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Kushinagar News: मोबाइल फोन से खुलेगा योगेश की मौत का राज
Sat, 27 Jun 2026 01:58 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 27 Jun 2026 01:58 AM IST
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सकरौली में मृतक परिवार को सांत्वना देते विधायक मोहन वर्मा।परिवार के लोगों से जानकारी लेते प
सुकरौली। हाटा कोतवाली के गिदहा धनहा निवासी नगर निगम गोरखपुर के सफाईकर्मी योगेश की संदिग्ध मौत का मामला पुलिस के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है। उसके मोबाइल फोन से ही मौत का राज खुल सकता है।
17 जून से लापता योगेश का शव एक सप्ताह बाद गांव के बाहर झाड़ियों में मिला था, लेकिन अब तक की जांच में कई ऐसे सवाल सामने आ रहे हैं, जिनके जवाब तलाशना पुलिस के लिए आसान नहीं है। फिलहाल जांच का केंद्र योगेश का मोबाइल फोन और उससे जुड़े तकनीकी पहलू हैं।
सूत्रों के अनुसार, घटनास्थल से कुछ दूरी पर एक दुकानदार के पास योगेश का मोबाइल मिला था। अब पुलिस मोबाइल की कॉल डिटेल, अंतिम लोकेशन, संपर्क में आए लोगों और अन्य तकनीकी पहलुओं की गहन जांच करा रही है। माना जा रहा है कि मोबाइल से मिलने वाले डिजिटल साक्ष्य मौत की परतें खोलने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट में शव काफी पुराना होने की आशंका जताई गई है, जबकि योगेश 17 जून को लापता हुआ था और करीब एक सप्ताह बाद उसका शव बरामद हुआ। ऐसे में समय के अंतर को लेकर जांच एजेंसियां भी सभी पहलुओं पर मंथन कर रही हैं। इसके अलावा घटनास्थल पर शव की स्थिति और शरीर के अलग-अलग हिस्से मिलने जैसे बिंदु भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस इन्हीं तथ्यों को वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों से जोड़कर घटनाक्रम की कड़ियां तलाशने में जुटी है।
हाटा कोतवाल संजय दुबे ने बताया कि पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है। अब तक परिजनों की ओर से कोई तहरीर नहीं मिली है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, तकनीकी जांच और उच्चाधिकारियों के निर्देश के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि परिजनों की ओर से तहरीर दी जाती है तो उसके आधार पर भी विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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17 जून से लापता योगेश का शव एक सप्ताह बाद गांव के बाहर झाड़ियों में मिला था, लेकिन अब तक की जांच में कई ऐसे सवाल सामने आ रहे हैं, जिनके जवाब तलाशना पुलिस के लिए आसान नहीं है। फिलहाल जांच का केंद्र योगेश का मोबाइल फोन और उससे जुड़े तकनीकी पहलू हैं।
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सूत्रों के अनुसार, घटनास्थल से कुछ दूरी पर एक दुकानदार के पास योगेश का मोबाइल मिला था। अब पुलिस मोबाइल की कॉल डिटेल, अंतिम लोकेशन, संपर्क में आए लोगों और अन्य तकनीकी पहलुओं की गहन जांच करा रही है। माना जा रहा है कि मोबाइल से मिलने वाले डिजिटल साक्ष्य मौत की परतें खोलने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट में शव काफी पुराना होने की आशंका जताई गई है, जबकि योगेश 17 जून को लापता हुआ था और करीब एक सप्ताह बाद उसका शव बरामद हुआ। ऐसे में समय के अंतर को लेकर जांच एजेंसियां भी सभी पहलुओं पर मंथन कर रही हैं। इसके अलावा घटनास्थल पर शव की स्थिति और शरीर के अलग-अलग हिस्से मिलने जैसे बिंदु भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस इन्हीं तथ्यों को वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों से जोड़कर घटनाक्रम की कड़ियां तलाशने में जुटी है।
हाटा कोतवाल संजय दुबे ने बताया कि पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है। अब तक परिजनों की ओर से कोई तहरीर नहीं मिली है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, तकनीकी जांच और उच्चाधिकारियों के निर्देश के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि परिजनों की ओर से तहरीर दी जाती है तो उसके आधार पर भी विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।