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व्रती महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया
अमर उजाला/कुशीनगर
Updated Tue, 17 Nov 2015 11:27 PM IST
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पडरौना। भगवान सूर्य की उपासना का पर्व छठ के तीसरे दिन व्रती महिलाओं ने तेजस्वी और सुंदर काया वाले पुत्र और उनकी दीर्घायु के लिए भगवान भास्कर की उपासना की। शाम के समय सज धज कर नदी और ताल पोखरों व कुंड के घाट पर पहुंची महिलाओं ने डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर घाट पर विधि विधान से पूजन किया।
सूर्यषष्ठी व्रत के तीसरे दिन मंगलवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को व्रती महिलाओं ने अर्घ्य दिया। दिन के तीसरे पहर से ही नदी, तालाबों और नालों के किनारे बने विभिन्न छठ घाटों पर लोगों का आना शुरू हो गया। पूजन सामग्री की डलिया सिर पर उठाए घाट की ओर जा रही महिलाएं देवी गीत गाती रहीं।
छठ पर गाए जाने वाले पारंपरिक गीत ‘कांच ही बांस के बहंगियां, बहंगी लचकत जाय, सुगवा के मारबो धनुष से, सुगा गिरे मुरझाय’ सरीखे कर्णप्रीय गीत से घाट गूंजते रहे। छठ वेदियों पर पूजा करने के बाद सूर्य को अर्घ्य दिया गया। घाटोें से लौटने के बाद लोगों के घरों में कोसी भरने का आयोजन पूरा किया गया। नगर के रामधाम पोखरा, बावली चौक, सुराजी पोखरा, अंबे चौक आदि स्थानों पर हर वर्ष की तरह व्रती महिलाएं छठ पूजा की।
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कुछ परिवारों में किन्हीं कारणों से अगर महिलाएं व्रत नहीं रख पाईं थी तो उनके घर के पुरुष लोग व्रत की औपचारिकता पूरी किए। बावली चौक, रामधाम पोखरा, सुसवलिया, खिरकिया आदि जगहों पर मेले का भी आयोजन किया गया।
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सूर्यषष्ठी व्रत के तीसरे दिन मंगलवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को व्रती महिलाओं ने अर्घ्य दिया। दिन के तीसरे पहर से ही नदी, तालाबों और नालों के किनारे बने विभिन्न छठ घाटों पर लोगों का आना शुरू हो गया। पूजन सामग्री की डलिया सिर पर उठाए घाट की ओर जा रही महिलाएं देवी गीत गाती रहीं।
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छठ पर गाए जाने वाले पारंपरिक गीत ‘कांच ही बांस के बहंगियां, बहंगी लचकत जाय, सुगवा के मारबो धनुष से, सुगा गिरे मुरझाय’ सरीखे कर्णप्रीय गीत से घाट गूंजते रहे। छठ वेदियों पर पूजा करने के बाद सूर्य को अर्घ्य दिया गया। घाटोें से लौटने के बाद लोगों के घरों में कोसी भरने का आयोजन पूरा किया गया। नगर के रामधाम पोखरा, बावली चौक, सुराजी पोखरा, अंबे चौक आदि स्थानों पर हर वर्ष की तरह व्रती महिलाएं छठ पूजा की।
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कुछ परिवारों में किन्हीं कारणों से अगर महिलाएं व्रत नहीं रख पाईं थी तो उनके घर के पुरुष लोग व्रत की औपचारिकता पूरी किए। बावली चौक, रामधाम पोखरा, सुसवलिया, खिरकिया आदि जगहों पर मेले का भी आयोजन किया गया।