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Kushinagar News: गांवों में एक दिन उठता है कूड़ा, रोजाना भेजा जा रहा फोटो

Mon, 31 Aug 2026 02:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Mon, 31 Aug 2026 02:11 AM IST
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Garbage in villages is collected only once a day; photos are being sent daily.
पडरौना। जिले में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर गांवों में रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) बनाए गए हैं। वर्षों बाद भी सक्रिय नहीं होने से ये कूड़ेदान बन गए हैं। जिम्मेदारों का दावा है कि हर रोज सफाई कराई जा रही है। जबकि गांव के लोगों का कहना है कि सप्ताह या पखवाड़े में एक दिन कूड़ा उठाया जाता है और उसका अलग-अलग एंगल से फोटो खींच लिया जाता है। उसे शेष दिन ग्रुप में भेजकर अफसरों को गुमराह किया जा रहा है।
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यह मामला रविवार को पड़ताल में सामने आया। नाम न छापने की शर्त पर एक गांव में तैनात सफाई कर्मचारी ने बताया कि चल रहे स्वच्छता अभियान में सिर्फ फोटो का खेल है। डीपीआरओ कार्यालय से हर दिन सफाई करते हुए फोटो की मांग की जाती है। इसलिए सप्ताह व 15 दिनों पर एक बार होने वाली सफाई के दौरान कुछ-कुछ दूरी पर अलग-अलग एंगिल का फोटो खींच लिया जाता है,जिसे हर रोज ग्रुप के माध्यम से भेज दिया जाता है। अफसरों को भी सिर्फ फोटो और हाजिरी से मतलब है। जिले में गांवों को साफ-सुथरा रखने के लिए 14 ब्लॉकों के 616 गांवों में रिसोर्स रिकवरी सेंटरों का निर्माण करोड़ों रुपये की लागत से किया गया है। इसमें पडरौना ब्लॉक क्षेत्र में 48 आरआरसी के निर्माण पर 260 लाख रुपये से रकम खर्च की गई है।
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रविवार को पड़ताल में पडरौना ब्लॉक क्षेत्र के बंगाली पट्टी ग्राम पंचायत में बनाया गया आरआरसी सक्रिय नहीं मिला। यह सेंटर लाखों रुपये की लागत से करीब ढाई साल बनकर तैयार हुआ था। इसके बाद सेंटर को सक्रिय करने के लिए जिम्मेदार भूल गए। ऐसे में गांव के लोग अपने घरों का कूड़ा गलियों व आसपास खाली पड़े स्थलों पर खुले में फेंक रहे हैं। तेज धूप व बारिश होने के बाद सड़क किनारे कूड़े की ढेर से दुर्गंध निकल रही है,जिससे बीमारियों के फैलने की आशंका बनी हुई है लेकिन जिम्मेदार इस सेंटर को सक्रिय करने के लिए कोई पहल नहीं कर रहे हैं।
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कोट:-
गांवों में उपलब्ध सफाई के संसाधनों व कर्मियों के माध्यम से हर रोज सफाई कराई जा रही है। कहीं पर कोई दिक्कत सामने आएगी तो जिम्मेदारों से जवाब-तलब किया जाएगा। लापरवाही पाए जाने पर गांवों में तैनात सफाई कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। -आलोक प्रियदर्शी,डीपीआरओ,कुशीनगर
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ग्रामीण बोले:-
गांव में वर्षों पहले आरआरसी का निर्माण कराया गया था। निर्माण के साथ लोगों को सहूलियत मिलने की उम्मीद जगी थी। लेकिन सेंटर के बनने के बाद उसे सक्रिय करने के लिए कोई आगे नहीं आया। ऐसे में गांव को स्वच्छ और साफ-सुथरा बनाए रखना के मकसद से तैयार आरआरसी धूल फांक रहा है। विभागीय अधिकारियों को इसे सक्रिय करने के लिए जरूरी कार्रवाई करना चाहिए। -अजय कुशवाहा, बंगाली पट्टी

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आरआरसी के संचालन नही होने से गांव के लोग घरों से निकले कूड़े को रास्तों के किनारे इधर-उधर फेंकने के लिए मजबूर हो रहे हैं। अगर लाखों रुपये से बना आरआरसी क्रियाशील हो जाता तो उससे गांव स्वच्छता आती। वहीं कूड़े से खाद तैयार होगी, जिससे किसान लाभान्वित होंगे। -अविनाश सिंह, बंगाली पट्टी
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