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नर्सें हड़ताल पर, तीमारदार बने नर्स
kushinagar
Updated Sat, 03 Sep 2016 11:15 PM IST
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स्वास्थ्य
- फोटो : santosh verma
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पडरौना। संयुक्त जिला चिकित्सालय में कार्यरत नर्सों के हड़ताल पर चले जाने के कारण सबसे अधिक असुविधा मरीजों और उनके तीमारदारों को हो रही है। दो दिन से मरीजों को बेड पर न तो चादर मिल रही है और न ही जरूरत की अन्य कई वस्तुएं।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में करीब 20 स्थायी नर्स हैं, जो आल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन नई दिल्ली के आह्वान पर शुक्रवार से ही कार्य बहिष्कार कर धरना दे रही हैं। स्टॉक का चार्ज नर्सों के पास होने के कारण बेड के लिए चादर नहीं मिल रही है। अस्पताल में भर्ती कराए गए बच्चों और अन्य मरीजों को इंजेक्शन लगाना, दवाइयां देना, ड्रेसिंग आदि भी समय पर नहीं हो रहा है।
हालांकि संविदा पर एनएचएम के तहत नियुक्त की गईं कुछ नर्सों की ड्यूटी शिफ्ट के अनुसार लगाई गई है, लेकिन मरीजों की तादाद अधिक होने के कारण इलाज में दिक्कतें आ रही हैं।
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इन दिनों जिला अस्पताल में इंसेफेलाइटिस और इसके संभावित रोगियों की संख्या तो अधिक है ही, अन्य रोग जैसे डायरिया, बुखार, मलेरिया आदि के मरीज भी ज्यादा हैं। शनिवार को आलम यह था कि बच्चों को लेकर आए परिवार के लोग खुद ही नेबुलाइजर दे रहे थे। मरीजों को साथ ले जा रहे लोग ड्रिप स्वयं हाथ में लेकर वार्ड की तरफ जाते दिखे।
शनिवार को जिला अस्पताल में इंसेफेलाइटिस के जो नए रोगी भर्ती कराए गए, उनमें तरयासुजान के दो वर्षीय राजा, तमकुही के दो वर्षीय मुन्ना, तुर्कपट्टी की चार वर्षीय बबली, रामपुर की चार वर्षीय ज्योति, कसया के 12 माह के निक्कू शामिल हैं।
इस संबंध में सीएमएस डॉ. बजरंगी पांडेय का कहना था कि नर्सों के हड़ताल पर जाने का चिकित्सा व्यवस्था पर कोई असर नहीं है। संविदा पर 51 नर्स हैं, जिनसे काम लिया जा रहा है। हड़ताल आल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन के आह्वान पर हो रही है।
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संयुक्त जिला चिकित्सालय में करीब 20 स्थायी नर्स हैं, जो आल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन नई दिल्ली के आह्वान पर शुक्रवार से ही कार्य बहिष्कार कर धरना दे रही हैं। स्टॉक का चार्ज नर्सों के पास होने के कारण बेड के लिए चादर नहीं मिल रही है। अस्पताल में भर्ती कराए गए बच्चों और अन्य मरीजों को इंजेक्शन लगाना, दवाइयां देना, ड्रेसिंग आदि भी समय पर नहीं हो रहा है।
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हालांकि संविदा पर एनएचएम के तहत नियुक्त की गईं कुछ नर्सों की ड्यूटी शिफ्ट के अनुसार लगाई गई है, लेकिन मरीजों की तादाद अधिक होने के कारण इलाज में दिक्कतें आ रही हैं।
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इन दिनों जिला अस्पताल में इंसेफेलाइटिस और इसके संभावित रोगियों की संख्या तो अधिक है ही, अन्य रोग जैसे डायरिया, बुखार, मलेरिया आदि के मरीज भी ज्यादा हैं। शनिवार को आलम यह था कि बच्चों को लेकर आए परिवार के लोग खुद ही नेबुलाइजर दे रहे थे। मरीजों को साथ ले जा रहे लोग ड्रिप स्वयं हाथ में लेकर वार्ड की तरफ जाते दिखे।
शनिवार को जिला अस्पताल में इंसेफेलाइटिस के जो नए रोगी भर्ती कराए गए, उनमें तरयासुजान के दो वर्षीय राजा, तमकुही के दो वर्षीय मुन्ना, तुर्कपट्टी की चार वर्षीय बबली, रामपुर की चार वर्षीय ज्योति, कसया के 12 माह के निक्कू शामिल हैं।
इस संबंध में सीएमएस डॉ. बजरंगी पांडेय का कहना था कि नर्सों के हड़ताल पर जाने का चिकित्सा व्यवस्था पर कोई असर नहीं है। संविदा पर 51 नर्स हैं, जिनसे काम लिया जा रहा है। हड़ताल आल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन के आह्वान पर हो रही है।