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Kushinagar News: बोर्ड पर एमबीबीएस और जनरल सर्जन...जांच में झोलाछाप

Sun, 15 Jun 2025 11:25 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sun, 15 Jun 2025 11:25 PM IST
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MBBS and General Surgeon on board... quack in investigation
कुशीनगर। खड्डा के बिब्रांत अस्पताल के बोर्ड पर खुद को एमबीबीएस और जनरल सर्जन की उपाधि से अलंकृत करने वाला डॉ. सैयद विभाग की जांच में झोलाछाप निकला। अस्पताल पर लगे अन्य डॉक्टरों की डिग्रियों की जांच स्वास्थ्य विभाग ने शुरू कर दी है। बिब्रांत अस्पताल में ऑपरेशन के बाद शनिवार को जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया था।
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इन दिनों पडरौना, कसया, फाजिलनगर, गुरवलिया बाजार, दुदही बाजार के आसपास टेंट से लेकर बेसमेंट तक ऐसे फर्जी अस्पताल और क्लिनिक चल रहे हैं जहां बोर्ड पर फर्जी डॉक्टर और विधिमान्य डिग्रियां दिखाकर लोगों को ठगी का प्रयास किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग की लचर कार्रवाई के कारण पूरे जिले में ऐसे अवैध अस्पतालों का संजाल है।
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मरीजों की मौत के बाद जब लोग हंगामा करते हैं तो विभाग सजगता दिखाता है। सूत्र बता रहे हैं कि नवागत सीएमओ के आने के बाद कुछ संजीदगी दिखी थी, लेकिन फिर से स्वास्थ्य विभाग अपनी पुरानी लापरवाही और उसी ढर्रे पर संचालित होने लगा है।
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क्षेत्र में संचालित अस्पतालों के लुभावने बोर्ड पर लिखे डाॅक्टरों के नाम और गोल्ड मेडलिस्ट, सर्जन, डीजीएमओ, एमडी मेडिसिन जैसे डिग्री देख झांसे में मत आइए, यह फर्जी भी हो सकते हैं।
अपने को एमबीबीएस (जनरल सर्जन) डाॅक्टर बताने वाला जच्चा-बच्चा की मौत का जिम्मेदार सैयद झोलाछाप निकला। खड्डा नगर पंचायत, छितौनी सहित तहसील क्षेत्र के विभिन्न चौक चौराहे पर खुले अस्पतालों के बोर्ड पर तमाम डाक्टरों, महिला डॉक्टरों का नाम लिखा दिखाई देता है। इनके नाम के आगे बड़ी-बड़ी डिग्री लिखा होता है तथा देश के नामी अस्पताल में कार्य करने का अनुभव भी लिखा रहता है।
इसे देखकर मरीज झांसे में आ जाते हैं। हकीकत में ऐसे तमाम नाम व डिग्री पूरी तरह गलत होते हैं। इसकी आड़ में अप्रशिक्षित व्यक्ति बड़ा डाॅक्टर बताते हुए इलाज करता है तथा लोगों का जीवन संकट में डाल देता है।
खड्डा कस्बे के महाराणा प्रताप चौक के पास स्थित बिब्रांत अस्पताल के बोर्ड पर डाॅक्टर सैयद मुहम्मद सलमान का नाम लिखा है। डॉक्टर की डिग्री एमबीबीएस (एमएस) जनरल सर्जन बताया गया है यह पुलिस जांच में फर्जी पाया गया। इनकी ओर से ऑपरेशन करके महिला का प्रसव कराया गया था, जिसमें जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई थी।
डाॅक्टर जेल में पहुंच गए हैं। बताते चले कि बिना लाइसेंस के ही यह अस्पताल संचालित था। बोर्ड पर सैयद के अलावा डाॅ. प्रतिभा एमबीबीएस (डीजीओ), डाॅ. अजय कुमार (एमडी मेडिसन), डाॅ. विनय मल्ल एमबीबीएम (एम एस), डाॅ. नवनीत काला (न्यूरो सर्जन) का नाम लिखा हुआ है।
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मरीजों की मौत के बाद विभाग होता है सक्रिय

जिले के पडरौना, दुदही, सेवरही और फाजिलनगर आदि इलाकों में किसी ने टिन शेड डालकर तो किसी ने भारी गंदगी के बीच में ही अस्पताल खोल रखा है, जहां ऑपरेशन तक किया जाता रहा है। कई जगह तो अच्छे खासे चमक दमक के साथ अस्पताल बनवा रखा है जहां अस्पताल के सामने लगे इनके बोर्ड पर डिग्रियां देख लोग सहज ही झांसे में आ जाते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कभी इनकी डिग्रियों की जांच नहीं की जाती है। अधिकतर का स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण भी नहीं रहता। इनके इलाज से जब मरीज की हालत बिगड़ जाती है तो उन्हें रेफर कर दिया जाता है। कई मरीजों की मौत भी हो जाती है तब विभाग सक्रियता दिखाता है और तालाबंदी कर वाहवाही लूट लेता है जबकि हकीकत तो यह है कि सील किए हुए ऐसे कई अस्पताल बाद में संचालित होते हुए मिल चुके हैं।

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ऑपरेशन से पहले एक लाख जमा करा लिया था झोलाझाप
खड्डा। पिछले वर्ष खड्डा कस्बे में अपने ननिहाल आई सोनी को प्रसव पीड़ा होने पर पीएचसी ले जाया गया जहां से बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। एक महिला दलाल के चक्कर में फंसकर खड्डा स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में ले जाया गया जहां धन वसूल कर इलाज शुरू हुआ, लेकिन हालत बिगड़ने पर अस्पताल संचालक सोनी को लेकर पडरौना छावनी स्थित एक प्राईवेट अस्पताल ले जाया गया यहां भी धन वसूली हुई बाद में कहा गया कि कहीं और ले जाइए और मजबूर परिजन गोरखपुर ले जा रहे थे रास्ते में ही सोनी ने दम तोड़ दिया। इस मामले में शिकायत हुई तो डिप्टी सीएमओ ने अस्पताल को अवैध पाते हुए सील कर दिया, लेकिन कुछ दिन बाद खोल दिया गया। ऐसे क इ मामले आ चुके हैं जिनमें अवैध अस्पताल व अप्रशिक्षित डाक्टर के चलते लोगों का जीवन खत्म या खतरे में पड़ा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सब शून्य रहता है।
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जिले में संचालित होने वाले अवैध अस्पतालों पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए नोडल अफसर को निर्देश दिया गया है।
-डॉ. अनुपम प्रकाश भास्कर, सीएमओ कुशीनगर
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