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सड़क पर ही लगती है मंडी, हर तरफ परेशानी
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Tue, 27 Feb 2018 12:26 AM IST
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जाम
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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पडरौना। कुशीनगर जनपद को वजूद में आए करीब 24 वर्ष का समय गुजर जाने के बाद भी पडरौना क्षेत्र के किसानों व व्यापारियों के लिए मंडी समिति नहीं बन पाई। करीब नौ वर्षों तक जनपद मुख्यालय के निकट सोहरौना गांव में इसके लिए जमीन अधिग्रहित करने का प्रयास चलता रहा। शहर के सड़क पर ही मंडी लगने के कारण लोगों को जाम की समस्या का सामना करना पड़ता है। बाजार को गति न मिलने के कारण किसानों की सब्जियां व अनाज के भी उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
इसे लेकर डीएम की मौजूदगी में कृषि उत्पादन समिति के अफसरों और किसानों से कई मर्तबा वार्ता हो चुकी है। प्रशासन सर्किल रेट के हिसाब से भुगतान करना चाहता है, जबकि किसान शासनादेश का हवाला देते हुए सर्किल रेट से चार गुना अधिक मुआवजा की मांग कर रहे हैं। ऐसी दशा में बात न बनते देख प्रशासन कहीं और भी जमीन की तलाश करने की तैयारी में है।
पडरौना नगर के बेलवा चुंगी पर कई वर्षों से सब्जियों की मंडी लगती है। सुबह से दोपहर तक लगने वाली इस मंडी में पडरौना शहर के अलावा आस-पास के जंगल बेलवा, जंगल अमवा, कुरमौल, खिरकिया, बकुलहां, गायघाट, नाहरछपरा, सिधुआं, भरवलिया, भटवलिया, सेवक छपरा, केवल छपरा सहित कई गांवों के किसान सुबह अपनी सब्जियां लेकर बेचने आते हैं। सड़क पर ही मंडी लगने से सुबह से दोपहर तक जाम लगा रहता है, जिससे यहां के बाईपास रोड, कॉलेज जाने वाला रोड और कसेरा टोली रोड से आना जाना मुश्किल रहता है। यहां के व्यापार को गति भी नहीं मिल पा रही।
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नियमत: मंडी समिति जनपद मुख्यालय अथवा शहर से आठ किलोमीटर की परिधि में बनाई जानी चाहिए। पडरौना की मंडी समिति की खातिर 20 एकड़ जमीन की आवश्यकता है। इसके लिए सोहरौना में छोटी नहर के निकट 7.884 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई थी, जिस पर करीब नौ वर्षों तक प्रशासन और किसानों के बीच वार्ता होने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल सका है। इस वजह से कृषि उत्पादन मंडी समिति का दफ्तर भी बेलवा चुंगी के निकट किराए के एक भवन में संचालित हो रहा है। अगर मंडी समिति बन जाती तो दुकानों के साथ-साथ विभागीय दफ्तर भी स्थापित हो सकता था।
कृषि उत्पादन मंडी समिति कुशीनगर के सचिव ओमप्रकाश कहते हैं कि वर्ष 2010 से ही पडरौना की मंडी समिति के लिए प्रयास चल रहा है। सोहरौना में जमीन चिह्नित की गई थी। किसानों को सर्किल रेट से भुगतान किया जाना है, लेकिन वे अपनी जमीन की कीमत उससे अधिक मांग रहे हैं। अभी तक कोई सहमति न बन पाने के कारण अब कहीं और जमीन तलाशी जाएगी। इस संबंध में डीएम से वार्ता की जाएगी।
-सोहरौना के ग्राम प्रधान रह चुके जयराम यादव कहते हैं कि मंडी समिति के लिए प्रशासन सर्किल रेट पर जमीन खरीदना चाहता है, जबकि शासनादेश के मुताबिक ग्राम सभा के अंतर्गत आने वाली किसानों की इस जमीन की कीमत सर्किल रेट से चारगुना अधिक मिलनी चाहिए। क्योंकि यह जनपद मुख्यालय के निकट और एनएच के किनारे है।
-सोहरौना गांव के किसान नौबत गुप्ता का कहना है कि सरकार उनकी जमीन की कीमत सर्किल रेट से चारगुना अधिक मुआवजा देगी, तभी जमीन दी जाएगी। क्योंकि उस जमीन की कीमत प्राइवेट स्तर पर बेचने पर उससे काफी अधिक कीमत मिलेगी।
-व्यापारी बद्री गुप्ता कहते हैं कि वर्षों से सब्जियां सड़क पर रखकर बेचनी पड़ती है। वाहनों के आने-जाने से जाम लग जाता है। मंडी समिति होती तो व्यापारियों का माल सुरक्षित रहता। स्थाई दुकानें होतीं। सामान खराब होने का अंदेशा नहीं रहता, जिसकी वजह से उन्हें अपनी सब्जियां औने-पौने दाम पर बेचकर घर नहीं जाना पड़ता।
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इसे लेकर डीएम की मौजूदगी में कृषि उत्पादन समिति के अफसरों और किसानों से कई मर्तबा वार्ता हो चुकी है। प्रशासन सर्किल रेट के हिसाब से भुगतान करना चाहता है, जबकि किसान शासनादेश का हवाला देते हुए सर्किल रेट से चार गुना अधिक मुआवजा की मांग कर रहे हैं। ऐसी दशा में बात न बनते देख प्रशासन कहीं और भी जमीन की तलाश करने की तैयारी में है।
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पडरौना नगर के बेलवा चुंगी पर कई वर्षों से सब्जियों की मंडी लगती है। सुबह से दोपहर तक लगने वाली इस मंडी में पडरौना शहर के अलावा आस-पास के जंगल बेलवा, जंगल अमवा, कुरमौल, खिरकिया, बकुलहां, गायघाट, नाहरछपरा, सिधुआं, भरवलिया, भटवलिया, सेवक छपरा, केवल छपरा सहित कई गांवों के किसान सुबह अपनी सब्जियां लेकर बेचने आते हैं। सड़क पर ही मंडी लगने से सुबह से दोपहर तक जाम लगा रहता है, जिससे यहां के बाईपास रोड, कॉलेज जाने वाला रोड और कसेरा टोली रोड से आना जाना मुश्किल रहता है। यहां के व्यापार को गति भी नहीं मिल पा रही।
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नियमत: मंडी समिति जनपद मुख्यालय अथवा शहर से आठ किलोमीटर की परिधि में बनाई जानी चाहिए। पडरौना की मंडी समिति की खातिर 20 एकड़ जमीन की आवश्यकता है। इसके लिए सोहरौना में छोटी नहर के निकट 7.884 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई थी, जिस पर करीब नौ वर्षों तक प्रशासन और किसानों के बीच वार्ता होने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल सका है। इस वजह से कृषि उत्पादन मंडी समिति का दफ्तर भी बेलवा चुंगी के निकट किराए के एक भवन में संचालित हो रहा है। अगर मंडी समिति बन जाती तो दुकानों के साथ-साथ विभागीय दफ्तर भी स्थापित हो सकता था।
कृषि उत्पादन मंडी समिति कुशीनगर के सचिव ओमप्रकाश कहते हैं कि वर्ष 2010 से ही पडरौना की मंडी समिति के लिए प्रयास चल रहा है। सोहरौना में जमीन चिह्नित की गई थी। किसानों को सर्किल रेट से भुगतान किया जाना है, लेकिन वे अपनी जमीन की कीमत उससे अधिक मांग रहे हैं। अभी तक कोई सहमति न बन पाने के कारण अब कहीं और जमीन तलाशी जाएगी। इस संबंध में डीएम से वार्ता की जाएगी।
-सोहरौना के ग्राम प्रधान रह चुके जयराम यादव कहते हैं कि मंडी समिति के लिए प्रशासन सर्किल रेट पर जमीन खरीदना चाहता है, जबकि शासनादेश के मुताबिक ग्राम सभा के अंतर्गत आने वाली किसानों की इस जमीन की कीमत सर्किल रेट से चारगुना अधिक मिलनी चाहिए। क्योंकि यह जनपद मुख्यालय के निकट और एनएच के किनारे है।
-सोहरौना गांव के किसान नौबत गुप्ता का कहना है कि सरकार उनकी जमीन की कीमत सर्किल रेट से चारगुना अधिक मुआवजा देगी, तभी जमीन दी जाएगी। क्योंकि उस जमीन की कीमत प्राइवेट स्तर पर बेचने पर उससे काफी अधिक कीमत मिलेगी।
-व्यापारी बद्री गुप्ता कहते हैं कि वर्षों से सब्जियां सड़क पर रखकर बेचनी पड़ती है। वाहनों के आने-जाने से जाम लग जाता है। मंडी समिति होती तो व्यापारियों का माल सुरक्षित रहता। स्थाई दुकानें होतीं। सामान खराब होने का अंदेशा नहीं रहता, जिसकी वजह से उन्हें अपनी सब्जियां औने-पौने दाम पर बेचकर घर नहीं जाना पड़ता।