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जिला अस्पताल में महिला डॉक्टर नहीं, मरीजों की परेशानी बढ़ी

Fri, 15 Apr 2022 11:27 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 15 Apr 2022 11:27 PM IST
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doctor not available
महिला अस्पताल की कुर्सी खाली।संवाद। - फोटो : KUSHINAGAR
जिला अस्पताल में महिला डॉक्टर नहीं, मरीजों की परेशानी बढ़ी
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- गंभीर हालत में आने वाले प्रसव केस करने पड़ रहे रेफर
- एक महिला चिकित्साधिकारी सेवानिवृत्त, दूसरी पांच माह से मातृत्व अवकाश पर
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जिला अस्पताल में महिला डॉक्टर नहीं होने से मरीजों को दिक्कत हो रही है। यहां प्रसव संबंधी आने वाली मरीजों को स्टॉफ नर्सों के भरोसे रहना पड़ रहा है। इनमें गंभीर हालत वाली मरीजों को कसया सीएचसी या मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया जा रहा है।
जनपद के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर समुचित इलाज न होने पर मरीज जिला अस्पताल की तरफ रुख करते हैं कि उनका यहां मुकम्मल इलाज हो सकेगा, लेकिन ऐसा नहीं है। जिला अस्पताल अब खुद चिकित्सकीय स्टॉफ से जूझ रहा है। सबसे बड़ी समस्या यहां महिला चिकित्सक की है। जिला अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्साधिकारी के रूप में स्थायी रूप से एक महिला परामर्शदाता डॉ. रीता बर्नवाल थीं, जो 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो गईं। दूसरी महिला चिकित्सक डॉ. स्वाति जायसवाल हैं, जो सर्जन हैं। पिछले साल संविदा पर उनकी तैनाती हुई थी। उनके आने से जिला अस्पताल में ऑपरेशन से प्रसव की व्यवस्था थी। प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ने पर उन्हें रेफर नहीं करना पड़ता था, लेकिन वह पांच महीने से मातृत्व अवकाश पर हैं। उनका अवकाश अभी 20 जून को समाप्त होगा। यहां तैनात छह स्टॉफ नर्सों में दो-दो को आठ-आठ घंटे के शिफ्ट में तैनात किया जा रहा है। हालांकि यह उन्हीं मरीजों को संभाल पा रही हैं, जिनका सामान्य प्रसव हो सके। गंभीर हालत वाली महिलाओं को कसया सीएचसी अथवा मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ रहा है।
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कसया सीएचसी में ऑपरेशन से प्रसव की व्यवस्था
कसया के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की एमओआईसी डॉ. नीलकमल सर्जन हैं। लिहाजा, कसया सीएचसी में ऑपरेशन से प्रसव की सुविधा है। जिन मरीजों का सामान्य प्रसव नहीं हो पाता, उन्हें जिला अस्पताल से कसया सीएचसी भेजना पड़ता है।
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इन दिनों कोई महिला चिकित्सक यहां उपलब्ध नहीं हैं। इस वजह से प्रसव से संबंधित मरीजों के इलाज में कठिनाई हो रही है। गंभीर मरीजों को कसया सीएचसी या मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ रहा है। छह स्टॉफ नर्स हैं, जिनमें दो-दो की तीन शिफ्टों में ड्यूटी लगाई जा रही है।
- डॉ. एसके वर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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