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लोगों को फिर सताने लगी है बाढ़ की आशंका
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फिर खतरे के निशान के करीब पहुंची बड़ी गंडक
खड्डा (कुशीनगर)। गंडक नदी का बहाव ढाई लाख क्यूसेक से ऊपर पहुंचने के कारण जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। जलस्तर बढ़ने से नदी उस पार के गांवों के करीब तक नदी पहुंच गई है। लोगों को फिर से बाढ़ की आशंका सताने लगी है।
कुछ दिनों से बाढ़ से राहत महसूस कर रहे खड्डा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित लोगों की मुश्किल लगातार हो रही बारिश से बढ़ने लगी है। नेपाल की पहाड़ियों में हो रही बारिश के चलते दो जुलाई को रात एक बजे वाल्मीकिनगर बैराज से नदी में 2 लाख 64 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। हालांकि शाम चार बजे डिस्चार्ज कम होकर 2 लाख 15 हजार 100 क्यूसेक पर आ गया। डिस्चार्ज बढ़ने से भैसहां गेजस्थल पर शुक्रवार शाम चार बजे जलस्तर चेतावनी बिंदु से 40 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। यह खतरे की बिंदु 60 सेंटीमीटर नीचे है।
जलस्तर बढ़ने से गंडक नदी पार के मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर, सालिकपुर, महदेवा आदि गांवों के निचले हिस्से में नदी का पानी पहुंच है। रेता क्षेत्र के प्रधान इजहार अंसारी, आनंद कुशवाहा, नरसिंह प्रसाद, प्रधानपति हीरामन निषाद, नथुनी कुशवाहा, रामभुज आदि ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी गांव के निचले हिस्से में पहुंच गया है।
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खड्डा (कुशीनगर)। गंडक नदी का बहाव ढाई लाख क्यूसेक से ऊपर पहुंचने के कारण जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। जलस्तर बढ़ने से नदी उस पार के गांवों के करीब तक नदी पहुंच गई है। लोगों को फिर से बाढ़ की आशंका सताने लगी है।
कुछ दिनों से बाढ़ से राहत महसूस कर रहे खड्डा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित लोगों की मुश्किल लगातार हो रही बारिश से बढ़ने लगी है। नेपाल की पहाड़ियों में हो रही बारिश के चलते दो जुलाई को रात एक बजे वाल्मीकिनगर बैराज से नदी में 2 लाख 64 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। हालांकि शाम चार बजे डिस्चार्ज कम होकर 2 लाख 15 हजार 100 क्यूसेक पर आ गया। डिस्चार्ज बढ़ने से भैसहां गेजस्थल पर शुक्रवार शाम चार बजे जलस्तर चेतावनी बिंदु से 40 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। यह खतरे की बिंदु 60 सेंटीमीटर नीचे है।
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जलस्तर बढ़ने से गंडक नदी पार के मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर, सालिकपुर, महदेवा आदि गांवों के निचले हिस्से में नदी का पानी पहुंच है। रेता क्षेत्र के प्रधान इजहार अंसारी, आनंद कुशवाहा, नरसिंह प्रसाद, प्रधानपति हीरामन निषाद, नथुनी कुशवाहा, रामभुज आदि ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी गांव के निचले हिस्से में पहुंच गया है।
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