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Kushinagar News: सिर्फ सैर तक सिमटा शैक्षिक भ्रमण, बुद्ध को नहीं जान पा रहे बच्चे
Tue, 16 Dec 2025 02:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 16 Dec 2025 02:00 AM IST
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कुशीनगर। कुशीनगर स्थित महात्मा बुद्ध की परिनिर्वाण स्थली पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं। साथ ही इन दिनों स्कूल बसों की आवाजाही बढ़ गई है। यूनिफॉर्म में सजे बच्चे महापरिनिर्वाण मंदिर और आसपास के स्थलों में घूम रहे हैं। हरियाली, खुले परिसर और ऐतिहासिक स्थल बच्चों को आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन एक सवाल अनछुआ भी रह जाता है। जानकार बताते हैं कि ये दौरे बच्चों को बुद्ध की भूमि से जोड़ तो रहे हैं लेकिन वे बुद्ध को कितना समझ पा रहे हैं, इसे लेकर संदेह है।
बौद्ध धर्म के लिए अत्यंत पवित्र होने के कारण यह स्थल अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों से लोग यहां आ रहे हैं। वहीं नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, भूटान, जापान, दक्षिण कोरिया, चीन, वियतनाम, कंबोडिया और लाओस सहित कई दक्षिण व दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बौद्ध अनुयायी और पर्यटक भी कुशीनगर पहुंच रहे हैं।
स्थानीय गाइड और मंदिर से जुड़े जानकार बताते हैं कि विदेश सैलानियों के पहुंचने और स्थल की अहमियत को देखते हुए स्कूल के बच्चों को भी टूर लाए जाने का चलन बढ़ा है। मगर अधिकतर स्कूल टूर समय की जल्दी में निपट जाते हैं। बच्चे जिज्ञासु हैं, सवाल पूछना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं बताया जाता कि इस स्थल का महत्व क्या है और किस तरह व्यवहार अपेक्षित है।
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बस्ती जिले से स्कूल टूर में आई कक्षा छह की छात्रा अंशिका कहती है, यह जगह बहुत सुंदर है। कक्षा आठ के रोहित कहते हैं, हमने सुना है कि भगवान बुद्ध यहां आए थे, लेकिन पूरी कहानी नहीं जानते। उन्हें साथ लेकर आए शिक्षक दिनेश यादव स्वीकारते हैं कि समय और पाठ्यक्रम की सीमा के कारण बच्चों को विस्तार से समझा पाना मुश्किल है।
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बच्चों को बताएं स्थल का महत्व : प्रो. वीरेंद्र
इतिहासकार प्रो. वीरेंद्र कुमार मानते हैं कि टूर से पहले बच्चों को स्थल का महत्व बताएं। बच्चों को समझाएं कि यहां क्या देखना है और क्या सीखना है। गाइड सरल भाषा में बुद्ध के जीवन, उनके संदेश और करुणा की व्याख्या करें। बच्चों के सवालों का जवाब दें, सिर्फ दिखाने तक सीमित न रहें। बिना तैयारी के दौरे अनुभव को औपचारिकता में बदल देते हैं। उनका मानना है कि छोटा ओरिएंटेशन और सही मार्गदर्शन बच्चों के लिए यह यात्रा यादगार और शिक्षाप्रद बना सकता है।
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स्कूल टूर से पहले क्या करें
स्कूल टूर से पहले बच्चों को स्थल और महत्व के बारे में संक्षिप्त जानकारी देनी चाहिए। बच्चों को कहानियों और सरल उदाहरणों के माध्यम से बुद्ध के जीवन और उनके संदेश से परिचित कराएं। गाइड से बच्चों के सवाल पूछने और जवाब पाने की व्यवस्था करनी चाहिए। फोटो और मस्ती के साथ सीखने पर भी जोर देना चाहिए।
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बौद्ध धर्म के लिए अत्यंत पवित्र होने के कारण यह स्थल अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों से लोग यहां आ रहे हैं। वहीं नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, भूटान, जापान, दक्षिण कोरिया, चीन, वियतनाम, कंबोडिया और लाओस सहित कई दक्षिण व दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बौद्ध अनुयायी और पर्यटक भी कुशीनगर पहुंच रहे हैं।
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स्थानीय गाइड और मंदिर से जुड़े जानकार बताते हैं कि विदेश सैलानियों के पहुंचने और स्थल की अहमियत को देखते हुए स्कूल के बच्चों को भी टूर लाए जाने का चलन बढ़ा है। मगर अधिकतर स्कूल टूर समय की जल्दी में निपट जाते हैं। बच्चे जिज्ञासु हैं, सवाल पूछना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं बताया जाता कि इस स्थल का महत्व क्या है और किस तरह व्यवहार अपेक्षित है।
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बस्ती जिले से स्कूल टूर में आई कक्षा छह की छात्रा अंशिका कहती है, यह जगह बहुत सुंदर है। कक्षा आठ के रोहित कहते हैं, हमने सुना है कि भगवान बुद्ध यहां आए थे, लेकिन पूरी कहानी नहीं जानते। उन्हें साथ लेकर आए शिक्षक दिनेश यादव स्वीकारते हैं कि समय और पाठ्यक्रम की सीमा के कारण बच्चों को विस्तार से समझा पाना मुश्किल है।
बच्चों को बताएं स्थल का महत्व : प्रो. वीरेंद्र
इतिहासकार प्रो. वीरेंद्र कुमार मानते हैं कि टूर से पहले बच्चों को स्थल का महत्व बताएं। बच्चों को समझाएं कि यहां क्या देखना है और क्या सीखना है। गाइड सरल भाषा में बुद्ध के जीवन, उनके संदेश और करुणा की व्याख्या करें। बच्चों के सवालों का जवाब दें, सिर्फ दिखाने तक सीमित न रहें। बिना तैयारी के दौरे अनुभव को औपचारिकता में बदल देते हैं। उनका मानना है कि छोटा ओरिएंटेशन और सही मार्गदर्शन बच्चों के लिए यह यात्रा यादगार और शिक्षाप्रद बना सकता है।
स्कूल टूर से पहले क्या करें
स्कूल टूर से पहले बच्चों को स्थल और महत्व के बारे में संक्षिप्त जानकारी देनी चाहिए। बच्चों को कहानियों और सरल उदाहरणों के माध्यम से बुद्ध के जीवन और उनके संदेश से परिचित कराएं। गाइड से बच्चों के सवाल पूछने और जवाब पाने की व्यवस्था करनी चाहिए। फोटो और मस्ती के साथ सीखने पर भी जोर देना चाहिए।