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केंद्र को लेकर असमंजस में विद्यार्थी
kushinagar
Updated Wed, 31 Jan 2018 12:14 AM IST
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स्कूल
- फोटो : amarujala
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पडरौना। यूपी बोर्ड की तरह ही यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं में भी नकल रोकने के लिए इस बार केंद्र निर्धारण की व्यवस्था शुरू होनी थी। गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने संबद्ध कॉलेजों का केंद्र निर्धारण भी कर दिया है। परीक्षा नियंत्रक ने 14 जनवरी तक कॉलेजों से केंद्र निर्धारण को लेकर आपत्ति भी मांगी थी। कुछ कॉलेजों ने आपत्ति भी दाखिल की। लेकिन इसके बाद की तैयारियां ठप पड़ गई हैं। शासन स्तर से कोई निर्देश नहीं मिलने के कारण कॉलेज प्रशासन ऊहापोह की स्थिति में है। दूसरी ओर कुछ निजी कॉलेज संचालक इस बार स्वकेंद्रीय व्यवस्था से ही परीक्षा कराने का दावा करने लगे है। इससे विद्यार्थी सेंटर को लेकर असमंजस की स्थिति में है।
डिग्री कालेजों में भी नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए शासन की ओर से सीसीटीवी कैमरा लगवाने का निर्देश दिया गया था। आदेश के बाद अधिकांश कॉलेजों में कैमरा भी लग गया। इस कार्रवाई के साथ ही कॉलेजों में भी नकल रोकने के लिए केंद्र निर्धारण किए जाने की चर्चाएं शुरू हो गईं। गोरखपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध कुशीनगर जिले के करीब 50 कॉलेजों का केंद्र निर्धारण करते हुए 14 जनवरी तक आपत्ति मांगी गई थी। लेकिन आपत्ति का समय बीतने के बाद मामला ठंडा पड़ने लगा है।
निजी कॉलेज संचालक कर रहे विरोध
केंद्र निर्धारण होते ही कई निजी कॉलेज संचालक परेशान हो गए। दरअसल पढ़ाई की बजाय केवल नकल के चलते ही इन कॉलेजों में नामांकन ठीक-ठाक है। इसलिए इन कॉलेजों के संचालक सेंटर निर्धारण की व्यवस्था समाप्त कराने से लेकर मनमाफिक केंद्र निर्धारण के लिए यूनिवर्सिटी का चक्कर काटने लगे है। लेकिन अब तक यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं शुरू की गई है।
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क्या कहते हैं विद्यार्थी:
यूएनपीजी कॉलेज पडरौना में एमए प्रथम वर्ष के छात्र राजन सोनी का कहना हैं कि कुछ दिन पहले कॉलेज में चर्चा हुई थी कि इस बार बोर्ड परीक्षा की तरह ही परीक्षा होगी। हालांकि अभी तक कोई अधिकृत जानकारी नहीं मिली है।
एमए के छात्र रामलखन यादव का कहना हैं कि अगर सेंटर दूसरे कॉलेज में जाना है तो इसकी जानकारी पहले से मिलनी चाहिए है, जिससे की आने-जाने का साधन या रहने की व्यवस्था की जा सके।
बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा ज्योति सोनी का कहना हैं कि नकल विहीन परीक्षा कराने की दिशा में यह सही कदम हो सकता है। परंतु यूपी बोर्ड की तरह छात्राओं की परीक्षा अपने कॉलेज में ही होनी चाहिए।
बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा शिवांगी का कहना हैं कि परीक्षा की तैयारी चल रही है। सेंटर दूसरे कॉलेज में रहे या अपने कॉलेज में ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। परंतु इसकी सूचना पहले से मिल जानी चाहिए, जिससे की कोई तनाव न रहे।
नहीं मिला कोई निर्देश: प्राचार्य
फोटो है।
उदित नारायण पीजी कॉलेज के प्राचार्य कैप्टन डॉ. अयोध्या नाथ त्रिपाठी ने बताया कि केंद्र निर्धारण की सूची यूनिवर्सिटी की ओर से पीडीएफ फाइल में कॉलेज को एक माह पूर्व ही भेज दी गई थी। जिन कॉलेजों को आपत्ति थी, वह 14 जनवरी तक परीक्षा नियंत्रक तक अपनी आपत्ति भेज चुके हैं।
सरस्वती देवी महाविद्यालय नौरंगिया के प्राचार्य डॉ. सुनील पांडेय भी सेंटर निर्धारण के मामले में स्थिति स्पष्ट नहीं होने से परेशान हैं। बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन से कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है, जबकि छात्र प्रतिदिन सेंटर को लेकर सवाल कर रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन अगर इस मामले में निर्णय ले चुका है, तो इसे सार्वजनिक करना चाहिए।
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डिग्री कालेजों में भी नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए शासन की ओर से सीसीटीवी कैमरा लगवाने का निर्देश दिया गया था। आदेश के बाद अधिकांश कॉलेजों में कैमरा भी लग गया। इस कार्रवाई के साथ ही कॉलेजों में भी नकल रोकने के लिए केंद्र निर्धारण किए जाने की चर्चाएं शुरू हो गईं। गोरखपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध कुशीनगर जिले के करीब 50 कॉलेजों का केंद्र निर्धारण करते हुए 14 जनवरी तक आपत्ति मांगी गई थी। लेकिन आपत्ति का समय बीतने के बाद मामला ठंडा पड़ने लगा है।
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निजी कॉलेज संचालक कर रहे विरोध
केंद्र निर्धारण होते ही कई निजी कॉलेज संचालक परेशान हो गए। दरअसल पढ़ाई की बजाय केवल नकल के चलते ही इन कॉलेजों में नामांकन ठीक-ठाक है। इसलिए इन कॉलेजों के संचालक सेंटर निर्धारण की व्यवस्था समाप्त कराने से लेकर मनमाफिक केंद्र निर्धारण के लिए यूनिवर्सिटी का चक्कर काटने लगे है। लेकिन अब तक यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं शुरू की गई है।
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क्या कहते हैं विद्यार्थी:
यूएनपीजी कॉलेज पडरौना में एमए प्रथम वर्ष के छात्र राजन सोनी का कहना हैं कि कुछ दिन पहले कॉलेज में चर्चा हुई थी कि इस बार बोर्ड परीक्षा की तरह ही परीक्षा होगी। हालांकि अभी तक कोई अधिकृत जानकारी नहीं मिली है।
एमए के छात्र रामलखन यादव का कहना हैं कि अगर सेंटर दूसरे कॉलेज में जाना है तो इसकी जानकारी पहले से मिलनी चाहिए है, जिससे की आने-जाने का साधन या रहने की व्यवस्था की जा सके।
बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा ज्योति सोनी का कहना हैं कि नकल विहीन परीक्षा कराने की दिशा में यह सही कदम हो सकता है। परंतु यूपी बोर्ड की तरह छात्राओं की परीक्षा अपने कॉलेज में ही होनी चाहिए।
बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा शिवांगी का कहना हैं कि परीक्षा की तैयारी चल रही है। सेंटर दूसरे कॉलेज में रहे या अपने कॉलेज में ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। परंतु इसकी सूचना पहले से मिल जानी चाहिए, जिससे की कोई तनाव न रहे।
नहीं मिला कोई निर्देश: प्राचार्य
फोटो है।
उदित नारायण पीजी कॉलेज के प्राचार्य कैप्टन डॉ. अयोध्या नाथ त्रिपाठी ने बताया कि केंद्र निर्धारण की सूची यूनिवर्सिटी की ओर से पीडीएफ फाइल में कॉलेज को एक माह पूर्व ही भेज दी गई थी। जिन कॉलेजों को आपत्ति थी, वह 14 जनवरी तक परीक्षा नियंत्रक तक अपनी आपत्ति भेज चुके हैं।
सरस्वती देवी महाविद्यालय नौरंगिया के प्राचार्य डॉ. सुनील पांडेय भी सेंटर निर्धारण के मामले में स्थिति स्पष्ट नहीं होने से परेशान हैं। बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन से कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है, जबकि छात्र प्रतिदिन सेंटर को लेकर सवाल कर रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन अगर इस मामले में निर्णय ले चुका है, तो इसे सार्वजनिक करना चाहिए।