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Kushinagar News: दो वर्ष से अनुपस्थित मिलीं पंचायत सहायक, मानदेय रोका

Fri, 12 Jun 2026 12:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Fri, 12 Jun 2026 12:36 AM IST
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Panchayat assistant found absent for two years, honorarium stopped
पडरौना। सुकरौली ब्लॉक की ग्राम पंचायत महुई में तैनात पंचायत सहायक को दो साल का मानदेय नहीं मिलने की शिकायत सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। डीपीआरओ ने बुधवार को जांच की तो पता चला कि पंचायत सहायक दो साल से ड्यूटी पर ही नहीं आ रही हैं। ऑनलाइन हाजिरी पोर्टल पर जून 2024 से मई 2026 तक सिर्फ 43 दिन ही उपस्थिति दर्ज है। गांव के लोग, ग्राम प्रधान और अधिकारियों ने भी इस बार की पुष्टि की। इसको गंभीरता से लेते हुए डीपीआरओ ने गरिमा मिश्रा का बकाया मानदेय देने की मांग खारिज कर दी है। उन्होंने जांच रिपोर्ट भी शासन को भेज दी है।
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सोशल मीडिया पर शिकायत आई थी कि पंचायत सहायक गरिमा मिश्रा को पिछले दो साल से मानदेय नहीं दिया जा रहा। वायरल वीडियो को गंभीरता से लेते हुए डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी ने बीते बुधवार को गांव में मामले की जांच करने पहुंचे। जांच के समय एडीओ पंचायत उषा कुशवाहा, ग्राम विकास अधिकारी दिलीप, ग्राम प्रधान देवेंद्र जीत सिंह, सफाई कर्मी अनारसी देवी और गांव के लोग भी मौजूद रहे।
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डीपीआरओ की पूछताछ में सफाई कर्मी अनारसी देवी ने बताया कि नियुक्ति के कुछ दिन बाद तक गरिमा मिश्रा पंचायत भवन आती थीं, लेकिन पिछले दो साल से उन्हें कभी नहीं देखा। ग्राम प्रधान देवेंद्र जीत सिंह ने कहा कि पंचायत भवन आबादी के बीच है, यहां सुरक्षा की कोई समस्या नहीं है। गरिमा मिश्रा नियुक्ति के बाद कुछ दिन आईं, फिर दो साल से न आती हैं न कोई काम करती हैं। प्रधान ने बताया कि उन्हें कई बार नोटिस भेजा गया। पूर्व एडीओ पंचायत रामअशीष और तत्कालीन बीडीओ को भी जानकारी दी गई थी। उम्मीद थी कि वह काम पर लौट आएंगी, इसलिए अब तक पदच्युत नहीं किया गया। ग्राम विकास अधिकारी दिलीप ने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री, चाप सर्वे, फैमिली आईडी जैसे कोई भी शासकीय कार्य गरिमा मिश्रा ने नहीं किया। काम न करने की आदत से परेशान होकर विकासखंड या तहसील स्तर से भी उनकी ड्यूटी लगनी बंद हो गई।
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जांच में यह भी सामने आया कि वह नियमित रूप से गोरखपुर के नंदानगर में रहकर पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करती हैं। पूर्व सचिव धीरज सिंह ने फोन पर इसकी पुष्टि की। एडीओ पंचायत उषा कुशवाहा ने भी कहा कि हाजिरी दर्ज कराने के लिए कहा गया था, पर वह कभी नहीं आईं। डीपीआरओ ने पंचायत सहायकों के ऑनलाइन उपस्थिति पोर्टल की जांच की तो पता चला कि गरिमा मिश्रा ने जून 2024 से मई 2026 तक सिर्फ 43 दिन ही ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की है। यानी दो साल में 700 से ज्यादा दिन गैरहाजिर रही हैं।

डीपीआरओ ने बताया कि जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और लोगों के बयान के आधार पर गरिमा मिश्रा अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं करने की दोषी पाई गई हैं। नो वर्क नो पे के सिद्धांत पर उनकी मानदेय की मांग खारिज कर ग्राम प्रधान व सचिव को गरिमा मिश्रा अपना पक्ष रखने का मौका देने के निर्देश दिए गए हैं।
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