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Kushinagar News: ड्राॅप आउट बच्चों की निगरानी करेगा माध्यमिक शिक्षा विभाग
Sun, 22 Mar 2026 02:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 22 Mar 2026 02:32 AM IST
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पडरौना। परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में एक अप्रैल से नया सत्र शुरू हो रहा है। इसमें नामांकन के बाद बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉप आउट) पर ज्यादा नजर रहेगी। इसके लिए बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग प्रदेश में ट्रैकिंग व्यवस्था लागू करेगा। इसमें किसी भी छात्र के स्कूल से लगातार गायब रहने पर संबंधित अधिकारियों को तुरंत सूचना मिलेगी।
यदि कोई छात्र नामांकन के बाद विद्यालय आना बंद करता है या लंबे समय तक अनुपस्थित रहता है, तो इसकी जानकारी प्रधानाध्यापक, ग्राम प्रधान और बीएसए, डीआईओएस तक पहुंच जाएगी। इससे समय रहते छात्रों की पहचान कर उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। ट्रैकिंग सिस्टम से चिह्नित छात्रों के घर शिक्षकों की टीम जाएगी और अभिभावकों से संवाद कर स्कूल छोड़ने के कारणों की जांच करेगी। इसका कारण आर्थिक, सामाजिक या अन्य होगा तो शासन की योजनाओं से सहायता उपलब्ध कराई जाएगी ताकि छात्र फिर से पढ़ाई से जुड़ सके। डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्ता ने बताया कि ड्रॉप आउट बच्चों को चिन्हित करने के लिए ट्रैकिंग व्यवस्था लागू की होने वाली है। इसके लागू होने से नामांकन के बाद स्कूल नहीं जाने वाले छात्रों को चिह्नित करना सरल हो जाएगा। ऐसे बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें पुन: विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित किया जा सकेगा।
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यदि कोई छात्र नामांकन के बाद विद्यालय आना बंद करता है या लंबे समय तक अनुपस्थित रहता है, तो इसकी जानकारी प्रधानाध्यापक, ग्राम प्रधान और बीएसए, डीआईओएस तक पहुंच जाएगी। इससे समय रहते छात्रों की पहचान कर उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। ट्रैकिंग सिस्टम से चिह्नित छात्रों के घर शिक्षकों की टीम जाएगी और अभिभावकों से संवाद कर स्कूल छोड़ने के कारणों की जांच करेगी। इसका कारण आर्थिक, सामाजिक या अन्य होगा तो शासन की योजनाओं से सहायता उपलब्ध कराई जाएगी ताकि छात्र फिर से पढ़ाई से जुड़ सके। डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्ता ने बताया कि ड्रॉप आउट बच्चों को चिन्हित करने के लिए ट्रैकिंग व्यवस्था लागू की होने वाली है। इसके लागू होने से नामांकन के बाद स्कूल नहीं जाने वाले छात्रों को चिह्नित करना सरल हो जाएगा। ऐसे बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें पुन: विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित किया जा सकेगा।
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