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पडरौना रेलवे स्टेशन का हाल
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रात में अंधेरे में डूबा रहता है रेलवे स्टेशन परिसर
पडरौना (कुशीनगर)। पडरौना रेलवे स्टेशन परिसर में रात में प्रकाश की व्यवस्था नहीं है। परिसर में लगे हाईमास्क लैंप खराब पड़े हैं। रेलवे स्टेशन पर भी कम ही रोशनी रहती है। रात में 11 बजे यहां से छपरा-लखनऊ ट्रेन गुजरती है। उस वक्त स्टेशन पर काफी लोगों का आना जाना रहता है। ऐसे में अंधेरे के चलते लोग सहमे रहते हैं।
पडरौना रेलवे स्टेशन पर प्रकाश व्यवस्था के लिए प्लेटफार्म नंबर एक पर 16 और प्लेटफार्म नंबर दो पर 20 बिजली के पोल पर लाइट लगाई गई है। इसमें से दस पोल पर लगे बल्ब ही जलते हैं। लेकिन लाइट गुल होने के बाद पूरा स्टेशन अंधेरे में डूब जाता है। यदि कोई ट्रेन आती है तो कुछ समय के लिए जनरेटर से लाइट जलाई जाती है, लेकिन ट्रेन चले के जाने के बाद जनरेटर बंद हो जाता है, जिससे स्टेशन परिसर में पुन: अंधेरा छा जाता है। इसके अलावा स्टेशन के मुख्य गेट के पास एक फलैग लाइट और दो लैंप लाइट लगाया जा रहा है। अभी इसका निर्माण कार्य चल रहा है।
कप्तानगंज-थावे रेल मार्ग पर गोरखपुर-सिवान, गोरखपुर-पाटलिपुत्र और गोमती नगर-छपरा एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन होता है। इसके चलते रेलवे स्टेशन पर देर रात तक लोगों का आना-जाना लगा रहता है। स्टेशन पर अंधेरा होने से रात में ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
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स्टेशन अधीक्षक रामकुमार जायसवाल ने बताया कि स्टेशन परिसर में लाइट व्यवस्था इलेक्ट्रिक विभाग देखता है। स्टेशन पर खराब पड़े लाइटों के बारे में संबंधित को जानकारी उपलब्ध कराई जा चुकी है।
सभी रेलवे स्टेशनों पर रात के समय समुचित प्रकाश व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्देश संबंधित को दिए गए हैं। पडरौना रेलवे स्टेशन परिसर में भी बेहतर प्रकाश होनी चाहिए। यदि ऐसा नही है तो संबंधित से पूछताछ कर वहां प्रकाश व्यवस्था में सुदृढ़ रखने के निर्देश दिया जाएगा। इसमें लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
- अशोक कुमार, जनसंपर्क अधिकारी एनई रेलवे (वाराणसी)
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पडरौना (कुशीनगर)। पडरौना रेलवे स्टेशन परिसर में रात में प्रकाश की व्यवस्था नहीं है। परिसर में लगे हाईमास्क लैंप खराब पड़े हैं। रेलवे स्टेशन पर भी कम ही रोशनी रहती है। रात में 11 बजे यहां से छपरा-लखनऊ ट्रेन गुजरती है। उस वक्त स्टेशन पर काफी लोगों का आना जाना रहता है। ऐसे में अंधेरे के चलते लोग सहमे रहते हैं।
पडरौना रेलवे स्टेशन पर प्रकाश व्यवस्था के लिए प्लेटफार्म नंबर एक पर 16 और प्लेटफार्म नंबर दो पर 20 बिजली के पोल पर लाइट लगाई गई है। इसमें से दस पोल पर लगे बल्ब ही जलते हैं। लेकिन लाइट गुल होने के बाद पूरा स्टेशन अंधेरे में डूब जाता है। यदि कोई ट्रेन आती है तो कुछ समय के लिए जनरेटर से लाइट जलाई जाती है, लेकिन ट्रेन चले के जाने के बाद जनरेटर बंद हो जाता है, जिससे स्टेशन परिसर में पुन: अंधेरा छा जाता है। इसके अलावा स्टेशन के मुख्य गेट के पास एक फलैग लाइट और दो लैंप लाइट लगाया जा रहा है। अभी इसका निर्माण कार्य चल रहा है।
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कप्तानगंज-थावे रेल मार्ग पर गोरखपुर-सिवान, गोरखपुर-पाटलिपुत्र और गोमती नगर-छपरा एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन होता है। इसके चलते रेलवे स्टेशन पर देर रात तक लोगों का आना-जाना लगा रहता है। स्टेशन पर अंधेरा होने से रात में ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
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स्टेशन अधीक्षक रामकुमार जायसवाल ने बताया कि स्टेशन परिसर में लाइट व्यवस्था इलेक्ट्रिक विभाग देखता है। स्टेशन पर खराब पड़े लाइटों के बारे में संबंधित को जानकारी उपलब्ध कराई जा चुकी है।
सभी रेलवे स्टेशनों पर रात के समय समुचित प्रकाश व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्देश संबंधित को दिए गए हैं। पडरौना रेलवे स्टेशन परिसर में भी बेहतर प्रकाश होनी चाहिए। यदि ऐसा नही है तो संबंधित से पूछताछ कर वहां प्रकाश व्यवस्था में सुदृढ़ रखने के निर्देश दिया जाएगा। इसमें लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
- अशोक कुमार, जनसंपर्क अधिकारी एनई रेलवे (वाराणसी)