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‘योग, तप, मंत्र और युक्ति को छिपाकर रखें’
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‘योग, तप, मंत्र और युक्ति को छिपाकर रखें’
संवाद न्यूज एजेंसी
कसया। रामकथा के पांचवें दिन मानस निर्वाण की चर्चा करते हुए कथा व्यास मोरारी बापू ने कहा कि योग, तप, मंत्र और युक्ति (उपाय) को छिपाकर रखना चाहिए।
युक्ति को मुक्ति और भक्ति का उपाय बताते हुए कथा वाचक ने कहा कि मुक्ति की जन्मभूमि भगवान विश्वनाथ की भूमि काशी है लेकिन, जननी नहीं है। मुक्ति के पिता राम और शिव हैं। यही निर्वाणदाता हैं। मुक्ति के लिए युक्ति चाहिए। इसे राम, विभीषण व हनुमान संवाद के जरिए सुनाकर श्रद्धालुओं को समझाया।
बापू ने कथा में कहा कि योग, तप, मंत्र और युक्ति को छिपाकर रखना चाहिए। बापू ने कहा कि योग का मतलब जुड़ना होता है जबकि वियोग का मतलब बिछुड़ना है। मित्रता भी योग है लेकिन वह तभी फलदायक है जब इसे छिपाकर रखा जाए। तप भी छिपाना चाहिए। इसका विज्ञापन नहीं होना चाहिए। इसके अलावा गुरु मंत्र भी छिपाकर रखना चाहिए। मंत्र सार्वजनिक होने पर प्रभाव खत्म हो जाता है। मंत्र का कीर्तन नहीं करना चाहिए। राम की शरण में आए विभीषण की कथा सुनाते हुए कहा कि राम ने जब विभीषण को अपने साथ रखने की वजह पूछी तो हनुमान जी ने कहा कि था कि आप तो टेढ़े (धनुष) को कंधे पर और सीधे (तीर) को हाथ में रखते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कसया। रामकथा के पांचवें दिन मानस निर्वाण की चर्चा करते हुए कथा व्यास मोरारी बापू ने कहा कि योग, तप, मंत्र और युक्ति (उपाय) को छिपाकर रखना चाहिए।
युक्ति को मुक्ति और भक्ति का उपाय बताते हुए कथा वाचक ने कहा कि मुक्ति की जन्मभूमि भगवान विश्वनाथ की भूमि काशी है लेकिन, जननी नहीं है। मुक्ति के पिता राम और शिव हैं। यही निर्वाणदाता हैं। मुक्ति के लिए युक्ति चाहिए। इसे राम, विभीषण व हनुमान संवाद के जरिए सुनाकर श्रद्धालुओं को समझाया।
बापू ने कथा में कहा कि योग, तप, मंत्र और युक्ति को छिपाकर रखना चाहिए। बापू ने कहा कि योग का मतलब जुड़ना होता है जबकि वियोग का मतलब बिछुड़ना है। मित्रता भी योग है लेकिन वह तभी फलदायक है जब इसे छिपाकर रखा जाए। तप भी छिपाना चाहिए। इसका विज्ञापन नहीं होना चाहिए। इसके अलावा गुरु मंत्र भी छिपाकर रखना चाहिए। मंत्र सार्वजनिक होने पर प्रभाव खत्म हो जाता है। मंत्र का कीर्तन नहीं करना चाहिए। राम की शरण में आए विभीषण की कथा सुनाते हुए कहा कि राम ने जब विभीषण को अपने साथ रखने की वजह पूछी तो हनुमान जी ने कहा कि था कि आप तो टेढ़े (धनुष) को कंधे पर और सीधे (तीर) को हाथ में रखते हैं।
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