फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kushinagar News ›   Efforts toward permanent flood protection: Computer models to be used to understand the behavior of the Gandak River.

Kushinagar News: बाढ़ से स्थायी बचाव की कवायद, कंप्यूटर मॉडल से समझेंगे गंडक की चाल

Mon, 26 Oct 2026 01:08 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 26 Oct 2026 01:08 AM IST
विज्ञापन
Efforts toward permanent flood protection: Computer models to be used to understand the behavior of the Gandak River.
कुशीनगर। एपी बांध टूटने से तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के करीब 30 गांवों में मची तबाही की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी समाधान की तलाश तेज हो गई है। नारायणी (गंडक) नदी की धारा को नियंत्रित करने और तटबंधों को सुरक्षित रखने के लिए चेनलाइजेशन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
विज्ञापन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इसके लिए तकनीकी अध्ययन कराया जा रहा है। रविवार को आईआईटी बीएचयू के प्रोफेसर डॉ. एके पांडेय ने एपी बांध का निरीक्षण किया और नदी की भौगोलिक स्थिति का जायजा लिया। वह कंप्यूटर आधारित न्यूमेरिकल स्टडी के माध्यम से नदी के व्यवहार का विश्लेषण कर सरकार को प्रस्ताव सौंपेंगे।
विज्ञापन

नेपाल में तबाही के बाद नारायणी नदी में 5.50 लाख क्यूसेक से अधिक पानी पहुंचने पर 28 सितंबर की रात गौरहा गांव के पास एपी बांध टूट गया था। इससे तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के करीब 30 गांवों में बाढ़ से तबाही मची थी। इसके बाद 28 सितंबर को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थायी समाधान का आश्वासन देते हुए नदी के चेनलाइजेशन की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रोफेसर डॉ. एके पांडेय के अनुसार, गंडक जैसी विशाल नदी की धारा को नियंत्रित करने और तटबंधों को सुरक्षित रखने के लिए केवल मौके पर निरीक्षण करना पर्याप्त नहीं है। नदी के बहाव, जलस्तर, कटान और गाद के जमाव का वैज्ञानिक विश्लेषण भी जरूरी है। इसके लिए न्यूमेरिकल स्टडी यानी कंप्यूटर आधारित गणितीय मॉडलिंग की मदद ली जा सकती है।

इस अध्ययन में नदी की चौड़ाई, गहराई, बहाव की गति और जलस्तर से जुड़े आंकड़ों के आधार पर अलग-अलग परिस्थितियों में नदी के व्यवहार का आकलन किया जाएगा। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि तेज बहाव के दौरान किन स्थानों पर तटबंधों पर अधिक दबाव पड़ता है, कहां कटान की आशंका है और नदी की धारा किस दिशा में बदल सकती है।
इसके साथ ही नदी के साथ बहकर आने वाली मिट्टी और गाद के जमाव का अध्ययन कर भविष्य में धारा में होने वाले बदलावों का भी आकलन किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed