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रामपुरपट्टी गांव की मुसहर बस्ती में पहुंची गोरखपुर व लखनऊ की टीम
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लखनऊ और गोरखपुर की स्वास्थ्य टीम ने रामपुर पट्टी में जांच की।
- फोटो : KUSHINAGAR
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रामपुरपट्टी गांव की मुसहर बस्ती में पहुंची गोरखपुर व लखनऊ की टीम
अमर उजाला ब्यूरो
दुदही/ बरवापट्टी। क्षेत्र के रामपुरपट्टी गांव की मुसहर बस्ती में तीन मुसहरों की मौत के बाद प्रशासनिक अमला अब पूरी तरह सक्रिय दिख रहा है। बुधवार को कमिश्नर के आदेश पर गोरखपुर व लखनऊ की संयुक्त टीम ने इस मुसहर बस्ती में पहुंचकर मृतक पंकज की मां से मिलकर उसके बारे में जानकारी ली।
पंकज की मां ने बताया कि उसे 15 दिनों से बुखार लग रहा था। उसे सीएचसी दुदही में दिखाए, जहां डॉक्टर ने जांच कर दो खुराक दवा दी और घर भेज दिया। दवा खाने के बाद बुखार ठीक नहीं हुआ। उसके बाद गौरीश्रीराम में एक झोलाछाप से दिखाया, जहां बुखार तेज होने पर झोलाछाप ने जिला अस्पताल में इलाज कराने को कहा। दो खुराक दवा लेकर घर आ गए। उसके बाद कहीं दिखाने नहीं ले गए, जिसकी वजह की पंकज की मौत हो गई। लखनऊ से आई टीम ने तीनों मृतकों के परिजनों का बयान दर्ज किया। उसके बाद गांव में दवा के छिड़काव व स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। ग्रामीणों ने बताया कि आठ वर्षों में कभी भी दवा का छिड़काव नहीं कराया गया है न ही गांव में कभी स्वास्थ्य टीम आती है। जब से यह घटना घटी है, तब से स्वास्थ्य से लेकर उच्चाधिकारियों का दौरा लगा हुआ है।
इस संयुक्त टीम में डीडीओ डॉ. रामेश्वर मिश्र गोरखपुर, डीओ केके शुक्ल गोरखपुर, डॉ. मधुसुदन सिंह गोरखपुर, डीटीओ कुशीनगर डॉ. बीपी नरसरिया, मोहित सहायक लखनऊ के साथ जिले की टीम शामिल थी। इस गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप लगाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच की। बलगम के नमूने लिए।
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अमर उजाला ब्यूरो
दुदही/ बरवापट्टी। क्षेत्र के रामपुरपट्टी गांव की मुसहर बस्ती में तीन मुसहरों की मौत के बाद प्रशासनिक अमला अब पूरी तरह सक्रिय दिख रहा है। बुधवार को कमिश्नर के आदेश पर गोरखपुर व लखनऊ की संयुक्त टीम ने इस मुसहर बस्ती में पहुंचकर मृतक पंकज की मां से मिलकर उसके बारे में जानकारी ली।
पंकज की मां ने बताया कि उसे 15 दिनों से बुखार लग रहा था। उसे सीएचसी दुदही में दिखाए, जहां डॉक्टर ने जांच कर दो खुराक दवा दी और घर भेज दिया। दवा खाने के बाद बुखार ठीक नहीं हुआ। उसके बाद गौरीश्रीराम में एक झोलाछाप से दिखाया, जहां बुखार तेज होने पर झोलाछाप ने जिला अस्पताल में इलाज कराने को कहा। दो खुराक दवा लेकर घर आ गए। उसके बाद कहीं दिखाने नहीं ले गए, जिसकी वजह की पंकज की मौत हो गई। लखनऊ से आई टीम ने तीनों मृतकों के परिजनों का बयान दर्ज किया। उसके बाद गांव में दवा के छिड़काव व स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। ग्रामीणों ने बताया कि आठ वर्षों में कभी भी दवा का छिड़काव नहीं कराया गया है न ही गांव में कभी स्वास्थ्य टीम आती है। जब से यह घटना घटी है, तब से स्वास्थ्य से लेकर उच्चाधिकारियों का दौरा लगा हुआ है।
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इस संयुक्त टीम में डीडीओ डॉ. रामेश्वर मिश्र गोरखपुर, डीओ केके शुक्ल गोरखपुर, डॉ. मधुसुदन सिंह गोरखपुर, डीटीओ कुशीनगर डॉ. बीपी नरसरिया, मोहित सहायक लखनऊ के साथ जिले की टीम शामिल थी। इस गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप लगाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच की। बलगम के नमूने लिए।
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