा था। बावजूद इसके प्रशासन ने 12 घरों को जेसीबी से ढहवा दिया था।
उसी अवैध निर्माण के मामले में हाईकोर्ट ने दूसरी बार याचिका में दाखिल सभी 36 लोगों का अवैध कब्जा हटाये जाने का निर्देश दिया। इसी आदेश के अनुपालन में बृहस्पतिवार को अतिक्रमण हटाया जाना था। इसके लिए तहसील प्रशासन ने पीएसी, पुलिस बल और महिला पुलिस पर्याप्त मात्रा में गांव में तैनात कर दिया था। सभी राजस्वकर्मियों को पत्थरबाजी से बचाव के लिए हेलमेट की व्यवस्था कराई गई थी, ताकि किसी प्रकार के विरोध की स्थिति से निपटा जा सके, लेकिन इस कार्यवाही के शुरू करने के पहले पीड़ित पक्ष की ओर से हाईकोर्ट का स्थगन आदेश उपलब्ध करा दिया गया। इसके बाद अतिक्रमण हटाए जाने की कार्यवाही स्थगित कर देनी पड़ी।
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सेवरही थाना क्षेत्र के तिवारीपट्टी गांव में सड़क पर अवैध निर्माण के मामले में हाईकोर्ट ने पहले तहसील प्रशासन को अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। इस पर 14 जनवरी को जब प्रशासन गांव में अतिक्रमण हटाने के लिए गया तो वहां उसे गांववालों के विरोध का सामना करना पड़ा था। बावजूद इसके प्रशासन ने 12 घरों को जेसीबी से ढहवा दिया था।
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उसी अवैध निर्माण के मामले में हाईकोर्ट ने दूसरी बार याचिका में दाखिल सभी 36 लोगों का अवैध कब्जा हटाये जाने का निर्देश दिया। इसी आदेश के अनुपालन में बृहस्पतिवार को अतिक्रमण हटाया जाना था। इसके लिए तहसील प्रशासन ने पीएसी, पुलिस बल और महिला पुलिस पर्याप्त मात्रा में गांव में तैनात कर दिया था। सभी राजस्वकर्मियों को पत्थरबाजी से बचाव के लिए हेलमेट की व्यवस्था कराई गई थी, ताकि किसी प्रकार के विरोध की स्थिति से निपटा जा सके, लेकिन इस कार्यवाही के शुरू करने के पहले पीड़ित पक्ष की ओर से हाईकोर्ट का स्थगन आदेश उपलब्ध करा दिया गया। इसके बाद अतिक्रमण हटाए जाने की कार्यवाही स्थगित कर देनी पड़ी।
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