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Kushinagar News: रकम डूबी, साफ नहीं हो सकी बुद्ध की हिरण्यवती
Thu, 06 Feb 2025 12:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 06 Feb 2025 12:16 AM IST
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कुशीनगर। बुद्ध और उनके अनुयायियों की हिरण्यवती नदी को साफ-सुथरा बनाने के लिए पैसा पानी की तरह बहाया गया है। सरकारी विभागों के साथ स्थानीय लोगों ने काफी प्रयास किए, लेकिन अब भी नदी का पानी साफ नहीं हो सका है।
गर्मी आने वाली है और इसके पहले ही नदी में जगह-जगह जलस्तर कम है या कई जगहों पर ठहर चुका है। इससे आगे भी सफाई की राह मुश्किल नजर आ रही है। नदी की पवित्रता व धार्मिक महत्व काफी है। देश-विदेश के बौद्ध धर्मानुयायी व भिक्षु नदी के जल से आचमन करते हैं। नदी जगह-जगह जलकुंभी, घास, झाड़-झंखाड़ व शैवाल से भरी हुई है, जिससे इसकी मौजूदा हालत बहुत ही दयनीय है।
बौद्ध उपासक और भिक्षुओं के लिए हिरण्यवती का अलग महत्व है। भगवान बुद्ध के दर्शन के बाद बौद्ध भिक्षु यहां आचमनी के लिए पहुंचते हैं और इसका जल भी साथ लेकर जाते हैं। वर्तमान दिनों में जिम्मेेदारों की अनदेखी और कागजी खानापूर्ति की भेंट चढ़ी हिरण्यवती अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। नदी में नगर पालिका के अधिकांश मोहल्लों का पानी गिर रहा है और कचड़ा भी भरा पड़ा है।
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नदी की सफाई के बाद बोटिंग की भी व्यवस्था की गई थी, लेकिन जलकुंभी होने के कारण यह परवान नहीं चढ़ सकी। हिरण्यवती को कुलकुला स्थान से भी जोड़ने की योजना बनी थी। साथ ही बंधे पर दोनों तरफ पौधे लगाने थे ताकि कुलकुला स्थान पर रहने वाले बंदरों को एक स्थायी ठौर मिल सके। झाड़-झंखाड़ होने के कारण हिरण्यवती के किनारे जाना भिक्षुओं के लिए मुश्किल हो गया है।
प्रशासनिक अधिकारी से लेकर कार्यदायी संस्था के जिम्मेदार भी नदी को स्वच्छ बनाने के नाम पर सरकारी धन खर्च सिर्फ कागजों में किए हैं, मौके पर स्थिति जस की तस है।
बौद्ध अनुयायियों के लिए गंगा नदी की तरह पवित्र व पूजनीय है हिरण्यवती : बौद्ध उपासक-उपासिकाओं व भिक्षुओं के लिए गंगा के समान पवित्र व पूजनीय है। नदी क जल से आचमन करने के अलावा जल को बोतलों में भरकर स्वदेश ले जाते हैं। नदी के जल की पवित्रता को लेकर बौद्ध भिक्षुओं में काफी गहरी आस्था है। यही, नहीं वह नदी के बुद्धा घाट पर पहुंचकर दर्शन और आरती तक भी करते हैं। करीब 15 साल से हिरण्यवती को स्वच्छ बनाने की चल रही कवायद किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
ऐसे होकर बहती है हिरण्यवती : हिरण्यवती नदी उदगम स्थल सपहां गांव के ताल से निकलकर सिधावे, बसडीला, मोतीपकड़, कठघरही, परवरपार, अहिरौली कुसम्ही से होते हुए कुशीनगर तक पहुंचती है। कुशीनगर से आगे कुड़वा उर्फ दिलीपनगर गांव में घाघी नदी में मिलती है। घाघी नदी आगे गंडक नदी में मिलती है।
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गर्मी आने वाली है और इसके पहले ही नदी में जगह-जगह जलस्तर कम है या कई जगहों पर ठहर चुका है। इससे आगे भी सफाई की राह मुश्किल नजर आ रही है। नदी की पवित्रता व धार्मिक महत्व काफी है। देश-विदेश के बौद्ध धर्मानुयायी व भिक्षु नदी के जल से आचमन करते हैं। नदी जगह-जगह जलकुंभी, घास, झाड़-झंखाड़ व शैवाल से भरी हुई है, जिससे इसकी मौजूदा हालत बहुत ही दयनीय है।
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बौद्ध उपासक और भिक्षुओं के लिए हिरण्यवती का अलग महत्व है। भगवान बुद्ध के दर्शन के बाद बौद्ध भिक्षु यहां आचमनी के लिए पहुंचते हैं और इसका जल भी साथ लेकर जाते हैं। वर्तमान दिनों में जिम्मेेदारों की अनदेखी और कागजी खानापूर्ति की भेंट चढ़ी हिरण्यवती अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। नदी में नगर पालिका के अधिकांश मोहल्लों का पानी गिर रहा है और कचड़ा भी भरा पड़ा है।
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नदी की सफाई के बाद बोटिंग की भी व्यवस्था की गई थी, लेकिन जलकुंभी होने के कारण यह परवान नहीं चढ़ सकी। हिरण्यवती को कुलकुला स्थान से भी जोड़ने की योजना बनी थी। साथ ही बंधे पर दोनों तरफ पौधे लगाने थे ताकि कुलकुला स्थान पर रहने वाले बंदरों को एक स्थायी ठौर मिल सके। झाड़-झंखाड़ होने के कारण हिरण्यवती के किनारे जाना भिक्षुओं के लिए मुश्किल हो गया है।
प्रशासनिक अधिकारी से लेकर कार्यदायी संस्था के जिम्मेदार भी नदी को स्वच्छ बनाने के नाम पर सरकारी धन खर्च सिर्फ कागजों में किए हैं, मौके पर स्थिति जस की तस है।
बौद्ध अनुयायियों के लिए गंगा नदी की तरह पवित्र व पूजनीय है हिरण्यवती : बौद्ध उपासक-उपासिकाओं व भिक्षुओं के लिए गंगा के समान पवित्र व पूजनीय है। नदी क जल से आचमन करने के अलावा जल को बोतलों में भरकर स्वदेश ले जाते हैं। नदी के जल की पवित्रता को लेकर बौद्ध भिक्षुओं में काफी गहरी आस्था है। यही, नहीं वह नदी के बुद्धा घाट पर पहुंचकर दर्शन और आरती तक भी करते हैं। करीब 15 साल से हिरण्यवती को स्वच्छ बनाने की चल रही कवायद किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
ऐसे होकर बहती है हिरण्यवती : हिरण्यवती नदी उदगम स्थल सपहां गांव के ताल से निकलकर सिधावे, बसडीला, मोतीपकड़, कठघरही, परवरपार, अहिरौली कुसम्ही से होते हुए कुशीनगर तक पहुंचती है। कुशीनगर से आगे कुड़वा उर्फ दिलीपनगर गांव में घाघी नदी में मिलती है। घाघी नदी आगे गंडक नदी में मिलती है।