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कुशीनगर में बाढ़: गंडक नदी कर रही बैकरोलिंग, गांव में कटान का खतरा
Fri, 23 Jul 2021 07:23 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, कुशीनगर।
अमर उजाला नेटवर्क, कुशीनगर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 23 Jul 2021 07:23 PM IST
सार
गंडक नदी कर रही बैकरोलिंग, बचाव कार्य बार-बार क्षतिग्रस्त होने से लोग बेचैन, कई पक्का मकान जद में आने से 2018 की घटना याद कर सहम गए हैं लोग
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गंडक नदी।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
कुशीनगर जिले के अहिरौलीदान गांव के कचहरी टोला में गंडक नदी की ओर से कटान जारी रहने और बचाव कार्य बार-बार क्षतिग्रस्त होने से लोग बेचैन हैं। कटान की जद में कई लोगों का पक्का मकान आ चुका है और 2018 की घटना को याद कर लोग सहमे हुए हैं।
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वर्ष 2018 में इसी तरह कटान शुरू हुई थी। बाद में नदी ने इतना रौद्र रूप धारण कर लिया कि कचहरी टोला का तीन चौथाई हिस्सा नदी में समा गया था। डेढ़ सौ से अधिक पक्के मकान नदी की धारा में बह गए थे। अहिरौलीदान के कचहरी टोला पर 2018 के बाद एक बार फिर गंडक नदी की भृकुटि टेढ़ी होने लगी है। नदी पिछले तीन दिनों से यहां बैकरोलिंग करती हुई कटान जारी रखे हुए है। यही नहीं, बचाव कार्य बार-बार धंस जा रहा है। इसने नदी के किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। उन्हें कटान का खतरा बढ़ने की चिंता है।
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लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कटान रोकने का पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया तो स्थिति कभी भी बिगड़ सकती है। कई लोगों के पक्के मकान कटान की जद में आ सकते हैं। यही नहीं, लोगों को यह भी आशंका सताने लगी है कि कहीं नदी ने 2018 के इतिहास की पुनरावृत्ति की तो कचहरी टोला के 20-25 पक्के मकानों के साथ एपी बांध की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
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वर्ष 2018 में इसी तरह गंडक नदी ने कचहरी टोला में कटान शुरू किया था, लेकिन यही कटान बाद में इतना रौद्र रूप धारण कर लिया कि कचहरी टोला का तीन चौथाई हिस्सा गंडक नदी में समा गया था और पूर्व प्रधान हरिकृष्ण सिंह, धुरंधर सिंह, ज्ञानी सिंह, रामनरेश सिंह, ललन सिंह, गोरख सिंह सहित डेढ़ सौ से अधिक लोगों के बहुमंजिले पक्के मकान तक नदी की धारा में बह गए थे।
उस घटना को याद कर कचहरी टोला के लोग आज भी सिहर उठते है। हालांकि कचहरी टोला में अप्रत्याशित कटान से बाढ़ खंड विभाग चौकन्ना है। जेई चंदप्रकाश, जेई सुनील कुमार यादव व जेई राजेश कुमार सिंह की देखरेख में कटान रोकने को लेकर बचाव कार्य तेजी से कराया जा रहा है।
शुक्रवार को भी मिट्टी से भरी बोरियों से बचाव कार्य जारी रहा। वहीं, जिन लोगों के पक्के मकान के पास आकर नदी बहने लगी है और उनके पक्के मकानों को खतरा उत्पन्न हो गया है। वहीं, यशवंत सिंह, सकलदेव सिंह, धर्मदेव सिंह, विक्रमा सिंह, बलिस्टर सिंह, ब्रह्मदेव सिंह, रामायन सिंह आदि कहना है कि यदि समय रहते कटान रोकने का पुख्ता इंतजाम नहीं हुआ तो उनके घरों के साथ एपी बांध की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। इस संबंध में बाढ़ खंड तृतीय के सहायक अभियंता एसके प्रियदर्शी का कहना है कि कटान को नियंत्रित करने को लेकर बचाव कार्य जारी है और फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।
उस घटना को याद कर कचहरी टोला के लोग आज भी सिहर उठते है। हालांकि कचहरी टोला में अप्रत्याशित कटान से बाढ़ खंड विभाग चौकन्ना है। जेई चंदप्रकाश, जेई सुनील कुमार यादव व जेई राजेश कुमार सिंह की देखरेख में कटान रोकने को लेकर बचाव कार्य तेजी से कराया जा रहा है।
शुक्रवार को भी मिट्टी से भरी बोरियों से बचाव कार्य जारी रहा। वहीं, जिन लोगों के पक्के मकान के पास आकर नदी बहने लगी है और उनके पक्के मकानों को खतरा उत्पन्न हो गया है। वहीं, यशवंत सिंह, सकलदेव सिंह, धर्मदेव सिंह, विक्रमा सिंह, बलिस्टर सिंह, ब्रह्मदेव सिंह, रामायन सिंह आदि कहना है कि यदि समय रहते कटान रोकने का पुख्ता इंतजाम नहीं हुआ तो उनके घरों के साथ एपी बांध की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। इस संबंध में बाढ़ खंड तृतीय के सहायक अभियंता एसके प्रियदर्शी का कहना है कि कटान को नियंत्रित करने को लेकर बचाव कार्य जारी है और फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।