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Kushinagar News: सिसकियों से टूटता रहा रात का सन्नाटा, गुजरी बातें याद कर छलकतीं रहीं आंखें

Wed, 23 Apr 2025 12:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Wed, 23 Apr 2025 12:48 AM IST
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The silence of the night kept breaking with sobs, eyes kept welling up remembering past events
नरायनपुर चरगहा ​में उदास बैठे परिजन। संवाद 
रामकोला। नरायनपुर चरगहा में हादसे के बाद परिजनों की सिसकियां थम नहीं रही हैं। गांव में दो दिन पूर्व खुशियों से पूरा माहौल भरा था। अब छह मौतों के बाद मातम पसरा है। मंगलवार को भी लोगों के चेहरे पर उदासी छाई थी। सिसकियों के बीच रात गुजारने के बाद कोई अपने जवान बेटे तो कोई पति तो कोई अपने पिता के हंसते-मुस्कुराते चेहरे और पुरानी बातों को याद कर आंसुओं से तरबतर हो रहा था। रामकोला थाना क्षेत्र के नरायनपुर चरगहा में काल के क्रूर मजाक के चलते एक साथ छह अर्थियां उठीं। मरने वाले चचेरे भाइयों के साथ-साथ आपस में दोस्त थे। हादसे में ओम प्रकाश मद्धेशिया (30), योगेंद्र मद्धेशिया (35), हरेंद्र मद्धेशिया (30), रंजीत मद्धेशिया (28), मुकेश मद्धेशिया (32), भीम यादव (27) की मौत हो गई।
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सभी शादीशुदा थे। इनके बच्चे भी हैं। यह सब दिल्ली, मुंबई और हरिद्वार में रहकर स्वरोजगार से भरण पोषण करते थे। इनकी मौत के बाद गांव में सन्नाटा है। मृतकों की पत्नियां, बच्चे और माता-पिता सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। मंगलवार को घटना के तीसरे दिन गांव के अधिकतर लोग घरों में कैद रहे। बीच-बीच में परिवारवालों की कभी सिसकियां तो कभी दहाड़ मारकर रोने की आवाजें आती रहीं।सांत्वना जताने के लिए दिन में कई बार रिश्तेदारों का आना-जाना होता रहा। उन्हें देखते ही घर के पुरुषों और महिलाओं की चीत्कार गूंज उठती। रिश्तेदार भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे। एक-दूसरे को संभालने का प्रयास होता रहा।
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परिजन भूल नहीं पा रहे खौफनाक मंजर
नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के भुजौली गांव के पास शादी में जा रही तेज रफ्तार ब्रेजा की पेड़ से हुई टक्कर में छह बरातियों की मौत का वह खौफनाक मंजर परिजन भूल नहीं पा रहे हैं। रोते-रोते उनकी आंखें पथरा गई हैं, लेकिन आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। घर के पुरुष, महिलाएं, बच्चे सभी बेसुध पड़े हैं। इस घटना ने मृतकों के परिजनों के साथ ही गांव के लोगों को भी झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार दोपहर दो बेटों को गंवाने वाले पिता शंकर मद्देशिया घर के सामने तख्त पर गुमसुम बैठे थे। इस हादसे ने उनका पूरा परिवार उजाड़कर रख दिया। दो नौजवान बेटों को खोने के बाद बुजुर्ग पिता ऐसा लग रहा जैसे अवसाद में हैं, न कुछ बोलते हैं और न उनकी पलकें गिरती हैं बस एक जगह टकटकी लगाएं बैठे हैं। एक बुजुर्ग पिता का नौजवान बेटों को खोने का दर्द समझा जा सकता है।
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