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पाली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने से होगा संरक्षण : भंते नंद रतन
Thu, 10 Oct 2024 05:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 10 Oct 2024 05:07 AM IST
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पकवा इनार। पाली भाषा प्राचीन भारत की अमूल्य धरोहर है। यह महात्मा बुद्ध की लोक कल्याणकारी वाणी का संरक्षण व संवर्धन करती है। केंद्र सरकार ने तीन अक्टूबर को पाली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया है।
श्रीलंका बुद्ध विहार के प्रभारी भंते नंद रतन ने कहा कि संस्कृति मंत्रालय के इस ऐतिहासिक निर्णय से पाली भाषा प्रेमियों में हर्षोल्लास का माहौल है। पाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में रखे जाने से भविष्य में इसका समुचित संरक्षण हो सकेगा। पालि एवं बौद्ध अध्ययन के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे। पाली भाषा एवं साहित्य भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न अंग है, जो एक नैतिकता मूलक साहित्य है। भंते ने केंद्रीय मंत्रिमंडल और पीएम नरेंद्र मोदी के प्रति आभार ज्ञापित किया है।
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श्रीलंका बुद्ध विहार के प्रभारी भंते नंद रतन ने कहा कि संस्कृति मंत्रालय के इस ऐतिहासिक निर्णय से पाली भाषा प्रेमियों में हर्षोल्लास का माहौल है। पाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में रखे जाने से भविष्य में इसका समुचित संरक्षण हो सकेगा। पालि एवं बौद्ध अध्ययन के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे। पाली भाषा एवं साहित्य भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न अंग है, जो एक नैतिकता मूलक साहित्य है। भंते ने केंद्रीय मंत्रिमंडल और पीएम नरेंद्र मोदी के प्रति आभार ज्ञापित किया है।
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