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अफसरों के गोद लिए गांवों में ही संतोषजनक नहीं मिली स्थिति
kushinagar
Updated Sat, 05 Nov 2016 11:14 PM IST
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जायजा
- फोटो : santosh verma
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पडरौना। स्वच्छ भारत मिशन के निदेशक और शासन से नामित जिले के नोडल अधिकारी विजय किरण आनंद ने शनिवार को हौसला पोषण मिशन की समीक्षा बैठक की। उन्होंने समीक्षा में पाया कि अधिकारियों की तरफ से गोद लिए गए गांवों में ही इस योजना की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने योजना के क्रियांवयन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों कर्मचारियों के विरुद्ध रिपोर्ट करने का निर्देश दिया।
विकास भवन में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि कुपोषण एक अभिशाप है। इसे हर हाल में मिटाना होगा। जरूरत है कि अपनी कार्यशैली में बदलाव लाते हुए अपनी जिम्मेदारियों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन करें। उन्होंने अधिकारियों की तरफ से गोद लिए गए गांवों की स्थिति संतोषजनक न होने पर नाराजगी व्यक्त की और चेताया कि अगली बैठक तक कार्यों में सुधार हो जाना चाहिए। जो भी अधिकारी या कर्मचारी लापरवाही बरतता है तो उसके खिलाफ रिपोर्ट करें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गोद लिए जिन गांवों के भ्रमण पर जाएं, वहां के लोगों को एकत्र कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आशा के माध्यम से गर्भवती के स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में जानें और उन्हें आयरन की गोलियां उपलब्ध कराने के साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिलने वाले पके-पकाए भोजन के बारे में जानकारी दें। कुपोषित बच्चों की दिनचर्या के बारे में उनके माता-पिता से बातचीत करें। अतिकुपोषित बच्चों को नजदीक के सीएचसी या पीएचसी में भर्ती कराएं। ऐसे लोगों के लिए संचालित योजनाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने के लिए गांव में कैंप लगाएं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पेंशन, मनरेगा, राशनकार्ड आदि का लाभ पात्र व्यक्तियों को ही दिया जाए। अधिकारियों को निर्देश दिया कि कुपोषित बच्चों के परिवारीजनों से मिलकर समस्या का हल निकालें।
डीएम शम्भु कुमार ने कहा कि गोद लिए गांवों की मासिक रिपोर्ट हर हाल में उपलब्ध कराएं। अन्यथा की स्थिति में कड़ी कार्रवाई के लिए शासन को अवगत करा दिया जाएगा। बैठक में सीडीओ केदारनाथ सिंह, सीएमओ डॉ. अखिलेश कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी रामपाल यादव, डीपीओ एसके सिंह, डीएसओ नरेंद्र तिवारी, डीडी कृषि गंगादीन सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
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विकास भवन में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि कुपोषण एक अभिशाप है। इसे हर हाल में मिटाना होगा। जरूरत है कि अपनी कार्यशैली में बदलाव लाते हुए अपनी जिम्मेदारियों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन करें। उन्होंने अधिकारियों की तरफ से गोद लिए गए गांवों की स्थिति संतोषजनक न होने पर नाराजगी व्यक्त की और चेताया कि अगली बैठक तक कार्यों में सुधार हो जाना चाहिए। जो भी अधिकारी या कर्मचारी लापरवाही बरतता है तो उसके खिलाफ रिपोर्ट करें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गोद लिए जिन गांवों के भ्रमण पर जाएं, वहां के लोगों को एकत्र कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आशा के माध्यम से गर्भवती के स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में जानें और उन्हें आयरन की गोलियां उपलब्ध कराने के साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिलने वाले पके-पकाए भोजन के बारे में जानकारी दें। कुपोषित बच्चों की दिनचर्या के बारे में उनके माता-पिता से बातचीत करें। अतिकुपोषित बच्चों को नजदीक के सीएचसी या पीएचसी में भर्ती कराएं। ऐसे लोगों के लिए संचालित योजनाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने के लिए गांव में कैंप लगाएं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पेंशन, मनरेगा, राशनकार्ड आदि का लाभ पात्र व्यक्तियों को ही दिया जाए। अधिकारियों को निर्देश दिया कि कुपोषित बच्चों के परिवारीजनों से मिलकर समस्या का हल निकालें।
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डीएम शम्भु कुमार ने कहा कि गोद लिए गांवों की मासिक रिपोर्ट हर हाल में उपलब्ध कराएं। अन्यथा की स्थिति में कड़ी कार्रवाई के लिए शासन को अवगत करा दिया जाएगा। बैठक में सीडीओ केदारनाथ सिंह, सीएमओ डॉ. अखिलेश कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी रामपाल यादव, डीपीओ एसके सिंह, डीएसओ नरेंद्र तिवारी, डीडी कृषि गंगादीन सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
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