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Kushinagar News: बाड़ में फंसा तेंदुआ...तीन घंटे में निकालकर जंगल में छोड़ा
Sat, 08 Feb 2025 11:38 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 08 Feb 2025 11:38 PM IST
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खड्डा। कुशीनगर से सटे बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के जंगलों से भटककर एक तेंदुआ बगहा के नरवल बोरवल पंचायत स्थित पिपरा गांव में पहुंच गया। खेत की सुरक्षा के लिए लगे तारों के बाड़ में फंसे इस तेंदुए को वन विभाग की टीम ने बेहोश कर रेस्क्यू किया। समय रहते बचाव अभियान शुरू हो जाने कोई नुकसान नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने शनिवार को खेत से तेंदुए की दहाड़ सुनी और तुरंत इसकी सूचना वीटीआर के बगहा रेंजर सुनील कुमार को दी। वन विभाग की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और विशेषज्ञों की मदद से तेंदुए को ट्रैंकुलाइज किया गया। वनकर्मियों ने पहले यह सुनिश्चित किया कि तेंदुआ पूरी तरह बेहोश हो चुका है। इसके लिए लकड़ी के डंडे से उसकी प्रतिक्रिया जांची गई। पूरी तरह बेहोशी की पुष्टि होने के बाद उसे जाल में लपेटकर रेस्क्यू किया गया। हरहा नदी तट के पास फंसे इस तेंदुए को बचाने में वन विभाग की टीम को करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
तेंदुए का एक पैर गंभीर रूप से जख्मी हो गया था। इसे प्राथमिक उपचार के बाद जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में करीब 100 तेंदुए हैं, लेकिन हाल के वर्षों में मानवीय गतिविधियों और वन संपदा के नुकसान के कारण जंगली जानवर रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रहे हैं।
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ग्रामीणों ने शनिवार को खेत से तेंदुए की दहाड़ सुनी और तुरंत इसकी सूचना वीटीआर के बगहा रेंजर सुनील कुमार को दी। वन विभाग की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और विशेषज्ञों की मदद से तेंदुए को ट्रैंकुलाइज किया गया। वनकर्मियों ने पहले यह सुनिश्चित किया कि तेंदुआ पूरी तरह बेहोश हो चुका है। इसके लिए लकड़ी के डंडे से उसकी प्रतिक्रिया जांची गई। पूरी तरह बेहोशी की पुष्टि होने के बाद उसे जाल में लपेटकर रेस्क्यू किया गया। हरहा नदी तट के पास फंसे इस तेंदुए को बचाने में वन विभाग की टीम को करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
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तेंदुए का एक पैर गंभीर रूप से जख्मी हो गया था। इसे प्राथमिक उपचार के बाद जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में करीब 100 तेंदुए हैं, लेकिन हाल के वर्षों में मानवीय गतिविधियों और वन संपदा के नुकसान के कारण जंगली जानवर रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रहे हैं।
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