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संस्कृत के सरल शब्द हमारे जीवन का हिस्सा : प्रो. श्रीप्रकाश
Mon, 25 Mar 2024 02:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 25 Mar 2024 02:00 AM IST
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हाटा। नगर के श्रीनाथ संस्कृत महाविद्यालय और भारतीय भाषा समिति नई दिल्ली की ओर से रविवार को महाविद्यालय के सभागार में सरल मानक संस्कृतम कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर बिहार के संस्कृत विभाग के आचार्य प्रो. श्रीप्रकाश पांडेय रहे। अध्यक्षता गोरखपुर विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की आचार्य डॉ. लक्ष्मी मिश्रा ने किया। संस्कृत भारती के प्रांत संगठन मंत्री श्रीप्रकाश झा ने संस्कृत के महत्व और उसके जीवन में उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
प्रो. श्रीप्रकाश पांडेय ने कहा कि हमें संस्कृत भाषा को जन-जन की भाषा बनाने पर जोर देना चाहिए, क्योंकि संस्कृत के सरल प्रयोग से इसे लोक की भाषा बनाया जा सकता है। भाषा यदि प्रयोग में होगी तो खुद मजबूत हो जाएगी। संस्कृत भारतीय संस्कृति की भाषा है। इससे हमारे संस्कृति की पहचान होती है। मुख्य वक्ता संस्कृत भारती के प्रांत संगठन मंत्री डॉ श्रीप्रकाश झा ने संस्कृत के स्वरूप, प्रयोजन तथा प्रयोग पर विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि हम सभी लोग अपने नियमित बोल चाल में संस्कृत के शब्दों का प्रयोग करते है, लेकिन हम कहते है कि हमे संस्कृत नहीं आती। अगर हम लोग नियमित रूप से संस्कृत को बोलने का प्रयोग करेंगे तो अच्छा परिणाम आएगा प्रोफेसर मार्कंडेय नाथ तिवारी ने कहा कि संस्कृत को सुन कर और सुना कर जन-जन तक पहुंचाया जा सकता है।
संस्कृत भारती के प्रांत मंत्री डाॅ. जोखन पांडेय ने संस्कृत को सरल तरीके से बोलने का प्रयोग बताया और कहा कि पूरे देश को एक सूत्र में बांधने का काम संस्कृत भाषा ही करती है। यह भाषा सुनने और बोलने से सरल हो जाती है। अध्यक्ष डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय की आचार्य डॉ. लक्ष्मी मिश्रा ने संस्कृत की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में आए अतिथियों का स्वागत डाॅ. राजेश चतुर्वेदी ने किया। वहीं, आभार व्यक्त करते हुए संस्था के मंत्री पं. गंगेश्वर पांडेय ने कहा कि यह व्याख्यानमाला और कार्यशाला महाविद्यालय के शताब्दी वर्ष में समारोह का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने संस्कृत भाषा को जनभाषा बनाने में आमजन की सहभागिता पर जोर दिया। इस दौरान प्रबंधक अग्निवेश मणि, अध्यक्ष जयप्रकाश नारायण पांडेय, डॉ. संजीव कुमार पांडेय, मोहन पांडेय, सतीश शुक्ला, रामऋषि द्विवेदी, वशिष्ठ द्विवेदी, संजय कुमार पांडेय, पूर्व प्रधानाचार्य शारदा प्रसाद सिंह, प्रधानाचार्य नागेश पति तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि ओमप्रकाश द्विवेदी ओम मौजूद रहे।
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प्रो. श्रीप्रकाश पांडेय ने कहा कि हमें संस्कृत भाषा को जन-जन की भाषा बनाने पर जोर देना चाहिए, क्योंकि संस्कृत के सरल प्रयोग से इसे लोक की भाषा बनाया जा सकता है। भाषा यदि प्रयोग में होगी तो खुद मजबूत हो जाएगी। संस्कृत भारतीय संस्कृति की भाषा है। इससे हमारे संस्कृति की पहचान होती है। मुख्य वक्ता संस्कृत भारती के प्रांत संगठन मंत्री डॉ श्रीप्रकाश झा ने संस्कृत के स्वरूप, प्रयोजन तथा प्रयोग पर विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि हम सभी लोग अपने नियमित बोल चाल में संस्कृत के शब्दों का प्रयोग करते है, लेकिन हम कहते है कि हमे संस्कृत नहीं आती। अगर हम लोग नियमित रूप से संस्कृत को बोलने का प्रयोग करेंगे तो अच्छा परिणाम आएगा प्रोफेसर मार्कंडेय नाथ तिवारी ने कहा कि संस्कृत को सुन कर और सुना कर जन-जन तक पहुंचाया जा सकता है।
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संस्कृत भारती के प्रांत मंत्री डाॅ. जोखन पांडेय ने संस्कृत को सरल तरीके से बोलने का प्रयोग बताया और कहा कि पूरे देश को एक सूत्र में बांधने का काम संस्कृत भाषा ही करती है। यह भाषा सुनने और बोलने से सरल हो जाती है। अध्यक्ष डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय की आचार्य डॉ. लक्ष्मी मिश्रा ने संस्कृत की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में आए अतिथियों का स्वागत डाॅ. राजेश चतुर्वेदी ने किया। वहीं, आभार व्यक्त करते हुए संस्था के मंत्री पं. गंगेश्वर पांडेय ने कहा कि यह व्याख्यानमाला और कार्यशाला महाविद्यालय के शताब्दी वर्ष में समारोह का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने संस्कृत भाषा को जनभाषा बनाने में आमजन की सहभागिता पर जोर दिया। इस दौरान प्रबंधक अग्निवेश मणि, अध्यक्ष जयप्रकाश नारायण पांडेय, डॉ. संजीव कुमार पांडेय, मोहन पांडेय, सतीश शुक्ला, रामऋषि द्विवेदी, वशिष्ठ द्विवेदी, संजय कुमार पांडेय, पूर्व प्रधानाचार्य शारदा प्रसाद सिंह, प्रधानाचार्य नागेश पति तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि ओमप्रकाश द्विवेदी ओम मौजूद रहे।
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