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धांधली : धान खरीद के लिए बना दिए गांव जो देश के नक्शे में ही नहीं

Thu, 20 Mar 2025 11:48 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Thu, 20 Mar 2025 11:48 PM IST
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Rigging: Villages were created for buying paddy which are not even on the map of the country
हाटा। जिले में तमाम क्रय केंद्रों पर फर्जी तरीके से धान खरीद का मामला प्रकाश में आया है। किसानों के बजाए बिचौलियों से धान खरीदने के लिए संबंधित अधिकारियों ने ऐसे गांव बना दिए हैं जो जिले ही नहीं देश के नक्शे में कहीं मौजूद ही नहीं हैं।
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चौंकाने वाली बात यह है कि घपलेबाजों के गांवों के नाम शब्दों में ही नहीं अंकों में भी दर्ज कर दिए हैं। ऐसे गांवों के पते पर क्रय केंद्र के प्रभारियों ने कई हजार कुंतल धान की खरीद भी कर ली है। मामला सामने आने के बाद जनसुनवाई पोर्टल और डीएम से लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसके बाद संबंधित जिम्मेदारों में हड़कंप मच गया है।
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किसानों के धान खरीद के लिए जिला प्रशासन ने पूरे जिले में विभिन्न सरकारी एजेंसियों के माध्यम से क्रय केंद्र खोले थे। यहां किसानों से सरकारी दर पर उनकी फसल खरीदी जानी थी।
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मगर अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में बिचौलियों ने किसानों से औने-पौने दाम में फसल खरीद कर केंद्र प्रभारियों की मिलीभगत से फर्जी किसानों के नाम और पते से हजारों कुंतल धान बेच डाले। जिनके और पते से धान खरीदे गए हैं, वह गांव क्या, जिले में कहीं मौजूद नहीं हैं।
खाद्य विभाग के विपणन शाखा के एक क्रय केंद्र पर 25 फरवरी को व्यास सिंह नाम के एक किसान से करीब 64 कुंतल धान की खरीद की गई। खरीद के रिकाॅर्ड में उनके गांव का नाम एसिडिटी दर्ज किया गया है।
उसी दिन माधूरी सिंह नाम के किसान से 92 कुंतल धान की खरीद की गई और किसान के पते में स्कूल लिखकर छोड़ दिया गया है। इसी तरह विजय कुमार तिवारी नाम के किसान को एचएच नामक गांव का निवासी बताया गया है। वहीं धान खरीद रिकाॅर्ड में सुबेदार अंसारी नामक किसान को 56 गांव का निवासी बताया गया है।
साधन सहकारी समिति के क्रय केंद्रों के 19 फरवरी के क्रय रिकाॅर्ड के अनुसार धनंजय कुमार के गांव का पता 121 दर्ज किया गया है और उनसे 45 कुंतल धान की खरीद की गई है। वहीं अभिमन्यु कुमार तिवारी को एचआईयू गांव का किसान बताते हुए 130 कुंतल धान की खरीद क्रय केंद्र प्रभारी ने की है।

धान क्रय पोर्टल पर दर्ज रिकाॅर्ड में ऐसे हजारों सैकड़ों किसान के नाम मिल जाएंगे, जिनके पता के रूप में लिखे गए गांवों का नाम सरकारी रिकाॅर्ड में कहीं भी नहीं है। अब सवाल यह उठता है कि ऐसे गांवों के नाम किसानों से खरीद कैसे कर ली गई। इसकी शिकायत रधिया देवरिया निवासी किसान चंदन राव ने डीएम से की है। डीएम के निर्देश पर मामले की जांच कराई जा रही है।
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