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Kushinagar News: गंडक नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू
Mon, 08 May 2023 12:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 08 May 2023 12:53 AM IST
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समय रहते एपी तटबंध और नरवाजोत बांध पर नहीं भरे जा रहे रेनकट व रैटहोल
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। कटान के लिहाज से अति संवेदनशील माने जाने वाले एपी तटबंध और नरवाजोत बांध पर हुए रेनकट व रैटहोल अभी तक भरे नहीं गए हैं। इससे क्षेत्र के लोगों में मानसून सत्र के दौरान बाढ़ आने पर गांव में पानी घुसने की आशंका सताने लगी है।
2007 में एपी बांध टूटने से करीब 40 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था। नरवाजोत एक्सटेंशन से पिपराघाट और पिपराघाट से अहिरौलीदान के बीच लगभग 21 किलोमीटर की लंबाई में गंडक नदी बहती है। इस पर बीते कई वर्षों से गंडक नदी दबाव बनाए हुए है। तटबंध का करीब आधा हिस्सा झाड़ियों से पटा है।
चैनपट्टी, घघवा जगदीश, बिरवट कोंहवलिया, बाकखास, नोनियापट्टी, अहिरौलीदान के अधिकांश किसानों का खेत भी बंधे से पास है। मानसून सत्र के पूर्व इन सभी रेनकट व रैटहोल की मरम्मत जरूरी होती है। अभी तक यह कार्य शुरू नहीं हुआ है, जबकि इस समय बाढ़ खंड से नरवाजोत में किलोमीटर 1.000 पर तीन करोड़ तीस लाख, जंगलीपट्टी में किलोमीटर 2.400 पर चार करोड़ पांच हजार, चैनपट्टी में किलोमीटर 3.300 पर चार करोड़ नब्बे लाख और बाकखास में किलोमीटर 9.600 पर दो करोड़ पैंतालिस लाख की लागत से बाढ़ बचाव कार्य चल रहा है।
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क्षेत्र के रुस्तम अली, बृजकिशोर साहनी, सीताराम निषाद आदि ने कहा कि जून के पहले पखवारे से गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने लगता है। रेनकट व रैटहोल से पानी के रिसाव का खतरा बढ़ता है।
इस संबंध में बाढ़ खंड के एसडीओ एसके प्रियदर्शी ने बताया कि ऐसे स्थानों को चिह्नित कर बांध की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय किए जा रहे हैं।
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तमकुहीरोड। कटान के लिहाज से अति संवेदनशील माने जाने वाले एपी तटबंध और नरवाजोत बांध पर हुए रेनकट व रैटहोल अभी तक भरे नहीं गए हैं। इससे क्षेत्र के लोगों में मानसून सत्र के दौरान बाढ़ आने पर गांव में पानी घुसने की आशंका सताने लगी है।
2007 में एपी बांध टूटने से करीब 40 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था। नरवाजोत एक्सटेंशन से पिपराघाट और पिपराघाट से अहिरौलीदान के बीच लगभग 21 किलोमीटर की लंबाई में गंडक नदी बहती है। इस पर बीते कई वर्षों से गंडक नदी दबाव बनाए हुए है। तटबंध का करीब आधा हिस्सा झाड़ियों से पटा है।
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चैनपट्टी, घघवा जगदीश, बिरवट कोंहवलिया, बाकखास, नोनियापट्टी, अहिरौलीदान के अधिकांश किसानों का खेत भी बंधे से पास है। मानसून सत्र के पूर्व इन सभी रेनकट व रैटहोल की मरम्मत जरूरी होती है। अभी तक यह कार्य शुरू नहीं हुआ है, जबकि इस समय बाढ़ खंड से नरवाजोत में किलोमीटर 1.000 पर तीन करोड़ तीस लाख, जंगलीपट्टी में किलोमीटर 2.400 पर चार करोड़ पांच हजार, चैनपट्टी में किलोमीटर 3.300 पर चार करोड़ नब्बे लाख और बाकखास में किलोमीटर 9.600 पर दो करोड़ पैंतालिस लाख की लागत से बाढ़ बचाव कार्य चल रहा है।
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क्षेत्र के रुस्तम अली, बृजकिशोर साहनी, सीताराम निषाद आदि ने कहा कि जून के पहले पखवारे से गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने लगता है। रेनकट व रैटहोल से पानी के रिसाव का खतरा बढ़ता है।
इस संबंध में बाढ़ खंड के एसडीओ एसके प्रियदर्शी ने बताया कि ऐसे स्थानों को चिह्नित कर बांध की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय किए जा रहे हैं।