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फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन ने की हड़ताल
kushinagar
Updated Tue, 20 Sep 2016 11:07 PM IST
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प्रदश्ऱ्न
- फोटो : santosh verma
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पडरौना। वेतन विसंगतियां दूर करने सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन और उत्तर प्रदेश लैब टेक्नीशियन संघ ने मंगलवार से कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। दोनों संगठनों के सदस्यों ने संयुक्त जिला चिकित्सालय के बरामदे में एक साथ धरना दिया।
डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के आह्वान पर जिले के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत सभी फार्मासिस्ट आंदोलनरत हैं। मंगलवार से पूरी तरह कामकाज बंद कर धरना में शामिल हो गए। फार्मासिस्ट वेतन विसंगति दूर करने, प्रोन्नति मानक का निर्धारण, उच्च पदों का सृजन, पदों के पुनर्गठन, ट्रामा सेंटरों में पद सृजन, पोस्टमार्टम एवं ब्लड बैंक में कार्यरत फार्मासिस्ट से ड्रग एक्ट एवं ड्यूटी अनुसार कार्य लिए जाने, पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली तथा नवनियुक्त फार्मासिस्टों को वरिष्ठता सूची में जोड़े जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कार्य बहिष्कार और धरना में आरके दीक्षित, नवीन कुमार श्रीवास्तव, बीपी सिंह, जेके दुबे, समीउल्लाह, आरडी प्रसाद, बीएन सिंह, अशोक सिंह, चंद्रभान यादव, रामआशीष शर्मा आदि शामिल थे।
दूसरी ओर उत्तर प्रदेश लैब टेक्नीशियन संघ के आह्वान पर सभी प्रयोगशाला प्राविधिज्ञ भी आंदोलनरत हैं। मंगलवार को सरकारी अस्पतालों के सभी एलटी भी कामकाज छोड़कर जिला अस्पताल पहुंचे और फार्मासिस्टों के साथ धरना में शामिल हो गए। इस संगठन के कुशीनगर अध्यक्ष विजय कृष्ण द्विवेदी और मंत्री लल्लन गुप्ता ने कहा कि वेतन विसंगति दूर कर पद की समानता के आधार पर वेतन देने, पदनाम परिवर्तित करते हुए केंद्र के कर्मचारियों के समान पदोन्नति व पदों का सृजन, आईपीएचएस मानक के अनुसार अस्पतालों में नए पदों का सृजन, सीनियर लैब टेक्नीशियन को जिला क्रय समिति में सम्मिलित करने, प्रयोगशाला से संबंधित उपकरणों तथा रसायन आदि का मांग पत्र, क्रय प्रक्रिया तथा भंडारण संबंधी कार्य सीनियर लैब टेक्नीशियन या लैब टेक्नीशियन से कराने, लैब टेक्नीशियन को 10 वर्ष की अनवरत संतोषजनक सेवा के बाद राजपत्रित प्रतिष्ठान प्रदान करने, एसीपी व्यवस्था में ग्रेड वेतन 4600 को इग्नोर करने, पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने और पेसेंट केयर एलाउंस की मांग जल्द पूरी की जाए। इस हड़ताल में एलटी अरविंद कुमार राय, सत्यदेव पांडेय, अश्वत्थामा मिश्रा, कृष्ण कुमार, अनिल प्रजापति, राजकुमार सहित कई लोग शामिल थे।
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फार्मासिस्टों की हड़ताल से परेशान रहे मरीज
हाटा। सरकारी अस्पतालों में तैनात फार्मासिस्टों ने भी मंगलवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। इस वजह से अस्पतालों के दवा काउंटर नहीं खुले, जिससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
हाटा सीएचसी पर सुबह से ही दवा का काउंटर नहीं खुला। यहां तैनात फार्मासिस्ट विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जिला मुख्यालय चले गए। डॉक्टरों ने ओपीडी में बैठकर पर्चियों पर दवाइयां तो लिखीं, लेकिन दवा काउंटर नहीं खुलने से मरीजों को निराश होना पड़ा। सुकरौली पीएचसी पर भी दवा काउंटर नहीं खुला।
फार्मासिस्ट और एलटी रहे हड़ताल पर, मरीज परेशान
पडरौना। मंगलवार से फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन के कार्य बहिष्कार कर देने से संयुक्त जिला चिकित्सालय में आए मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। प्लास्टर कक्ष और दवा काउंटर से लगायत पैथालॉजी तक कामकाज ठप रहा।
प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कामकाज ठप कर दिया और संयुक्त जिला चिकित्सालय के बरामदे में धरना पर बैठ गए। इसमें जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के फार्मासिस्ट और प्रयोगशाला प्राविधिज्ञ शामिल हुए। नतीजा यह हुआ कि जिला अस्पताल में डॉक्टर मरीजों की पर्चियों पर दवाइयां और जांच तो लिख रहे थे, लेकिन मरीजों को न तो दवाइयां मिल सकीं और न ही कोई जांच हो पाई। इसी तरह प्लास्टर कक्ष में प्लास्टर का काम भी बंद रहा। इन दोनों संगठनों के लोग अभी 22 तक हड़ताल पर रहेंगे।
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डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के आह्वान पर जिले के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत सभी फार्मासिस्ट आंदोलनरत हैं। मंगलवार से पूरी तरह कामकाज बंद कर धरना में शामिल हो गए। फार्मासिस्ट वेतन विसंगति दूर करने, प्रोन्नति मानक का निर्धारण, उच्च पदों का सृजन, पदों के पुनर्गठन, ट्रामा सेंटरों में पद सृजन, पोस्टमार्टम एवं ब्लड बैंक में कार्यरत फार्मासिस्ट से ड्रग एक्ट एवं ड्यूटी अनुसार कार्य लिए जाने, पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली तथा नवनियुक्त फार्मासिस्टों को वरिष्ठता सूची में जोड़े जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कार्य बहिष्कार और धरना में आरके दीक्षित, नवीन कुमार श्रीवास्तव, बीपी सिंह, जेके दुबे, समीउल्लाह, आरडी प्रसाद, बीएन सिंह, अशोक सिंह, चंद्रभान यादव, रामआशीष शर्मा आदि शामिल थे।
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दूसरी ओर उत्तर प्रदेश लैब टेक्नीशियन संघ के आह्वान पर सभी प्रयोगशाला प्राविधिज्ञ भी आंदोलनरत हैं। मंगलवार को सरकारी अस्पतालों के सभी एलटी भी कामकाज छोड़कर जिला अस्पताल पहुंचे और फार्मासिस्टों के साथ धरना में शामिल हो गए। इस संगठन के कुशीनगर अध्यक्ष विजय कृष्ण द्विवेदी और मंत्री लल्लन गुप्ता ने कहा कि वेतन विसंगति दूर कर पद की समानता के आधार पर वेतन देने, पदनाम परिवर्तित करते हुए केंद्र के कर्मचारियों के समान पदोन्नति व पदों का सृजन, आईपीएचएस मानक के अनुसार अस्पतालों में नए पदों का सृजन, सीनियर लैब टेक्नीशियन को जिला क्रय समिति में सम्मिलित करने, प्रयोगशाला से संबंधित उपकरणों तथा रसायन आदि का मांग पत्र, क्रय प्रक्रिया तथा भंडारण संबंधी कार्य सीनियर लैब टेक्नीशियन या लैब टेक्नीशियन से कराने, लैब टेक्नीशियन को 10 वर्ष की अनवरत संतोषजनक सेवा के बाद राजपत्रित प्रतिष्ठान प्रदान करने, एसीपी व्यवस्था में ग्रेड वेतन 4600 को इग्नोर करने, पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने और पेसेंट केयर एलाउंस की मांग जल्द पूरी की जाए। इस हड़ताल में एलटी अरविंद कुमार राय, सत्यदेव पांडेय, अश्वत्थामा मिश्रा, कृष्ण कुमार, अनिल प्रजापति, राजकुमार सहित कई लोग शामिल थे।
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फार्मासिस्टों की हड़ताल से परेशान रहे मरीज
हाटा। सरकारी अस्पतालों में तैनात फार्मासिस्टों ने भी मंगलवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। इस वजह से अस्पतालों के दवा काउंटर नहीं खुले, जिससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
हाटा सीएचसी पर सुबह से ही दवा का काउंटर नहीं खुला। यहां तैनात फार्मासिस्ट विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जिला मुख्यालय चले गए। डॉक्टरों ने ओपीडी में बैठकर पर्चियों पर दवाइयां तो लिखीं, लेकिन दवा काउंटर नहीं खुलने से मरीजों को निराश होना पड़ा। सुकरौली पीएचसी पर भी दवा काउंटर नहीं खुला।
फार्मासिस्ट और एलटी रहे हड़ताल पर, मरीज परेशान
पडरौना। मंगलवार से फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन के कार्य बहिष्कार कर देने से संयुक्त जिला चिकित्सालय में आए मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। प्लास्टर कक्ष और दवा काउंटर से लगायत पैथालॉजी तक कामकाज ठप रहा।
प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कामकाज ठप कर दिया और संयुक्त जिला चिकित्सालय के बरामदे में धरना पर बैठ गए। इसमें जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के फार्मासिस्ट और प्रयोगशाला प्राविधिज्ञ शामिल हुए। नतीजा यह हुआ कि जिला अस्पताल में डॉक्टर मरीजों की पर्चियों पर दवाइयां और जांच तो लिख रहे थे, लेकिन मरीजों को न तो दवाइयां मिल सकीं और न ही कोई जांच हो पाई। इसी तरह प्लास्टर कक्ष में प्लास्टर का काम भी बंद रहा। इन दोनों संगठनों के लोग अभी 22 तक हड़ताल पर रहेंगे।