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खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंडक नदी

Fri, 07 Oct 2022 11:27 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 07 Oct 2022 11:27 PM IST
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flood in khadda area
खड्डा क्षेत्र के महदेवा गांव से सटे विहार के कांटी टोला गांव में भी बाढ़ का प्रकोप,भोजन के लिए जद्? - फोटो : KUSHINAGAR
खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंडक नदी
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- 40 हजार की आबादी बाढ़ की चपेट में
- शिवपुर चौकी में घुसा बाढ़ का पानी, सैकड़ों घर घिरे
- वाल्मीकि नगर बैराज से लगातार छोड़ा जा रहा पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। नेपाल में हो रही बारिश से गंडक नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। नदी खतरे के निशान से 30 सेमी ऊपर बह रही है। खड्डा क्षेत्र के सात गांवों के करीब 40 हजार आबादी बाढ़ की चपेट में आ गई है। शिवपुर चौकी में बाढ़ का पानी घुस गया है। गांवों में जलभराव से लोगों के घरों रखा सामान डूब चुका है। स्कूलों में पानी पहुंचने से छुट्टी कर दी गई है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जिला प्रशासन की तरफ से राहत और बचाव का काम शुरू कर दिया गया है। कम्यूनिटी किचन शुरू कराकर बाढ़ प्रभावित स्थानों पर भोजन के पैकेट वितरित कराए जा रहे हैं। जीवन रक्षक दवाओं सहित अन्य सामग्री लेकर टीम बंधों पर मौजूद है।
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डीएम एस. राजलिंगम ने बताया कि बाढ़ को देखते हुए 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। प्रभावित इलाकों में पुलिस-प्रशासन की टीम लगाकर राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
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खड्डा प्रतिनिधि के अनुसार नेपाल में रही बारिश का असर गंडक में नजर आने लगा है। शुक्रवार की दोपहर 12 बजे वाल्मीकि नगर बैराज से गंडक नदी में 4,45,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे खड्डा क्षेत्र के भैंसहा गेज स्थल पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान 96.00 मीटर से 30 सेमी बढ़कर 96.30 मीटर पर पहुंच गया।
जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र के मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर, सालिकपुर, महदेवा आदि गांवों में जलभराव हो गया है। शिवपुर पुलिस चौकी सहित कई लोगों के मकान डूब गए हैं। सात गांवों की करीब 40 हजार आबादी बाढ़ की चपेट में आ गई है।
लोगों में रखे हुए सामानों सुरक्षित करते हुए पशुओं के लिए चारा का उपाय तलाश रहे हैं। खेतों में लगी फसलों पर भी संकट आ गया है। गंडक में बाढ़ से खड्डा क्षेत्र के पांच गांव और महराजगंज जनपद के निचलौल तहसील के सोहगीबरवा सहित सात गांव सड़क मार्ग से कट गए हैं। एक गांव से दूसरे गांव जाने के लिए ग्रामीणों को नाव का प्रयोग करना पड़ रहा है।
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वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व जंगल से आ-जा रहे हैं लोग
बाढ़ प्रभावित मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर आदि गांव तक पहुंचने के लिए लोग वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व जंगल से होकर आवागमन कर रहे हैं। बिहार के नौरंगिया तक जैसे-तैसे सड़क मार्ग से लोगों की आवाजाही हो रही है। शुक्रवार को नायब तहसीलदार खड्डा रवि यादव की टीम इसी रास्ते से राहत सामग्री लेकर गांवों में गई। जंगल के भीतर चार किलोमीटर तक छोटी नावों से सफर करके प्रभावित लोगों को भोजन के पैकेट दिए गए। मिट्टी के तेल के अभाव में लोग रोशनी का प्रबंध नहीं कर पा रहे हैं। नायब तहसीलदार रवि यादव ने बताया कि ऊंचे स्थानों पर कम्यूनिटी किचन शुरू किया गया है। इसी जगह पर भोजन का पैकेट तैयार कराकर लोगों के बीच बांटा जा रहा है।
बांसी नदी के पानी से घिरे कई गांव
तमकुही रोड। गंडक नदी में पानी छोड़ने का असर नजर आ रहा है। इससे पिपराघाट के कई गांव प्रभावित हुए हैं। गांव में जाने वाली सड़कें डूब चुकी हैं। घुटने भर से अधिक पानी में लोग आवागमन कर रहे हैं।
गंडक में उफान से बांसी नदी का जलस्तर बढ़ गया है। इससे उपाध्याय टोला, देवनारायण टोला, भंगी टोला, हनुमान टोला, मोतीराय टोला,शिव टोला आदि गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है। क्षेत्र के जोगनी, रानीगंज,नरवा टोला, बुटन टोला, दहारी टोला, तीनटोलियां, इमिलिया टोला, चौकी टोला, तवकल टोला, नरवाजोत सहित अन्य कई गांव भी घिर गए हैं। खेतों में लगी अधिकांश गन्ने और धान फसलें डूब गई हैं। मवेशियों के सामने हरे चारे का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ की वजह से शिव टोला, इमिलिया टोला, देवनारायण टोला, उपाध्याय टोला, हनुमान टोला जाने वाली सड़क भी डूब गई है।
गांव के क्षेत्र पंचायत सदस्य सरल शर्मा, पुजारी सिंह, ध्रुव निषाद, पन्नालाल यादव, रामायन राय, प्रभुनाथ यादव,शिवजी रजक,प्रदीप तिवारी,आदित्य यादव सहित अन्य लोगों का कहना है कि बृहस्पतिवार को जो पानी को गंडक में छोड़ा गया था। शुक्रवार को छोड़ गए पानी का असर इस क्षेत्र में शनिवार को नजर आएगा। नदी का जलस्तर बढ़ने से बंधों पर इसका असर पड़ सकता है।
नरवाजोत, दहारी टोला, तवकल टोला, जंगलीपट्टी, बिनटोली, घघवा जगदीश, जवही दयाल, चैनपट्टी, विरवट कोन्हवलिया, बाक खाश, बाघाचौर, नोनियापट्टी, कचहरी टोला और डीह टोला में एपी बांध से नदी टकराने लगी है।
जिला पंचायत सदस्य शर्मा यादव, पुजारी सिंह, बृजकिशोर साहनी, संजय सिंह,पप्पू सिंह,ध्रुव निषाद, प्रदीप सिंह आदि का कहना है कि लगातार पानी छोड़े जाने से एक बार फिर से बांध पर खतरा बढ़ गया है।
इस संबंध में तमकुहीराज के एसडीएम ब्यास नारायण उमराव ने बताया कि राजस्वकर्मियों को मुस्तैद कर दिया गया है। बंधों की निगरानी के लिए बाढ़ खंड के अभियंता और कर्मचारी पेट्रोलिंग कर रहे हैं।

कोट
गंडक नदी के जलस्तर को देखते हुए सभी अधिकारियों को सजग कर दिया गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है। कम्यूनिटी किचन शुरू कराकर लोगों को बीच भोजन के पैकेट पहुंचाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम को दवा इत्यादि का वितरण कराने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस-प्रशासन की टीमें मुस्तैद कर दी गई हैं।
- एस. राजलिंगम, डीएम, कुशीनगर
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