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Kushinagar News: नरवाजोत बंधे पर कटान तेज, जिम्मेदारों के उड़े होश
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नरवाजोत में फसलो को काटती गंडक नदी।संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर/ तमकुहीरोड। नदी में पानी का उतार-चढ़ाव बढ़ने के साथ नरवाजोत बंधे पर कटान तेज हो गई है। नदी के रौद्र रूप से बाढ़ खंड के अभियंताओं के साथ लोगों में हड़कंप है, क्योंकि डिस्चार्ज कम होने के बाद भी नदी ने बंधे का करीब 400 मीटर हिस्स कटान की जद में ले लिया है, जबकि कई जगह नदी बंधे के स्लोब के अंदर कटान करने लगी है।
खतरे को देखते हुए बाढ़ खंड विभाग सभी जगहों पर बोल्डर डंपिंग का कार्य तेज कर बांध सुरक्षित करने की कोशिशों में जुटा है, जबकि कटान की जद में आई कई किसानों के फसल लगे खेत धारा में विलीन हो चुके हैं। लोगों का कहना है कि यदि बंधे को क्षति पहुंचती है तो कई गांवों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
सेवरही क्षेत्र में नरवाजोत एक्सटेंशन से अहिरौलीदान तक साढ़े सत्रह किलोमीटर की लंबाई में गंडक नदी बहती है। जो बंधे के किनारे बसे गांवों की लगभग 20 हजार आबादी के लिए सुरक्षा कवच के समान है, जबकि यह नदी अपनी धारा बदलने के लिए जानी जाती है। तीन माह से नरवाजोत, जवही दयाल, मुसहर बस्ती और विरवट कोन्हवलिया में शासन की ओर से स्वीकृत लगभग 72 करोड़ के लागत वाली परियोजना का कार्य जारी है।
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यही नहीं नरवाजोत को छोड़ कर शेष सभी परियोजना के कार्य बाढ़ खंड की ओर से पूरे भी कराए जा चुके हैं, जबकि नदी का डिस्चार्ज डेढ़ लाख क्यूसेक से अधिक होने पर भी कहीं कटान की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई थी, लेकिन शनिवार की शाम से नदी का तेवर ही बदल गया और नदी बैक रोलिंग करती हुई फसल लगी खेतों को काटते हुए नरवाजोत बांध पर किमी 0.600 से किमी 1.000 के बीच लगभग 400 मीटर को कटान की जद में ले ली है। नदी के तेवर को देखते हुए राजस्व कर्मियों के साथ बाढ़ खंड के एसडीओ दीपरतन सिंह, जेई रमेशधर दुबे, जेई सुनील कुमार यादव, राजस्व निरीक्षक जयंत गुप्ता सहित सभी अभियंता रविवार को देर रात तक बांध पर डेरा डाले रहे।
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कुशीनगर/ तमकुहीरोड। नदी में पानी का उतार-चढ़ाव बढ़ने के साथ नरवाजोत बंधे पर कटान तेज हो गई है। नदी के रौद्र रूप से बाढ़ खंड के अभियंताओं के साथ लोगों में हड़कंप है, क्योंकि डिस्चार्ज कम होने के बाद भी नदी ने बंधे का करीब 400 मीटर हिस्स कटान की जद में ले लिया है, जबकि कई जगह नदी बंधे के स्लोब के अंदर कटान करने लगी है।
खतरे को देखते हुए बाढ़ खंड विभाग सभी जगहों पर बोल्डर डंपिंग का कार्य तेज कर बांध सुरक्षित करने की कोशिशों में जुटा है, जबकि कटान की जद में आई कई किसानों के फसल लगे खेत धारा में विलीन हो चुके हैं। लोगों का कहना है कि यदि बंधे को क्षति पहुंचती है तो कई गांवों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
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सेवरही क्षेत्र में नरवाजोत एक्सटेंशन से अहिरौलीदान तक साढ़े सत्रह किलोमीटर की लंबाई में गंडक नदी बहती है। जो बंधे के किनारे बसे गांवों की लगभग 20 हजार आबादी के लिए सुरक्षा कवच के समान है, जबकि यह नदी अपनी धारा बदलने के लिए जानी जाती है। तीन माह से नरवाजोत, जवही दयाल, मुसहर बस्ती और विरवट कोन्हवलिया में शासन की ओर से स्वीकृत लगभग 72 करोड़ के लागत वाली परियोजना का कार्य जारी है।
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यही नहीं नरवाजोत को छोड़ कर शेष सभी परियोजना के कार्य बाढ़ खंड की ओर से पूरे भी कराए जा चुके हैं, जबकि नदी का डिस्चार्ज डेढ़ लाख क्यूसेक से अधिक होने पर भी कहीं कटान की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई थी, लेकिन शनिवार की शाम से नदी का तेवर ही बदल गया और नदी बैक रोलिंग करती हुई फसल लगी खेतों को काटते हुए नरवाजोत बांध पर किमी 0.600 से किमी 1.000 के बीच लगभग 400 मीटर को कटान की जद में ले ली है। नदी के तेवर को देखते हुए राजस्व कर्मियों के साथ बाढ़ खंड के एसडीओ दीपरतन सिंह, जेई रमेशधर दुबे, जेई सुनील कुमार यादव, राजस्व निरीक्षक जयंत गुप्ता सहित सभी अभियंता रविवार को देर रात तक बांध पर डेरा डाले रहे।