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Kushinagar News: विदेशी पर्यटकों ने तथागत के दर्शन कर की विश्व शांति की कामना
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महापरिनिर्वाण मंदिर में चीवर चढ़ाकर की पूजा-अर्चना, भंते अशोक ने बताया करुणा और मैत्री का महत्व
कसया। म्यांमार, थाईलैंड, वियतनाम और श्रीलंका से आए बौद्ध पर्यटकों ने महापरिनिर्वाण मंदिर में तथागत की लेटी प्रतिमा का दर्शन-पूजन कर विश्व शांति और जनकल्याण की कामना की। पर्यटकों ने चीवर चढ़ाया और ऐतिहासिक बौद्ध स्थलों का भ्रमण कर उनके धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी ली।
विदेशी पर्यटकों का दल मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर पहुंचा। यहां भंते अशोक और भंते मुलायम सहित अन्य भिक्षुओं की धम्म वंदना के बीच पर्यटकों ने छठवीं सदी की बुद्ध की लेटी प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना की। इसके बाद स्तूप की परिक्रमा कर परिसर में स्थित पुरातात्विक भग्नावशेषों का अवलोकन किया। इस दौरान भंते अशोक ने बुद्ध की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि करुणा और मैत्री के उपदेशों का अनुसरण करने से ही मानव जीवन का कल्याण संभव है।
बुद्ध के संदेश आज भी विश्व शांति और आपसी सद्भाव के लिए प्रासंगिक हैं। महापरिनिर्वाण मंदिर में दर्शन के बाद पर्यटक मुकुट बंधन चैत्य और माथा कुंवर मंदिर पहुंचे। गाइड ने पर्यटकों को बुद्ध के अंतिम उपदेश, महापरिनिर्वाण और अंत्येष्टि स्थल से जुड़ी जानकारी दी। मुकुट बंधन चैत्य यानी रामाभार स्तूप के ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराया। बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनके अवशेषों के बंटवारे को लेकर आठ महाजनपदों के बीच विवाद हुआ था। बाद में समझौते के तहत अवशेषों का विभाजन किया गया। म्यांमार, थाईलैंड, वियतनाम और श्रीलंका से आए पर्यटकों ने तथागत के दर्शन-पूजन के साथ कुशीनगर की ऐतिहासिक विरासत को करीब से जाना।
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कसया। म्यांमार, थाईलैंड, वियतनाम और श्रीलंका से आए बौद्ध पर्यटकों ने महापरिनिर्वाण मंदिर में तथागत की लेटी प्रतिमा का दर्शन-पूजन कर विश्व शांति और जनकल्याण की कामना की। पर्यटकों ने चीवर चढ़ाया और ऐतिहासिक बौद्ध स्थलों का भ्रमण कर उनके धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी ली।
विदेशी पर्यटकों का दल मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर पहुंचा। यहां भंते अशोक और भंते मुलायम सहित अन्य भिक्षुओं की धम्म वंदना के बीच पर्यटकों ने छठवीं सदी की बुद्ध की लेटी प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना की। इसके बाद स्तूप की परिक्रमा कर परिसर में स्थित पुरातात्विक भग्नावशेषों का अवलोकन किया। इस दौरान भंते अशोक ने बुद्ध की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि करुणा और मैत्री के उपदेशों का अनुसरण करने से ही मानव जीवन का कल्याण संभव है।
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बुद्ध के संदेश आज भी विश्व शांति और आपसी सद्भाव के लिए प्रासंगिक हैं। महापरिनिर्वाण मंदिर में दर्शन के बाद पर्यटक मुकुट बंधन चैत्य और माथा कुंवर मंदिर पहुंचे। गाइड ने पर्यटकों को बुद्ध के अंतिम उपदेश, महापरिनिर्वाण और अंत्येष्टि स्थल से जुड़ी जानकारी दी। मुकुट बंधन चैत्य यानी रामाभार स्तूप के ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराया। बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनके अवशेषों के बंटवारे को लेकर आठ महाजनपदों के बीच विवाद हुआ था। बाद में समझौते के तहत अवशेषों का विभाजन किया गया। म्यांमार, थाईलैंड, वियतनाम और श्रीलंका से आए पर्यटकों ने तथागत के दर्शन-पूजन के साथ कुशीनगर की ऐतिहासिक विरासत को करीब से जाना।
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