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ध्यान, धम्म और निर्वाण महात्मा बुद्ध के उपदेशों के केंद्र में : मोरारी बापू
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कथा के पांचवें दिन कथावाचक ने महात्मा बुद्ध के विचारों से लोगों को अवगत कराया
संवाद न्यूज एजेंसी
कसया(कुशीनगर)। कुशीनगर में चल रही रामकथा के पांचवें दिन कथावाचक मोरारी बापू ने लोगों महात्मा बुद्ध के विचारों से अवगत कराया। कथा व्यास ने कहा कि ध्यान, धम्म और निर्वाण को ही केंद्र में रखकर भगवान बुद्ध ने लोगों को उपदेश दिया था। इस दौरान उन्होंने रामचरित मानस में वर्णित भगवान बुद्ध व कल्कि अवतार की भी चर्चा की।
कथावाचक ने कहा कि बुद्ध ने सिर्फ तीन विषयों पर प्रमुखता से विचार रखा है। पहला ध्यान, दूसरा धम्म यानि धर्म और तीसरा निर्वाण। बुद्ध ने अपनी अधिकांश बातें संकेत के जरिए कही हैं। कभी भी कम बोलना या नहीं बोलना भी अपनी बात रखने का सशक्त माध्यम बन जाता है। जितना अधिक बोलोगे, उतनी अधिक गलतियां होंगी। बुद्ध भी भगवान विष्णु के अवतार हैं। गोस्वामी तुलसीदास ने अपनी रचना विनयपत्रिका में भगवान विष्णु के दशावतारों में बुद्ध की वंदना की है। बुद्ध ने कभी वंदनीय कार्यों की आलोचना नहीं की। उनके उपदेश युवाओं के लिए लाभप्रद हैं। बुद्ध और उनके शिष्य आनंद के बीच हुई वार्तालाप की चर्चा करते हुए मोरारी बापू ने कहा कि आनंद ने भगवान बुद्ध से पूछा कि मुझे बुद्धत्व प्राप्त नहीं हुआ, जबकि मैं सबसे पहले से आपके साथ चल रहा हूं। इस पर बुद्ध बोले, मेरे से अच्छे कई बुद्ध संघ में हैं। धम्म का संबंध पवित्रता से है। इसका मतलब मन, बुद्धि, चित्त और अंत:करण की शुचिता है। रामचरित मानस व रामकथा की चर्चा करते हुए कहा कि कथा सामूहिक स्नान है, जहां सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। मानव शरीर भी सात सोपानों का सद्ग्रंथ है। साधना भी सात तरह की होती हैं। नाम की साधना, रूप की साधना, लीला साधना, दान साधना, ध्यान साधना, ज्ञान की साधना और सुमिरन की साधना। रामचरित मानस की चर्चा करते हुए कहा कि सुंदरकांड का सार हनुमान चालीसा और हनुमान चालीसा का सार राम नाम के महामंत्र के रूप में है।
रामचरित मानस के सोपान साधना के केंद्र : बापू
कसया। संत व कथा वाचक मोरारी बापू ने बुधवार को श्रद्धालुओं को रामचरित मानस के सोपानों को विभिन्न साधनाओं का केंद्र बताया। कहा कि रामचरित मानस का बालकांड नाम की साधना के लिए, अयोध्या कांड रूप की साधना के लिए, अरण्य कांड लीला साधना के लिए, किष्किंधा कांड ध्यान साधना के लिए, सुंदरकांड सुमिरन साधना के लिए, लंकाकांड धाम साधना और उत्तर कांड संपूर्ण साधना के लिए है। बापू ने इन सोपानों के उन संवादों का भी जिक्र किया, जिसमें ये साधनाएं निहित हैं। संगीत के सात सुरों को सप्तऋषि बताते हुए कहा कि इसमें भारद्वाज, विश्वामित्र, कश्यप, गौतम, अत्रैय, वशिष्ठ व जमदग्नि शामिल हैं। मानस में भी सात सोपान हैं जो इन सप्तऋषियों की चर्चा से भरे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कसया(कुशीनगर)। कुशीनगर में चल रही रामकथा के पांचवें दिन कथावाचक मोरारी बापू ने लोगों महात्मा बुद्ध के विचारों से अवगत कराया। कथा व्यास ने कहा कि ध्यान, धम्म और निर्वाण को ही केंद्र में रखकर भगवान बुद्ध ने लोगों को उपदेश दिया था। इस दौरान उन्होंने रामचरित मानस में वर्णित भगवान बुद्ध व कल्कि अवतार की भी चर्चा की।
कथावाचक ने कहा कि बुद्ध ने सिर्फ तीन विषयों पर प्रमुखता से विचार रखा है। पहला ध्यान, दूसरा धम्म यानि धर्म और तीसरा निर्वाण। बुद्ध ने अपनी अधिकांश बातें संकेत के जरिए कही हैं। कभी भी कम बोलना या नहीं बोलना भी अपनी बात रखने का सशक्त माध्यम बन जाता है। जितना अधिक बोलोगे, उतनी अधिक गलतियां होंगी। बुद्ध भी भगवान विष्णु के अवतार हैं। गोस्वामी तुलसीदास ने अपनी रचना विनयपत्रिका में भगवान विष्णु के दशावतारों में बुद्ध की वंदना की है। बुद्ध ने कभी वंदनीय कार्यों की आलोचना नहीं की। उनके उपदेश युवाओं के लिए लाभप्रद हैं। बुद्ध और उनके शिष्य आनंद के बीच हुई वार्तालाप की चर्चा करते हुए मोरारी बापू ने कहा कि आनंद ने भगवान बुद्ध से पूछा कि मुझे बुद्धत्व प्राप्त नहीं हुआ, जबकि मैं सबसे पहले से आपके साथ चल रहा हूं। इस पर बुद्ध बोले, मेरे से अच्छे कई बुद्ध संघ में हैं। धम्म का संबंध पवित्रता से है। इसका मतलब मन, बुद्धि, चित्त और अंत:करण की शुचिता है। रामचरित मानस व रामकथा की चर्चा करते हुए कहा कि कथा सामूहिक स्नान है, जहां सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। मानव शरीर भी सात सोपानों का सद्ग्रंथ है। साधना भी सात तरह की होती हैं। नाम की साधना, रूप की साधना, लीला साधना, दान साधना, ध्यान साधना, ज्ञान की साधना और सुमिरन की साधना। रामचरित मानस की चर्चा करते हुए कहा कि सुंदरकांड का सार हनुमान चालीसा और हनुमान चालीसा का सार राम नाम के महामंत्र के रूप में है।
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रामचरित मानस के सोपान साधना के केंद्र : बापू
कसया। संत व कथा वाचक मोरारी बापू ने बुधवार को श्रद्धालुओं को रामचरित मानस के सोपानों को विभिन्न साधनाओं का केंद्र बताया। कहा कि रामचरित मानस का बालकांड नाम की साधना के लिए, अयोध्या कांड रूप की साधना के लिए, अरण्य कांड लीला साधना के लिए, किष्किंधा कांड ध्यान साधना के लिए, सुंदरकांड सुमिरन साधना के लिए, लंकाकांड धाम साधना और उत्तर कांड संपूर्ण साधना के लिए है। बापू ने इन सोपानों के उन संवादों का भी जिक्र किया, जिसमें ये साधनाएं निहित हैं। संगीत के सात सुरों को सप्तऋषि बताते हुए कहा कि इसमें भारद्वाज, विश्वामित्र, कश्यप, गौतम, अत्रैय, वशिष्ठ व जमदग्नि शामिल हैं। मानस में भी सात सोपान हैं जो इन सप्तऋषियों की चर्चा से भरे हैं।
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