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Kushinagar News: जर्जर भवनों में संचालित हो रहे आठ राजकीय पशु चिकित्सालय, कायाकल्प के लिए भेजा प्रस्ताव
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जनपद में संचालित 24 में आठ पशु चिकित्सालयों के भवन जर्जर
पशु चिकित्सकों समेत तैनात कर्मियों को होती है दिक्कत
दवाओं के रखरखाव, उपकरणों व कागजातों को सुरक्षा में मिलेगी सहूलियत
पडरौना। जिले के बदहाल और जर्जर भवनों में संचालित राजकीय पशु चिकित्सालयों के दिन बहुरने वाले हैं। प्रशासन ने इन चिकित्सालयों की स्थिति सुधारने और उनके कायाकल्प की दिशा में ठोस कदम बढ़ाते हुए शासन को प्रस्ताव भेजा है। मंजूरी मिलते ही इन चिकित्सालयों के आवश्यक निर्माण कार्य की रूपरेखा तैयार की जाएगी और निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
जिले में वर्तमान में 24 राजकीय पशु चिकित्सालय संचालित हैं। उनमें से आठ राजकीय पशु चिकित्सालयों के भवन जर्जर हो चुके हैं। जहां जान जोखिम में डालकर पशु चिकित्सक व कर्मचारी काम करते हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए बीते दिनों मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की तरफ से जर्जर भवनों में चल रहे राजकीय पशु चिकित्सालयों के कायाकल्प के लिए प्रस्ताव तैयार कर निदेशक, प्रशासन एवं विकास पशुपालन विभाग को भेज दिया गया है।
जर्जर हो चुके भवन में चल रहे राजकीय पशु चिकित्सालयों में सुकरौली, फाजिलनगर, सेवरही, बोदरवार, पिपरा बाजार, कुबेरस्थान, सखवनिया, टेकुआटार शामिल हैं। निदेशालय को जर्जर राजकीय पशु चिकित्सालयों की भेजी गई रिपोर्ट में चौहद्दी व क्षेत्रफल वर्ग मीटर में दर्ज है। इन जर्जर चिकित्सालयों के जीर्णोद्धार व नवनिर्माण से पशु चिकित्सकों समेत तैनात कर्मियों को सहूलियत मिलेगी। अभी इन चिकित्सालयों में दवाओं व उपकरणों को सुरक्षित रख जाने को लेकर समस्या बरकरार है। बारिश होने पर छतों से पानी टपकता है तो वहीं छत से ईंट के साथ प्लास्टर गिरते रहते हैं। ऐसे में मौजूद कर्मचारी को चोटिल होने की आशंका बनी रहती है।
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ओपीडी में 3.75 लाख पशुओं का हुआ उपचार
जर्जर हो चुके इन आठ राजकीय पशु चिकित्सालयों में तीन वर्ष की ओपीडी में 3.75 लाखों पशुओं का उपचार किया जा चुका है। इसमें सुकरौली में 52,000, फाजिलनगर में 48,000, सेवरही में 50,000, बोदरवार में 47,000, पिपरा बाजार में 49,000, कुबेरस्थान में 48,000, सखवनिया में
39,000 व टेकुआटार में 42,000 पशुओं का उपचार किया जा चुका है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि यह अस्पताल स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
कोट
जिले में आठ राजकीय पशु चिकित्सालयों के भवन जर्जर हो चुके हैं। जर्जर भवनों के कायाकल्प और नवनिर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। बजट की स्वीकृति मिलते ही जीर्णोद्धार का कार्य आरंभ करा दिया जाएगा। नए भवन बनने से दवाओं और उपकरणों को सुरक्षित रखरखाव को सकेगा और चिकित्सकों व कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा।
- डॉ. शांति प्रकाश द्विवेदी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, कुशीनगर
नया भवन बनने के बाद दवाएं सुरक्षित रहेंगी। बारिश होने पर दवाइयां भीगकर खराब हो जाती हैं। ऐसे में नवनिर्माण से दवाइयां, उपकरण व अन्य सामान भी सुरक्षित रहेंगे और हादसे की आशंका भी नहीं है। पशुपालकों को बैठने के लिए जगह भी निश्चित हो जाएगी।
- डॉ. संतोष पासवान, पशु चिकित्साधिकारी, सुकरौली
बरसात में पानी टपकता है। खिड़कियां व छत जर्जर हो चुके हैं। दीवारों से प्लास्टर छूट चुके हैं। ऐसे में पशुओं के उपचार के दौरान परेशानी होती है। दवाएं व उपकरणों को सुरक्षित बचाए रखना भी मुश्किल होता है। प्रस्ताव भेज दिया गया है। मंजूरी मिलने के बाद आवश्यक निर्माण कार्य की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
- डॉ. जावेद अहमद, पशु चिकित्साधिकारी, कुबेरस्थान
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पशु चिकित्सकों समेत तैनात कर्मियों को होती है दिक्कत
दवाओं के रखरखाव, उपकरणों व कागजातों को सुरक्षा में मिलेगी सहूलियत
पडरौना। जिले के बदहाल और जर्जर भवनों में संचालित राजकीय पशु चिकित्सालयों के दिन बहुरने वाले हैं। प्रशासन ने इन चिकित्सालयों की स्थिति सुधारने और उनके कायाकल्प की दिशा में ठोस कदम बढ़ाते हुए शासन को प्रस्ताव भेजा है। मंजूरी मिलते ही इन चिकित्सालयों के आवश्यक निर्माण कार्य की रूपरेखा तैयार की जाएगी और निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
जिले में वर्तमान में 24 राजकीय पशु चिकित्सालय संचालित हैं। उनमें से आठ राजकीय पशु चिकित्सालयों के भवन जर्जर हो चुके हैं। जहां जान जोखिम में डालकर पशु चिकित्सक व कर्मचारी काम करते हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए बीते दिनों मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की तरफ से जर्जर भवनों में चल रहे राजकीय पशु चिकित्सालयों के कायाकल्प के लिए प्रस्ताव तैयार कर निदेशक, प्रशासन एवं विकास पशुपालन विभाग को भेज दिया गया है।
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जर्जर हो चुके भवन में चल रहे राजकीय पशु चिकित्सालयों में सुकरौली, फाजिलनगर, सेवरही, बोदरवार, पिपरा बाजार, कुबेरस्थान, सखवनिया, टेकुआटार शामिल हैं। निदेशालय को जर्जर राजकीय पशु चिकित्सालयों की भेजी गई रिपोर्ट में चौहद्दी व क्षेत्रफल वर्ग मीटर में दर्ज है। इन जर्जर चिकित्सालयों के जीर्णोद्धार व नवनिर्माण से पशु चिकित्सकों समेत तैनात कर्मियों को सहूलियत मिलेगी। अभी इन चिकित्सालयों में दवाओं व उपकरणों को सुरक्षित रख जाने को लेकर समस्या बरकरार है। बारिश होने पर छतों से पानी टपकता है तो वहीं छत से ईंट के साथ प्लास्टर गिरते रहते हैं। ऐसे में मौजूद कर्मचारी को चोटिल होने की आशंका बनी रहती है।
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ओपीडी में 3.75 लाख पशुओं का हुआ उपचार
जर्जर हो चुके इन आठ राजकीय पशु चिकित्सालयों में तीन वर्ष की ओपीडी में 3.75 लाखों पशुओं का उपचार किया जा चुका है। इसमें सुकरौली में 52,000, फाजिलनगर में 48,000, सेवरही में 50,000, बोदरवार में 47,000, पिपरा बाजार में 49,000, कुबेरस्थान में 48,000, सखवनिया में
39,000 व टेकुआटार में 42,000 पशुओं का उपचार किया जा चुका है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि यह अस्पताल स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
कोट
जिले में आठ राजकीय पशु चिकित्सालयों के भवन जर्जर हो चुके हैं। जर्जर भवनों के कायाकल्प और नवनिर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। बजट की स्वीकृति मिलते ही जीर्णोद्धार का कार्य आरंभ करा दिया जाएगा। नए भवन बनने से दवाओं और उपकरणों को सुरक्षित रखरखाव को सकेगा और चिकित्सकों व कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा।
- डॉ. शांति प्रकाश द्विवेदी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, कुशीनगर
नया भवन बनने के बाद दवाएं सुरक्षित रहेंगी। बारिश होने पर दवाइयां भीगकर खराब हो जाती हैं। ऐसे में नवनिर्माण से दवाइयां, उपकरण व अन्य सामान भी सुरक्षित रहेंगे और हादसे की आशंका भी नहीं है। पशुपालकों को बैठने के लिए जगह भी निश्चित हो जाएगी।
- डॉ. संतोष पासवान, पशु चिकित्साधिकारी, सुकरौली
बरसात में पानी टपकता है। खिड़कियां व छत जर्जर हो चुके हैं। दीवारों से प्लास्टर छूट चुके हैं। ऐसे में पशुओं के उपचार के दौरान परेशानी होती है। दवाएं व उपकरणों को सुरक्षित बचाए रखना भी मुश्किल होता है। प्रस्ताव भेज दिया गया है। मंजूरी मिलने के बाद आवश्यक निर्माण कार्य की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
- डॉ. जावेद अहमद, पशु चिकित्साधिकारी, कुबेरस्थान