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35 लाख की आबादी पर सिर्फ चार एएलएस एंबुलेंस
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जिला अस्पताल में खड़ी एएलएस युक्त एम्बुलेंस। संवाद।
- फोटो : KUSHINAGAR
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35 लाख की आबादी पर सिर्फ चार एएलएस एंबुलेंस
- कोरोना महामारी की पहली और दूसरी लहर में रही इनकी महत्वपूर्ण भूमिका
- आईसीयू युक्त यह एंबुलेंस गंभीर मरीजों की जान बचाने में होती हैं मददगार
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। कोरोना महामारी की पहली और दूसरी लहर में कोविड-19 के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट) एंबुलेंस की संख्या में अब तक बढ़ोतरी नहीं हो पाई है। 35 लाख की आबादी पर सिर्फ चार एएलएस एंबुलेंस ही जिले में उपलब्ध हैं। ऐसे में कोविड-19 संक्रमण की जिस तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है, उसके उत्पन्न होने की स्थिति को संभालना बहुत ही चुनौतीपूर्ण होगा।
करीब 35 लाख की आबादी वाले कुशीनगर जनपद में सिर्फ चार एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस ही उपलब्ध हैं। कोरोना महामारी की पहली और दूसरी लहर में इस एंबुलेंस ने कई मरीजों की जान बचाई थी। चूंकि इस एंबुलेंस में आईसीयू की सुविधा होती है, इसलिए यह सांस संबंधी रोगों में काफी मददगार होती है। इसी लिहाज से यह कोविड-19 संक्रमण के दौर में काफी मददगार साबित हुई थी। इसके बावजूद एएलएस की उपयोगिता को देखते हुए इनकी संख्या में इजाफा नहीं हो पाया है।
कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों को देखते हुए कुशीनगर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में रात्रि कालीन कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। इस महामारी के संक्रमण का खतरा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि तीसरी लहर आई तो सीमित संसाधन में व्यवस्था कहीं बेपटरी न हो जाए।
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एएलएस की विशेषता
एएलएस एंबुलेंस एक आईसीयू की तरह होती है। इसमें गंभीर मरीजों के लिए हर सुविधा मौजूद रहती है। यदि किसी गंभीर मरीज को रेफर किया जाता है तो देश के किसी भी अस्पताल में सुरक्षित ले जाने का काम यह एंबुलेंस करती है। इसमें सभी जीवन रक्षक उपकरण होते हैं। आकस्मिक स्थिति के समय जरूरी दवाओं, वेंटीलेटर, डिफिब्रिलेटर सहित अन्य उपकरणों की सुविधा भी इस एंबुलेंस में होती है। हालांकि कुशीनगर में सिर्फ चार एएलएस एंबुुलेंस ही उपलब्ध है, जिन्हें जिला अस्पताल से रेफर मरीजों के लिए यहां रखा गया है। इन एंबुलेंस का रिस्पांस समय 15 मिनट का होता है।
अन्य 34 एंबुलेंस होते हैं संचालित
एएलएस के अलावा 108 और 102 नंबर के भी एंबुलेंस संचालित होते हैं। हालांकि इनमें आईसीयू वाली सुविधा नहीं होती है। इस तरह के कुल 34 एंबुलेंस संचालित होते हैं।
जिले में सिर्फ चार एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम एंबुलेंस हैं। इन्हें जिला अस्पताल पर रखा जाता है। वहां से रेफर होने वाले मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर करने पर इन एंबुलेंस को लगाया जाता है। कोरोना संक्रमण काल में इन एंबुलेंस का उपयोग अधिक रहा। अभी इनकी संख्या नहीं बढ़ी है। अन्य एंबुलेंस 34 हैं।
- डॉ. सुरेश पटारिया, सीएमओ
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- कोरोना महामारी की पहली और दूसरी लहर में रही इनकी महत्वपूर्ण भूमिका
- आईसीयू युक्त यह एंबुलेंस गंभीर मरीजों की जान बचाने में होती हैं मददगार
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। कोरोना महामारी की पहली और दूसरी लहर में कोविड-19 के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट) एंबुलेंस की संख्या में अब तक बढ़ोतरी नहीं हो पाई है। 35 लाख की आबादी पर सिर्फ चार एएलएस एंबुलेंस ही जिले में उपलब्ध हैं। ऐसे में कोविड-19 संक्रमण की जिस तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है, उसके उत्पन्न होने की स्थिति को संभालना बहुत ही चुनौतीपूर्ण होगा।
करीब 35 लाख की आबादी वाले कुशीनगर जनपद में सिर्फ चार एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस ही उपलब्ध हैं। कोरोना महामारी की पहली और दूसरी लहर में इस एंबुलेंस ने कई मरीजों की जान बचाई थी। चूंकि इस एंबुलेंस में आईसीयू की सुविधा होती है, इसलिए यह सांस संबंधी रोगों में काफी मददगार होती है। इसी लिहाज से यह कोविड-19 संक्रमण के दौर में काफी मददगार साबित हुई थी। इसके बावजूद एएलएस की उपयोगिता को देखते हुए इनकी संख्या में इजाफा नहीं हो पाया है।
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कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों को देखते हुए कुशीनगर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में रात्रि कालीन कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। इस महामारी के संक्रमण का खतरा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि तीसरी लहर आई तो सीमित संसाधन में व्यवस्था कहीं बेपटरी न हो जाए।
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एएलएस की विशेषता
एएलएस एंबुलेंस एक आईसीयू की तरह होती है। इसमें गंभीर मरीजों के लिए हर सुविधा मौजूद रहती है। यदि किसी गंभीर मरीज को रेफर किया जाता है तो देश के किसी भी अस्पताल में सुरक्षित ले जाने का काम यह एंबुलेंस करती है। इसमें सभी जीवन रक्षक उपकरण होते हैं। आकस्मिक स्थिति के समय जरूरी दवाओं, वेंटीलेटर, डिफिब्रिलेटर सहित अन्य उपकरणों की सुविधा भी इस एंबुलेंस में होती है। हालांकि कुशीनगर में सिर्फ चार एएलएस एंबुुलेंस ही उपलब्ध है, जिन्हें जिला अस्पताल से रेफर मरीजों के लिए यहां रखा गया है। इन एंबुलेंस का रिस्पांस समय 15 मिनट का होता है।
अन्य 34 एंबुलेंस होते हैं संचालित
एएलएस के अलावा 108 और 102 नंबर के भी एंबुलेंस संचालित होते हैं। हालांकि इनमें आईसीयू वाली सुविधा नहीं होती है। इस तरह के कुल 34 एंबुलेंस संचालित होते हैं।
जिले में सिर्फ चार एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम एंबुलेंस हैं। इन्हें जिला अस्पताल पर रखा जाता है। वहां से रेफर होने वाले मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर करने पर इन एंबुलेंस को लगाया जाता है। कोरोना संक्रमण काल में इन एंबुलेंस का उपयोग अधिक रहा। अभी इनकी संख्या नहीं बढ़ी है। अन्य एंबुलेंस 34 हैं।
- डॉ. सुरेश पटारिया, सीएमओ