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Kushinagar News: फिर उफनाई गंडक...एक लाख क्यूसेक के पार पहुंचा पानी का डिस्चार्ज
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नरवाजोत बांध का निरीक्षण करते अभियंता। संवाद
तमकुहीरोड। गंडक नदी का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। वाल्मीकिनगर बैराज से पानी का डिस्चार्ज करीब एक सप्ताह बाद बृहस्पतिवार को एक लाख क्यूसेक के पार चला गया। इससे नदी के जलस्तर में वृद्धि शुरू हो गई है। हालांकि इस वृद्धि से बांध को कोई खतरा नहीं है। बावजूद इसके बाढ़ खंड के अभियंताओं ने एक बार फिर नरवाजोत बांध सहित एपी तटबंध की निगरानी तेज कर दी है। बृहस्पतिवार को बाढ़ खंड के एसडीओ सहित अन्य अभियंता बांध पर पहुंचे और नदी के बढ़े जलस्तर का जायजा लिया और बांध को पूरी तरह सुरक्षित बताया है।
एक सप्ताह पहले तक पिपराघाट स्थित नरवाजोत एक्सटेंशन के पास का किमी 0.500 से किमी 1.000 के बीच का पांच सौ मीटर का हिस्सा लगभग गंडक नदी की कटान के जद में था। यहां नदी कटान करती हुई न केवल बांध को काफी क्षतिग्रस्त कर दिया था, बल्कि नदी के किनारे लगभग चालीस एकड़ से अधिक भूमि पर खड़ी धान व गन्ने की फसल को भी निशाना बना लिया था। जिससे किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा था।
वही बांध को कटान से बचाने के लिए बाढ़ खंड के अभियंताओं ने काफी मशक्कत की थी। पहली सितंबर के बाद नदी के तेवर में नरमी आ गयी थी। नदी बांध से दूर होकर बहने लगी थी। यही नहीं नदी का डिस्चार्ज भी धीरे-धीरे कम होकर 65 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया था। जिससे अभियंताओं के साथ बांध के किनारे बसे नरवाजोत, मोतीराय टोला, भंगी टोला, दहारी टोला, तवकल टोला आदि गांवों के लोगों ने भी राहत की सांस ली थी।
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बृहस्पतिवार को सुबह अचानक नदी का डिस्चार्ज बढ़ कर 1.02 लाख क्यूसेक पहुंच गया। जिससे नदी के जलस्तर मामूली वृद्धि शुरू हो गई है। हालांकि नदी के जलस्तर में वृद्धि से बांध को कोई खतरा नहीं है। बावजूद इसके बाढ़ खंड सेवरही के अभियंताओं ने एक बार फिर बांध की निगरानी तेज कर दी है। बृहस्पतिवार को बाढ़ खंड के एसडीओ दीपरतन सिंह, जेई रमेशधर दुबे, जेई सुनील कुमार यादव आदि ने नरवाजोत सहित अन्य तटबंधों का जायजा लिया और बांध को पूरी तरह सुरक्षित बताया। इस संबंध में एसडीओ दीपरतन सिंह का कहना है कि बांध पूरी तरह सुरक्षित है। उसे कहीं से कोई खतरा नहीं है। एहतियात के तौर पर बांध की लगातार निगरानी की जा रही है।
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एक सप्ताह पहले तक पिपराघाट स्थित नरवाजोत एक्सटेंशन के पास का किमी 0.500 से किमी 1.000 के बीच का पांच सौ मीटर का हिस्सा लगभग गंडक नदी की कटान के जद में था। यहां नदी कटान करती हुई न केवल बांध को काफी क्षतिग्रस्त कर दिया था, बल्कि नदी के किनारे लगभग चालीस एकड़ से अधिक भूमि पर खड़ी धान व गन्ने की फसल को भी निशाना बना लिया था। जिससे किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा था।
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वही बांध को कटान से बचाने के लिए बाढ़ खंड के अभियंताओं ने काफी मशक्कत की थी। पहली सितंबर के बाद नदी के तेवर में नरमी आ गयी थी। नदी बांध से दूर होकर बहने लगी थी। यही नहीं नदी का डिस्चार्ज भी धीरे-धीरे कम होकर 65 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया था। जिससे अभियंताओं के साथ बांध के किनारे बसे नरवाजोत, मोतीराय टोला, भंगी टोला, दहारी टोला, तवकल टोला आदि गांवों के लोगों ने भी राहत की सांस ली थी।
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बृहस्पतिवार को सुबह अचानक नदी का डिस्चार्ज बढ़ कर 1.02 लाख क्यूसेक पहुंच गया। जिससे नदी के जलस्तर मामूली वृद्धि शुरू हो गई है। हालांकि नदी के जलस्तर में वृद्धि से बांध को कोई खतरा नहीं है। बावजूद इसके बाढ़ खंड सेवरही के अभियंताओं ने एक बार फिर बांध की निगरानी तेज कर दी है। बृहस्पतिवार को बाढ़ खंड के एसडीओ दीपरतन सिंह, जेई रमेशधर दुबे, जेई सुनील कुमार यादव आदि ने नरवाजोत सहित अन्य तटबंधों का जायजा लिया और बांध को पूरी तरह सुरक्षित बताया। इस संबंध में एसडीओ दीपरतन सिंह का कहना है कि बांध पूरी तरह सुरक्षित है। उसे कहीं से कोई खतरा नहीं है। एहतियात के तौर पर बांध की लगातार निगरानी की जा रही है।