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जलभराव से पुरातात्विक अवशेषों को खतरा
kushinagar
Updated Mon, 19 Sep 2016 12:06 AM IST
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- फोटो : santosh verma
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कसया। कुशीनगर स्थित भगवान बुद्ध के मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर के चारों तरफ जलभराव से उत्खनित पुरातात्विक महत्व के अवशेषों पर खतरा बढ़ गया है। इनको सुरक्षित रखने के लिए जिम्मेदार पुरातत्व विभाग अब तक कोई ठोस पहल नहीं कर पाया है। अगर समय रहते प्रयास नहीं हुए तो इनका अस्तित्व बचाना मुश्किल होगा।
कुशीनगर में मिले पुरातात्विक महत्व के अवशेषों की सुरक्षा, स्वच्छता और संरक्षित करने की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की है। इसके लिए कुशीनगर में वरिष्ठ संरक्षण अधिकारी की तैनाती की गई है। इसके बावजूद भी इन महत्वपूर्ण स्थलों की देखभाल में लापरवाही साफ दिख रही है। मुख्य मंदिर के अलावा रामाभार स्तूप जाने वाले मार्ग पर स्थित माथा कुंवर मंदिर में भी पूरा पानी भरा हुआ है। परंतु जलनिकासी का अब तक कोई प्रबंध नहीं किया गया है। जानकारों का मानना है कि दोनों स्थलों को सुरक्षित करने के लिए विभाग की तरफ से कोई कारगर कदम नहीं उठा तो अवशेषों के स्वरूप में परिवर्तन हो सकता है।
इस संबंध में पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ संरक्षण अधिकारी इंजीनियर पंकज तिवारी का कहना है कि कुछ दिन पूर्व पंपिगसेट मशीन से पानी को निकाला गया था, लेकिन बारिश होने की वजह से फिर से पानी भर गया है। इसका स्थायी निदान नहर की पटरी को ठीक कराने के बाद ही संभव है। जबकि अधीक्षण पुरातत्वविद सारनाथ मंडल वाराणसी केसी श्रीवास्तव का कहना है कि मामला संज्ञान में है। जलभराव वाली स्थिति से निपटने के लिए ठोस पहल करने पर विचार चल रहा है।
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कुशीनगर में मिले पुरातात्विक महत्व के अवशेषों की सुरक्षा, स्वच्छता और संरक्षित करने की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की है। इसके लिए कुशीनगर में वरिष्ठ संरक्षण अधिकारी की तैनाती की गई है। इसके बावजूद भी इन महत्वपूर्ण स्थलों की देखभाल में लापरवाही साफ दिख रही है। मुख्य मंदिर के अलावा रामाभार स्तूप जाने वाले मार्ग पर स्थित माथा कुंवर मंदिर में भी पूरा पानी भरा हुआ है। परंतु जलनिकासी का अब तक कोई प्रबंध नहीं किया गया है। जानकारों का मानना है कि दोनों स्थलों को सुरक्षित करने के लिए विभाग की तरफ से कोई कारगर कदम नहीं उठा तो अवशेषों के स्वरूप में परिवर्तन हो सकता है।
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इस संबंध में पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ संरक्षण अधिकारी इंजीनियर पंकज तिवारी का कहना है कि कुछ दिन पूर्व पंपिगसेट मशीन से पानी को निकाला गया था, लेकिन बारिश होने की वजह से फिर से पानी भर गया है। इसका स्थायी निदान नहर की पटरी को ठीक कराने के बाद ही संभव है। जबकि अधीक्षण पुरातत्वविद सारनाथ मंडल वाराणसी केसी श्रीवास्तव का कहना है कि मामला संज्ञान में है। जलभराव वाली स्थिति से निपटने के लिए ठोस पहल करने पर विचार चल रहा है।
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