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मां व पिता के हत्यारे बेटों को आजीवन करावास
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Fri, 22 Dec 2017 12:12 AM IST
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अदालत।
- फोटो : amar ujala
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पडरौना। संपत्ति के लालच में हाटा कोतवाली क्षेत्र के दो बेटों ने अपने पिता और सौतेली मां तथा उसकी बहन की बेटी की हत्या कर दी थी। 26 दिसंबर 2011 को हाटा कोतवाली क्षेत्र के विशुनपुर ठूठी गांव में हुई तीन हत्याओं के मामले में बृहस्पतिवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय ने अपना फैसला सुनाया।
इस मामले में पांच लोग आरोपी थे, जिनमें तीन को दोषमुक्त कर दिया गया। हत्यारोपी दोनों बेटों को आजीवन कारावास और प्रत्येक को 1.10 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।देवरिया जिले के रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के पिपरहिया गांव की निवासी वादी सुधा सिंधु यादव के अधिवक्ता की तरफ से न्यायालय को बताया गया कि मृतक रामनक्षत्र यादव ने पहली पत्नी लीलावती के जीवित रहते ही सुभावती से दूसरी शादी की थी । मृतक की दूसरी पत्नी सुभावती को कोई संतान नहीं होने पर अपनी बहन की बेटी रीतू को अपने पास रखी थी और अपनी पूरी जायदाद रीतू को देना चाहती थी। इसी बात से नाराज मृतक रामनक्षत्र के बेटे नागेंद्र यादव व प्रदीप यादव ने पिता रामनक्षत्र, सौतेली मां सुभावती और रीतू को धारदार हथियार से प्रहारकर जान से मार दिया और शवों को एक पोखरे में फेंक दिया था।
मुकदमा दर्ज होने के बाद इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायालय कोर्ट संख्या तीन में शुरू हुई थी। बृहस्पतिवार को अपर सत्र न्यायाधीश राज सिंह वर्मा ने इस मामले की सुनवाई के दौरान रामनक्षत्र के हत्या की आरोपी उनकी पहली पत्नी लीलावती देवी, जितेंद्र सिंह और संतोष कुमार पांडेय को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया, लेकिन मृतक के पुत्र नागेंद्र यादव और प्रदीप यादव को आरोपी मानते हुए आजीवन कारावास तथा दोनों में प्रत्येक को 1.10 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थ दंड नहीं देने की स्थिति में इन्हें एक वर्ष का सामान्य कारावास अतिरिक्त रूप से भुगतना होगा। वादी की तरफ से इस मुकदमे की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रामवृक्ष यादव कर रहे थे।
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इस मामले में पांच लोग आरोपी थे, जिनमें तीन को दोषमुक्त कर दिया गया। हत्यारोपी दोनों बेटों को आजीवन कारावास और प्रत्येक को 1.10 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।देवरिया जिले के रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के पिपरहिया गांव की निवासी वादी सुधा सिंधु यादव के अधिवक्ता की तरफ से न्यायालय को बताया गया कि मृतक रामनक्षत्र यादव ने पहली पत्नी लीलावती के जीवित रहते ही सुभावती से दूसरी शादी की थी । मृतक की दूसरी पत्नी सुभावती को कोई संतान नहीं होने पर अपनी बहन की बेटी रीतू को अपने पास रखी थी और अपनी पूरी जायदाद रीतू को देना चाहती थी। इसी बात से नाराज मृतक रामनक्षत्र के बेटे नागेंद्र यादव व प्रदीप यादव ने पिता रामनक्षत्र, सौतेली मां सुभावती और रीतू को धारदार हथियार से प्रहारकर जान से मार दिया और शवों को एक पोखरे में फेंक दिया था।
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मुकदमा दर्ज होने के बाद इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायालय कोर्ट संख्या तीन में शुरू हुई थी। बृहस्पतिवार को अपर सत्र न्यायाधीश राज सिंह वर्मा ने इस मामले की सुनवाई के दौरान रामनक्षत्र के हत्या की आरोपी उनकी पहली पत्नी लीलावती देवी, जितेंद्र सिंह और संतोष कुमार पांडेय को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया, लेकिन मृतक के पुत्र नागेंद्र यादव और प्रदीप यादव को आरोपी मानते हुए आजीवन कारावास तथा दोनों में प्रत्येक को 1.10 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थ दंड नहीं देने की स्थिति में इन्हें एक वर्ष का सामान्य कारावास अतिरिक्त रूप से भुगतना होगा। वादी की तरफ से इस मुकदमे की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रामवृक्ष यादव कर रहे थे।
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