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Kushinagar News: गंडक की धारा मोड़ने की कवायद तेज, शासन को भेजी जाएगी विशेषज्ञों की रिपोर्ट
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गंडक में सिल्ट ड्रेजिंग तैयारी तेज, बांध सुरक्षा पर सरकार गंभीर
तमकुहीरोड। अहिरौलीदान स्थित गंडक नदी में जमा सिल्ट निकालने की तैयारी आठ साल बाद फिर शुरू हो गई है। शासन के निर्देश पर एक सप्ताह में लखनऊ और वाराणसी की विशेषज्ञ टीमों ने नदी का जायजा लिया है। 2018 में कानपुर की एक टीम ने नारायणी नदी से सिल्ट निकाला था। उम्मीद है कि इससे नदी की धारा मोड़ने में सफलता मिलेगी।
गंडक नदी नरवाजोत से अहिरौलीदान तक करीब साढ़े 17 किलोमीटर की लंबाई में बहती है। जानकारों के अनुसार, नदी बार-बार अपनी दिशा और भौगोलिक स्थिति बदलती रहती है। एक दशक पहले यह एपी बांध से कहीं तीन तो कहीं पांच किलोमीटर दूर बहती थी। नदी की धारा में बदलाव के कारण अहिरौलीदान के कंचन टोला, बैरिया टोला, चित्तु टोला और एकरी टोला समेत कई गांव कटान की भेंट चढ़ गए। इसी तरह पिपराघाट के गोवर्धन टोला, फल टोला और नान्हु टोला का अस्तित्व भी नदी में समा गया।
कटान की समस्या को देखते हुए शासन ने वर्ष 2018 में नदी की सिल्ट निकालने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद कानपुर से आई टीम ने बड़ी मशीनों की मदद से कई महीने तक नदी में जमा सिल्ट निकाला था। इस काम से नदी की धारा को बीच की ओर मोड़ने में मदद मिली थी। इससे बांध के किनारों पर कटान का खतरा कम हुआ और आसपास के लोगों को राहत मिली थी। अब आठ साल बाद एक बार फिर सिल्ट निकालने की तैयारी शुरू हुई है।
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मुख्यमंत्री के निर्देश पर विशेषज्ञ टीमों ने किया निरीक्षण
इस साल 28 सितंबर को जवही दयाल के पास एपी बांध टूट गया था। नदी में साढ़े पांच लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से क्षेत्र में भारी तबाही हुई थी। इसके बाद हवाई सर्वेक्षण के लिए पहुंचे मुख्यमंत्री ने नदी के बहाव को संतुलित करने का निर्देश दिया था। इसके क्रम में 17 अक्तूबर को लखनऊ से विजय कुमार के नेतृत्व में मैकेनिकल टीम ने नदी का निरीक्षण किया। इसके एक सप्ताह बाद 25 अक्तूबर को वाराणसी से केके पांडेय के नेतृत्व में दूसरी टीम पहुंची। इस टीम ने बाढ़ खंड के अधीक्षण अभियंता रमेश प्रसाद, अधिशासी अभियंता विनोद कुमार वर्मा और सहायक अभियंता दीपरतन सिंह समेत अन्य अभियंताओं के साथ रविवार को नदी का जायजा लिया।
शासन को भेजी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट
निरीक्षण के बाद वाराणसी की टीम ने विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजने की बात कही है। इसके आधार पर सिल्ट निकालने की आगे की प्रक्रिया तय होने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों को आशा है कि इस बार नदी की धारा को नियंत्रित करने में सफलता मिलेगी और बांध के आसपास कटान का खतरा कम होगा। हालांकि बांध के किनारे बसे गांवों के लोगों का कहना है कि केवल तकनीकी उपाय पर्याप्त नहीं हैं। बांध की सुरक्षा के लिए उसके उच्चीकरण और चौड़ीकरण पर भी ध्यान देना जरूरी है। ग्रामीणों के अनुसार, बांध काफी जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। ऐसे में उसकी मजबूती के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
वर्जन
शासन के निर्देश पर बीएचयू प्रोफेसर ने एपी बांध का निरीक्षण किया है। उनके द्वारा सिल्ट निकालने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को रिपोर्ट भेजा जाएगा। शासन से प्राप्त निर्देश के क्रम में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- विनोद कुमार वर्मा, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड, कुशीनगर
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तमकुहीरोड। अहिरौलीदान स्थित गंडक नदी में जमा सिल्ट निकालने की तैयारी आठ साल बाद फिर शुरू हो गई है। शासन के निर्देश पर एक सप्ताह में लखनऊ और वाराणसी की विशेषज्ञ टीमों ने नदी का जायजा लिया है। 2018 में कानपुर की एक टीम ने नारायणी नदी से सिल्ट निकाला था। उम्मीद है कि इससे नदी की धारा मोड़ने में सफलता मिलेगी।
गंडक नदी नरवाजोत से अहिरौलीदान तक करीब साढ़े 17 किलोमीटर की लंबाई में बहती है। जानकारों के अनुसार, नदी बार-बार अपनी दिशा और भौगोलिक स्थिति बदलती रहती है। एक दशक पहले यह एपी बांध से कहीं तीन तो कहीं पांच किलोमीटर दूर बहती थी। नदी की धारा में बदलाव के कारण अहिरौलीदान के कंचन टोला, बैरिया टोला, चित्तु टोला और एकरी टोला समेत कई गांव कटान की भेंट चढ़ गए। इसी तरह पिपराघाट के गोवर्धन टोला, फल टोला और नान्हु टोला का अस्तित्व भी नदी में समा गया।
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कटान की समस्या को देखते हुए शासन ने वर्ष 2018 में नदी की सिल्ट निकालने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद कानपुर से आई टीम ने बड़ी मशीनों की मदद से कई महीने तक नदी में जमा सिल्ट निकाला था। इस काम से नदी की धारा को बीच की ओर मोड़ने में मदद मिली थी। इससे बांध के किनारों पर कटान का खतरा कम हुआ और आसपास के लोगों को राहत मिली थी। अब आठ साल बाद एक बार फिर सिल्ट निकालने की तैयारी शुरू हुई है।
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मुख्यमंत्री के निर्देश पर विशेषज्ञ टीमों ने किया निरीक्षण
इस साल 28 सितंबर को जवही दयाल के पास एपी बांध टूट गया था। नदी में साढ़े पांच लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से क्षेत्र में भारी तबाही हुई थी। इसके बाद हवाई सर्वेक्षण के लिए पहुंचे मुख्यमंत्री ने नदी के बहाव को संतुलित करने का निर्देश दिया था। इसके क्रम में 17 अक्तूबर को लखनऊ से विजय कुमार के नेतृत्व में मैकेनिकल टीम ने नदी का निरीक्षण किया। इसके एक सप्ताह बाद 25 अक्तूबर को वाराणसी से केके पांडेय के नेतृत्व में दूसरी टीम पहुंची। इस टीम ने बाढ़ खंड के अधीक्षण अभियंता रमेश प्रसाद, अधिशासी अभियंता विनोद कुमार वर्मा और सहायक अभियंता दीपरतन सिंह समेत अन्य अभियंताओं के साथ रविवार को नदी का जायजा लिया।
शासन को भेजी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट
निरीक्षण के बाद वाराणसी की टीम ने विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजने की बात कही है। इसके आधार पर सिल्ट निकालने की आगे की प्रक्रिया तय होने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों को आशा है कि इस बार नदी की धारा को नियंत्रित करने में सफलता मिलेगी और बांध के आसपास कटान का खतरा कम होगा। हालांकि बांध के किनारे बसे गांवों के लोगों का कहना है कि केवल तकनीकी उपाय पर्याप्त नहीं हैं। बांध की सुरक्षा के लिए उसके उच्चीकरण और चौड़ीकरण पर भी ध्यान देना जरूरी है। ग्रामीणों के अनुसार, बांध काफी जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। ऐसे में उसकी मजबूती के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
वर्जन
शासन के निर्देश पर बीएचयू प्रोफेसर ने एपी बांध का निरीक्षण किया है। उनके द्वारा सिल्ट निकालने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को रिपोर्ट भेजा जाएगा। शासन से प्राप्त निर्देश के क्रम में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- विनोद कुमार वर्मा, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड, कुशीनगर