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प्रधान व पति के खिलाफ धोखाधड़ी का केस, जांच शुरू
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प्रधान व पति के खिलाफ धोखाधड़ी का केस, जांच शुरू
अनुसूचित जनजाति महिला कोटे से चुनी गई थीं ग्राम प्रधान
तमकुहीरोड (कुशीनगर)। अहिरौलीदान से 2021 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अनुसूचित जनजाति महिला कोटे से चुनी गईं ग्राम प्रधान व उनके पति के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ है। यह मुकदमा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुशीनगर के निर्देश पर पुलिस ने दर्ज किया है। इनके ऊपर फर्जी तरीके से प्रमाणपत्र बनवाने का आरोप है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
सेवरही ब्लॉक के ग्राम सभा अहिरौलीदान में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान पद के लिए अनुसूचित जनजाति महिला कोटे से मीना देवी पत्नी प्रमोद गोंड निर्वाचित हुई थीं। बाद में अहिरौलीदान ग्राम सभा के मिथलेश कुमार ने उनके खिलाफ शिकायत की थी। उनका आरोप था कि तथ्य छिपाकर अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र देवरिया सदर से बनवाया गया है और उसका इस्तेमाल 2021 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में किया गया। उन्होंने उच्चाधिकारियों से कार्रवाई की मांग की थी।
मामले में कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में वाद दाखिल कर दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि आरोपित महिला पहले तमकुहीराज तहसील से बनवाए गए अनुसूचित जाति के प्रमाणपत्र के आधार पर 2005 से 2010 तक अनुसूचित जाति के कोटे से आरक्षित ग्राम पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। उसके बाद 2021 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जब अहिरौलीदान ग्रामसभा का प्रधान पद अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षित हो गया तो उन्होंने वहां से भी दावेदारी प्रस्तुत कर दी। आरोप है कि पति की सह पर तथ्यों को छिपाकर फर्जी ढंग से अपने मायके ग्राम महुअवा बुजुर्ग तहसील देवरिया सदर से अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र बनवा लिया। इसका इस्तेमाल उन्होंने 2021 में हुए पंचायत चुनाव में किया था।
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न्यायालय के आदेश पर तरयासुजान थाने की पुलिस ने शनिवार शाम महिला ग्राम प्रधान और पति के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य मामलों में केस दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस संबंध में तरयासुजान थाने के एसओ कपिलदेव चौधरी ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर केस दर्ज किया गया है। इस मामले की निष्पक्ष जांच कर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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अनुसूचित जनजाति महिला कोटे से चुनी गई थीं ग्राम प्रधान
तमकुहीरोड (कुशीनगर)। अहिरौलीदान से 2021 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अनुसूचित जनजाति महिला कोटे से चुनी गईं ग्राम प्रधान व उनके पति के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ है। यह मुकदमा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुशीनगर के निर्देश पर पुलिस ने दर्ज किया है। इनके ऊपर फर्जी तरीके से प्रमाणपत्र बनवाने का आरोप है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
सेवरही ब्लॉक के ग्राम सभा अहिरौलीदान में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान पद के लिए अनुसूचित जनजाति महिला कोटे से मीना देवी पत्नी प्रमोद गोंड निर्वाचित हुई थीं। बाद में अहिरौलीदान ग्राम सभा के मिथलेश कुमार ने उनके खिलाफ शिकायत की थी। उनका आरोप था कि तथ्य छिपाकर अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र देवरिया सदर से बनवाया गया है और उसका इस्तेमाल 2021 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में किया गया। उन्होंने उच्चाधिकारियों से कार्रवाई की मांग की थी।
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मामले में कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में वाद दाखिल कर दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि आरोपित महिला पहले तमकुहीराज तहसील से बनवाए गए अनुसूचित जाति के प्रमाणपत्र के आधार पर 2005 से 2010 तक अनुसूचित जाति के कोटे से आरक्षित ग्राम पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। उसके बाद 2021 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जब अहिरौलीदान ग्रामसभा का प्रधान पद अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षित हो गया तो उन्होंने वहां से भी दावेदारी प्रस्तुत कर दी। आरोप है कि पति की सह पर तथ्यों को छिपाकर फर्जी ढंग से अपने मायके ग्राम महुअवा बुजुर्ग तहसील देवरिया सदर से अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र बनवा लिया। इसका इस्तेमाल उन्होंने 2021 में हुए पंचायत चुनाव में किया था।
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न्यायालय के आदेश पर तरयासुजान थाने की पुलिस ने शनिवार शाम महिला ग्राम प्रधान और पति के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य मामलों में केस दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस संबंध में तरयासुजान थाने के एसओ कपिलदेव चौधरी ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर केस दर्ज किया गया है। इस मामले की निष्पक्ष जांच कर विधिक कार्रवाई की जाएगी।