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Kushinagar News: बेटी नहीं जो आई तो फिर बहू कहां से लाओगे....
Mon, 25 Sep 2023 01:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 25 Sep 2023 01:22 AM IST
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फोटो है।
- विश्व बेटी दिवस पर श्रीलंका बुद्ध विहार में कवि सम्मेलन
संवाद न्यूज एजेंसी
पकवा इनार। कुशीनारा जीवक ट्रस्ट व कुशीनारा इंस्टीट्यूट के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को श्रीलंका बुद्ध विहार सभागार में बेटी दिवस पर कवि सम्मेलन हुआ। इसमें कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाई।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ भंते डाॅ. नंदरतन ने धम्म वंदना से किया। इसके बाद प्रदीप मिश्र ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। उन्होंने मन तथागत हो न पाया, पर तुम्हारी खोज में एक परिव्राजक सरीखा सारा जीवन हो गया सुनाया। शैलेंद्र असीम ने नफरतें हर तरफ सिर उठाने लगीं, बुद्ध की आज फिर है जरूरत बड़ी। परमानंद मिश्र ने गीतों के अमृत रस से मैं सराबोर करने आया सुनाया। आरके भट्ट बावरा ने सन्तुलन जो बिगड़ा सृष्टि का मल-मल के हाथ पछताओगे। बेटी नहीं जो आई तो फिर बहु कहां से लाओगे सुनाकर खुब तालियां बटोरी। इसी तरह युवा कवि आफताब आलम, सुनील चौरसिया, प्रेमनाथ मिश्र, डाॅ. राजेश रंजन, नवल प्रताप सिंह आदि कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएं सुनाई। कवि गोष्ठी की अध्यक्षता शायर कलीमुल हक और संचालन वाहिद ने किया। अंत में सुनील चौरसिया का काव्य संग्रह उपाध्यक्ष अंजलि खरवार को भेंट किया।
इस दौरान डाॅ. पवन खरवार, राकेश मिश्रा, डाॅ. राजेश रंजन, प्रदीप कुशवाहा, डाॅ. सोनू भरद्वाज, हीरालाल गोंड, महेश, राहुल शाह आदि मौजूद रहे।
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- विश्व बेटी दिवस पर श्रीलंका बुद्ध विहार में कवि सम्मेलन
संवाद न्यूज एजेंसी
पकवा इनार। कुशीनारा जीवक ट्रस्ट व कुशीनारा इंस्टीट्यूट के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को श्रीलंका बुद्ध विहार सभागार में बेटी दिवस पर कवि सम्मेलन हुआ। इसमें कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाई।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ भंते डाॅ. नंदरतन ने धम्म वंदना से किया। इसके बाद प्रदीप मिश्र ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। उन्होंने मन तथागत हो न पाया, पर तुम्हारी खोज में एक परिव्राजक सरीखा सारा जीवन हो गया सुनाया। शैलेंद्र असीम ने नफरतें हर तरफ सिर उठाने लगीं, बुद्ध की आज फिर है जरूरत बड़ी। परमानंद मिश्र ने गीतों के अमृत रस से मैं सराबोर करने आया सुनाया। आरके भट्ट बावरा ने सन्तुलन जो बिगड़ा सृष्टि का मल-मल के हाथ पछताओगे। बेटी नहीं जो आई तो फिर बहु कहां से लाओगे सुनाकर खुब तालियां बटोरी। इसी तरह युवा कवि आफताब आलम, सुनील चौरसिया, प्रेमनाथ मिश्र, डाॅ. राजेश रंजन, नवल प्रताप सिंह आदि कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएं सुनाई। कवि गोष्ठी की अध्यक्षता शायर कलीमुल हक और संचालन वाहिद ने किया। अंत में सुनील चौरसिया का काव्य संग्रह उपाध्यक्ष अंजलि खरवार को भेंट किया।
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इस दौरान डाॅ. पवन खरवार, राकेश मिश्रा, डाॅ. राजेश रंजन, प्रदीप कुशवाहा, डाॅ. सोनू भरद्वाज, हीरालाल गोंड, महेश, राहुल शाह आदि मौजूद रहे।