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Kushinagar News: छेड़खानी के आरोपी दरोगा का सरेंडर
Wed, 17 Dec 2025 12:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 17 Dec 2025 12:31 AM IST
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कुशीनगर। मासूम के साथ छेड़छाड़ के मामले में आरोपी उपनिरीक्षक तौफिक अहमद ने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायालय पाक्सो एक्ट, दिनेश कुमार की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। न्यायालय ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
दो अक्टूबर 2016 को थाना कसया में परिजनों ने तहरीर देकर प्राथमिकी दर्ज कराया गया था। तहरीर के अनुसार, आरोपी उपनिरीक्षक 2 अक्टूबर 2016 को शाम करीब 5 बजे पीड़िता के घर आया और ठंडा पानी मांगा। घर के एक कमरे में वादी की लगभग 8 वर्षीय नाबालिग बेटी पढ़ाई कर रही थी। वादी के पानी लाने जाने के दौरान आरोपी ने बच्ची को अकेला पाकर उसके साथ छेड़छाड़ की।
आरोप है कि पीड़िता के रोने की आवाज सुनकर पिता जब कमरे में पहुंचे तो आरोपी बच्ची को छोड़कर भागने लगा, लेकिन फिसलकर गिर गया, जिससे उसे भी मामूली चोटें आईं। विवेचना के बाद विवेचक ने आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जिस पर न्यायालय ने संज्ञान लिया। आरोपी ने 17 फरवरी 2017 को जमानत कराई, लेकिन इसके बाद लंबे समय तक न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ। दस वर्षों से उसकी अनुपस्थिति को लेकर न्यायालय ने गैर-जमानती वारंट जारी किया। तथा जमानतदारों को नोटिस भेजा। न्यायालय में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया गया था।
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दो अक्टूबर 2016 को थाना कसया में परिजनों ने तहरीर देकर प्राथमिकी दर्ज कराया गया था। तहरीर के अनुसार, आरोपी उपनिरीक्षक 2 अक्टूबर 2016 को शाम करीब 5 बजे पीड़िता के घर आया और ठंडा पानी मांगा। घर के एक कमरे में वादी की लगभग 8 वर्षीय नाबालिग बेटी पढ़ाई कर रही थी। वादी के पानी लाने जाने के दौरान आरोपी ने बच्ची को अकेला पाकर उसके साथ छेड़छाड़ की।
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आरोप है कि पीड़िता के रोने की आवाज सुनकर पिता जब कमरे में पहुंचे तो आरोपी बच्ची को छोड़कर भागने लगा, लेकिन फिसलकर गिर गया, जिससे उसे भी मामूली चोटें आईं। विवेचना के बाद विवेचक ने आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जिस पर न्यायालय ने संज्ञान लिया। आरोपी ने 17 फरवरी 2017 को जमानत कराई, लेकिन इसके बाद लंबे समय तक न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ। दस वर्षों से उसकी अनुपस्थिति को लेकर न्यायालय ने गैर-जमानती वारंट जारी किया। तथा जमानतदारों को नोटिस भेजा। न्यायालय में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया गया था।
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